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दिल्ली पुलिस ने एडवोकेट महमूद प्राचा के कार्यालय की तलाशी के वीडियो फुटेज को अदालत की मुहर के साथ संरक्षित करने का आदेश दिया

LiveLaw News Network
28 Dec 2020 3:26 AM GMT
दिल्ली पुलिस ने एडवोकेट महमूद प्राचा के कार्यालय की तलाशी के वीडियो फुटेज को अदालत की मुहर के साथ संरक्षित करने का आदेश दिया
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दिल्ली की एक अदालत ने रविवार को ‌निर्देश दिया कि एडवोकेट महमूद प्राचा के कार्यालय पर दो दिन पहले दिल्ली पुलिस द्वारा की गई तलाशी के पूरे वीडियो फुटेज को अदालत की मुहर के साथ संरक्षित रखा जाए।

पटियाला हाउस कोर्ट ने एडवोकेट महमूद प्राचा द्वारा गुरुवार को अपने कार्यालय में दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए छापे की वीडियो फुटेज की प्रतियों को संरक्षित करने के लिए दिए गए आवेदन पर उक्त निर्देश दिया।

अदालत ने शुक्रवार को दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों की जांच से जुड़े पुलिस अधिकारी को तलब किया था। इसके अलावा दिल्ली पुलिस द्वारा इस मामले में पेश एक वकील के कार्यालय में की गई तलाशी के पूरे वीडियो फुटेज को पेश करने को कहा गया था।

हालांकि, पटियाला हाउस कोर्ट के ड्यूटी मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट उद्भव कुमार जैन ने रविवार को प्राचा को फुटेज की एक प्रति देना आवश्यक नहीं समझा।

आवेदक-एडवोकेट ने वीडियो फुटेज की अवधि पर प्रश्न उठाया था और फुटेज की आपूर्ति का अनुरोध किया था। जज ने यह नोट करना अनिवार्य पाया कि वीडियो फुटेज, जो विवाद का कारण है, को सीएमएम द्वारा 22 दिसंबर को पारित आदेश के अनुसार ली जा गई तलाशी की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए रिकॉर्ड किया गया था।

आदेश में कहा गया, "इस स्तर पर केवल वीडियो फुटेज को संरक्षित करने के दिशा-निर्देश आवश्यक हैं। संबंधित अदालत आवेदक को उचित चरण में वीडियो फुटेज की आपूर्ति करने का आदेश दे सकती है। तलाशी के पूरे वीडियो फुटेज को इस अदालत की मुहर के साथ संरक्षित करें और तदनुसार आदेश के लिए संबंधित अदालत के सामने पेश करें।"

जैसा कि धारा 165 (5) सीआरपीसी के तहत आवेदन के संबंध में, जज ने फाइल के अवलोकन पर पाया कि 22 दिसंबर को सर्च वारंट के क्रियान्वयन की रिपोर्ट 26 दिसंबर को दर्ज की गई थी, और आज उसी को प्राचा को दिया गया है, इसलिए, आवेदन को उस सीमा तक अनुमति दी गई थी।

तलाशी के वीडियो फुटेज सहित मामले में जब्‍त संपत्ति के साथ जांच अधिकारी अदालत में पेश हुआ था।

जज ने कहा, "यह स्पष्ट किया गया है कि उसी को मालखाना विभाग को सौंप दिया गया था। इस स्तर पर, मालखाना के सीटी रघुनंदन, पीएस स्पेशल सेल लोधी कॉलोनी ने अवगत कराया है कि उक्त वीडियो फुटेज प्राप्त कर ली गई है और विवरण को एक रजिस्टर में दर्ज किया गया है, जिसकी संख्या नियमानुसार 19 है। यह भी अवगत कराया गया है कि संबंधित जांच अध‌िकारी को नियमानुसार सामग्री सौंपने के बाद कोई पावती प्राप्त नहीं दी गई है। ऐसी कोई प्रविष्टि आज उपलब्ध नहीं है।"

एमएम ने यह भी नोट किया कि अब तक कोई भी उक्त वीडियो फुटेज की कोई हैश वैल्यू नहीं है, क्योंकि राज्य एपीपी ने कहा है कि एफएसएल विभाग द्वारा हैश वैल्यू उत्पन्न होती है।

प्राचा ने जांच अधिकारियों और अन्य अधिकारियों की उपस्थिति पर आपत्ति जताई और कहा कि वे उचित वर्दी में मौजूद नहीं हैं।

जज ने कहा, "हालांकि, यह जांच अ‌‌धिकारी इंस्पेक्टर राजीव कुमार ने अवगत कराया है कि विशेष प्रकोष्ठ के सदस्य होने के नाते उन्हें इस तरह की छूट दी गई है। फिर भी, यह अदालत इस आपत्ति को एक तुच्छ मुद्दा मानती है और जहां तक अधिकारियों के पहनावे का संबंध है, इसके लिए किसी आदेश की आवश्यकता नहीं है।"

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