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जयपुर गोल्डन अस्पताल में कोरोनो से मौत: एसआईटी जांच और मुआवजे की मांग करते हुए परिजन दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे

LiveLaw News Network
28 May 2021 7:00 AM GMT
जयपुर गोल्डन अस्पताल में कोरोनो से मौत: एसआईटी जांच और मुआवजे की मांग करते हुए परिजन दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे
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9 पीड़ितों के परिवार द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर 23 और 24 अप्रैल को जयपुर गोल्डन अस्पताल में हुई मौतों की कोर्ट की निगरानी में सीबीआई एसआईटी से जांच करवाने, महत्वपूर्ण रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज जब्त करने और इन पीड़ितों के परिजनों को मुआवजा देने की मांग की गई है।

अधिवक्ता उत्सव बैंस के माध्यम से दायर याचिका में सिंगल माता/पिता, अनाथों या उन परिवारों को मासिक भरण-पोषण भत्ता प्रदान करने की भी प्रार्थना की गई है, जिन्होंने प्रतिवादी अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण अपने कमाने वाले सदस्य को खो दिया है।

याचिका में निम्नलिखित को प्रतिवादी बनाया गया हैः स्वास्थ्य मंत्रालय के माध्यम से भारत संघ, गृह मंत्रालय, दिल्ली सरकार, स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से दिल्ली के सरकार और जयपुर गोल्डन अस्पताल।

याचिका में कहा गया है कि,''..यह ज्ञान होते हुए भी कि ऑक्सीजन की कमी कोरोना रोगियों के जीवन के लिए घातक होगी और तुरंत उनकी मृत्यु का कारण बन सकती है, प्रतिवादियों ने निष्क्रियता दिखाई और ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति प्रदान करने में विफल रहे। इसलिए यहां प्रतिवादी न केवल मृतकों के परिजनों को मुआवजे का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है,बल्कि आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए भी।''

यह भी कहा गया कि दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की तीन सदस्यीय कमेटी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट गलत थी। याचिका में कहा गया है कि रिपोर्ट में मौत का कारण डॉक्टरों द्वारा श्वसन विफलता के रूप में उल्लेख किया गया था, क्योंकि मृतक को समय पर उचित ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं की गई थी।

इसे देखते हुए, यह भी दलील दी गई है कि,

''अस्पताल का कहना है कि जब ऑक्सीजन की आपूर्ति समय पर नहीं हुई तो मृतक को ऑक्सीजन सिलेंडर लगा दिया गया, हालांकि, अपेक्षित दबाव नहीं था और उसी के कारण ऑक्सीजन की कमी से दम घुटने से रोगियों की मृत्यु हो गई। कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि मरीजों को किसी तरह से ऑक्सीजन थेरेपी मिल रही थी, जो माननीय न्यायालय को गुमराह करने के लिए है। कमेटी ने अस्पताल में ऑक्सीजन की मांग और आपूर्ति के मुद्दे की जांच नहीं की।''

याचिका में प्रार्थना की गई है कि 2 मई की उक्त रिपोर्ट को रद्द कर दिया जाए और मामले में याचिकाकर्ताओं के परिवार के सदस्यों की मौत के कारणों की सीबीआई द्वारा नए सिरे से जांच की जाए।

याचिका में आगे कहा गया है कि,

''आरोपियों को विशिष्ट क्षेत्र और विशेषज्ञता से ज्ञान था कि यदि मरीजों को ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होती है, तो यह बिना किसी संदेह के तुरंत उनकी मृत्यु का कारण बन जाएगा। यह तथ्य आईपीसी की धारा 304 के आवश्यक घटक को पूरा करता है, अर्थात, ''यदि कार्य इस ज्ञान के साथ किया जाता है कि इससे मृत्यु होने की संभावना है, लेकिन मृत्यु या ऐसी शारीरिक चोट का कोई इरादा नहीं है जिससे मृत्यु होने की संभावना हो।''

याचिका में निम्नलिखित प्रार्थनाओं की गई हैंः

- प्रतिवादी नंबर 5 के अस्पताल में 23-24 अप्रैल 2021 को हुई मौतों की अदालत की निगरानी वाली सीबीआई एसआईटी से जांच करवाने व समयबद्ध तरीके से इस माननीय न्यायालय को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए रिट, आदेश या निर्देश जारी किया जाए।

- जयपुर गोल्डन जयपुर गोल्डन हॉस्पिटल, नई दिल्ली के 23.04.2021 से 24.04.2021 तक के सीसीटीवी फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड को जब्त करने के लिए कोई रिट, आदेश या निर्देश जारी करें।

- दिल्ली सरकार(तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट) द्वारा प्रस्तुत दिनांक 02.05.2021 की रिपोर्ट को रद्द करने के लिए कोई रिट, आदेश या निर्देश जारी करें।

- भारत के संविधान के आर्टिकल 21 के तहत गारंटीकृत उनके मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा देने के लिए प्रतिवादियों को कोई रिट, आदेश या निर्देश जारी करें।

- प्रतिवादियों को एकल माता/पिता, अनाथों या उन परिवारों को मासिक भरण-पोषण भत्ता प्रदान करने के लिए कोई रिट, आदेश या निर्देश जारी करें, जिन्होंने प्रतिवादियों की निष्क्रियता के कारण अपने कमाने वाले सदस्य को खो दिया है।

- ऑक्सीजन की आपूर्ति न करने के लिए जिम्मेदार दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के लिए प्रतिवादियों को कोई रिट, आदेश या निर्देश जारी किया जाए।

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