BJP का टिकट पाने के लिए व्यक्ति ने योगी आदित्यनाथ के नाम से PM Modi को लिखा पत्र, कोर्ट ने ठहराया दोषी

Shahadat

7 April 2026 9:51 AM IST

  • BJP का टिकट पाने के लिए व्यक्ति ने योगी आदित्यनाथ के नाम से PM Modi को लिखा पत्र, कोर्ट ने ठहराया दोषी

    दिल्ली कोर्ट ने एक व्यक्ति को दोषी ठहराया। उस पर आरोप था कि उसने 2019 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में BJP का टिकट पाने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखी गई एक कथित सरकारी चिट्ठी में हेराफेरी की थी।

    राउज़ एवेन्यू कोर्ट की एडिशनल चीफ ज्यूडिशियरी मजिस्ट्रेट ज्योति माहेश्वरी ने कहा कि मनगढ़ंत सरकारी कामों में सरकारी अधिकारियों के नामों का गलत इस्तेमाल "जनता के भरोसे की बुनियाद पर ही चोट करता है।"

    जज ने कहा,

    "सरकारी अधिकारियों के नामों के गलत इस्तेमाल को अक्सर छोटी-मोटी बात मानकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, लेकिन जब यह किसी मनगढ़ंत सरकारी काम का रूप ले लेता है तो यह जनता के भरोसे की बुनियाद पर ही चोट करता है।"

    कोर्ट ने आरोपी शिवाजी यादव को भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) की धारा 465 (जालसाज़ी) और 471 (किसी जाली दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का असली के तौर पर धोखे से या बेईमानी से इस्तेमाल करना) के तहत दंडनीय अपराधों के लिए दोषी ठहराया।

    यह मामला 10 जून, 2019 की चिट्ठी से जुड़ा है, जिसे कथित तौर पर योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा था। इस चिट्ठी में आरोपी के लिए लखनऊ कैंट विधानसभा सीट से BJP का टिकट देने की सिफारिश की गई थी।

    हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने इस चिट्ठी को संदिग्ध मानते हुए CBI जांच के आदेश दिए। जांच में पता चला कि यह चिट्ठी जाली थी और मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी नहीं की गई।

    आरोपी को दोषी ठहराते हुए जज ने कहा कि यह चिट्ठी उसी ने जाली तरीके से तैयार की थी और यह जानते हुए भी कि यह जाली और झूठी है, इसे PMO को एक असली दस्तावेज़ के तौर पर भेजा था।

    कोर्ट ने कहा कि हालात बिना किसी उचित संदेह के साबित हो गए, और ये आरोपी के दोषी होने की ओर इशारा करते हैं। आरोपी अपने खिलाफ़ मौजूद इन संदिग्ध हालात के बारे में कोई भी भरोसेमंद सफाई देने में नाकाम रहा।

    कोर्ट ने कहा,

    "CBI द्वारा की गई जांच इन सभी पहलुओं पर पूरी हो चुकी है। जांच के नतीजों और रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों के आधार पर आरोपी शिवाजी यादव का दोषी होना बिना किसी उचित संदेह के साबित हो गया।"

    कोर्ट ने आगे कहा कि इस मामले से यह साफ होता है कि एक संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी के नाम और पद का इस्तेमाल करके एक मनगढ़ंत संदेश को असली दिखाने की जान-बूझकर कोशिश की गई थी। ऐसे कामों से सरकारी प्रक्रियाओं और संदेशों की पवित्रता को ठेस पहुंचने का खतरा रहता है।

    जज ने निष्कर्ष निकाला,

    "इसलिए जहां रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत यह साफ़ तौर पर साबित करते हैं कि धोखा देने के इरादे से कोई झूठा दस्तावेज़ बनाया और इस्तेमाल किया गया, वहां कानून को अपना काम करना ही चाहिए।"

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