दिल्ली कोर्ट ने CJP प्रदर्शनकारी पर हमले के मामले में स्वतंत्र भारद्वाज को दी स्थायी ज़मानत
Shahadat
6 Oct 2026 12:06 PM IST

दिल्ली कोर्ट ने मंगलवार को स्वतंत्र भारद्वाज को रेगुलर ज़मानत दी। यह मामला जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) की नाबालिग कार्यकर्ता के पिता पर कथित हमले से जुड़ा है।
पटियाला हाउस कोर्ट के एडिशनल सेशंस जज सौरभ प्रताप सिंह लालर ने यह आदेश दिया।
जज ने इससे पहले भारद्वाज को तीन हफ़्ते की अंतरिम ज़मानत दी थी।
15 सितंबर को अंतरिम ज़मानत देते समय अदालत ने दिल्ली पुलिस की जांच में कमियों और खामियों की ओर इशारा किया था और संबंधित जांच अधिकारी (IO) से इन मुद्दों पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था।
FIR पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 115(2), 126(2) और 351(3) के साथ धारा 3(5) के तहत, और साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के प्रावधानों के तहत दर्ज की गई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, शिकायतकर्ता 23 जून को अपनी बेटी और एक दोस्त के साथ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने जंतर-मंतर गया था। कथित तौर पर तब बहस हुई जब एक व्यक्ति ने शिकायतकर्ता के वीडियो रिकॉर्ड करने पर आपत्ति जताई।
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि भारद्वाज और उसके साथियों ने शिकायतकर्ता को घेर लिया और मुक्कों तथा कड़े जैसी कठोर चीज़ से उस पर हमला किया। शिकायतकर्ता के सिर पर दो गहरे घाव हुए।
शुरुआत में FIR, BNS की धाराओं 115(2) और 126(2) के तहत ज़मानत-योग्य अपराधों के लिए दर्ज की गई। उस समय भारद्वाज को गिरफ़्तार नहीं किया गया और वह BNSS की धारा 35(3) के तहत नोटिस मिलने पर जांच में शामिल हुआ।
हालांकि, 4 सितंबर को शिकायतकर्ता ने एक अतिरिक्त बयान दिया, जिसमें उसने दावा किया कि वह अनुसूचित जाति से है और आरोप लगाया कि उसके और उसकी नाबालिग बेटी के ख़िलाफ़ जाति-आधारित अपमानजनक टिप्पणियां की गई थीं। इसके बाद SC/ST Act और BNS की धारा 351(3) के प्रावधान जोड़े गए। इसके बाद भारद्वाज को गिरफ़्तार कर लिया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

