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''धूर्त और बहरूपिये लोग फायदा उठा रहे हैं'':पटना हाईकोर्ट ने राज्य को ऑक्सीजन व दवाओं की कालाबाजारी करने वाले के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया

LiveLaw News Network
29 April 2021 8:00 AM GMT
धूर्त और बहरूपिये लोग फायदा उठा रहे हैं:पटना हाईकोर्ट ने राज्य को ऑक्सीजन व दवाओं की कालाबाजारी करने वाले के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया
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दूसरी लहर में बिहार राज्य में COVID19 के मामलों में आई खतरनाक उछाल और बिहार राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था की कमी से संबंधित मामलों की सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने बुधवार (28 अप्रैल) को बिहार सरकार को कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह और न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह की खंडपीठ ने कई मुद्दों पर चर्चा की और तदनुसार आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।

ऑक्सीजन की आपूर्ति

बिहार राज्य ने न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया कि केंद्र सरकार से 300 मीट्रिक टन ऑक्सीजन के आवंटन का अनुरोध किया गया था परंतु बिहार राज्य के लिए 194 मीट्रिक टन ऑक्सीजन आवंटित की गई है।

यह भी प्रस्तुत किया गया कि उपलब्ध क्रायोजेनिक टैंकरों के साथ, तरल ऑक्सीजन की खरीद का प्रयास किया जा रहा था। आगे यह भी बताया गया कि बिहार राज्य में ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्रों की संख्या में भी वृद्धि की गई है।

अंत में, यह प्रस्तुत किया गया कि 26 अप्रैल 2021 तक बिहार राज्य के पास COVID19 की दूसरी लहर से उत्पन्न चुनौतियों को पूरा करने के लिए चिकित्सा ऑक्सीजन की उपलब्धता की कमी नहीं थी।

हालांकि, यह देखते हुए कि विभिन्न अस्पतालों से कई शिकायतें मिल रही हैं कि कोरोना के रोगियों के इलाज के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति पर्याप्त नहीं है, अदालत ने कहा कि बिहार राज्य के इस रुख को स्वीकार करना मुश्किल है क्योंकि बिहार राज्य में कोरोना के मामलों में हुई वृद्धि घातीय और अबाधित मानी गई है।

इसके अलावा, न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया कि,

''भारत सरकार द्वारा प्रतिदिन के लिए आवंटित ऑक्सीजन के अपने कोटे को पाने के लिए सभी संभव उपाय किए जाए ताकि सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके और राज्य में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली आने वाले दिनों में चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो सके।''

यह देखते हुए कि राज्य सरकार द्वारा ऑक्सीजन/ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदने के लिए कोई प्लेटफाॅर्म उपलब्ध नहीं कराया गया है, न्यायालय ने बिहार राज्य से कहा है कि वह इस पहलू पर विचार करें और अदालत को सूचित करें कि किन कदमों पर विचार किया गया है।

COVID19 के लिए टेस्ट की क्षमता

बिहार राज्य द्वारा प्रस्तुत किया गया था कि बिहार राज्य में 19 आरटी-पीसीआर प्रयोगशालाएँ कार्यरत हैं और इसके अलावा, मोतिहारी जिले में एक आरटी-पीसीआर प्रयोगशाला स्थापित की गई है, जिसको मान्यता देने पर आईसीएमआर विचार कर रहा है।

यह भी कहा गया कि राज्य में विभिन्न प्रयोगशालाओं में एक बार 18 प्रस्तावित मशीनें स्थापित कर दी जाएंगी तो प्रतिदिन आरटी-पीसीआर टेस्ट की संख्या में 8000-10000 की वृद्धि होगी।

मामले की सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि नमूने लेने के बाद आरटी-पीसीआर टेस्ट का परिणाम जल्द या उचित समय के भीतर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है और आमतौर पर इन टेस्ट का परिणाम को भेजने में 5-6 दिनों से अधिक समय लिया जा रहा है।

न्यायालय ने देखा,

'' संक्रमण के उग्र व्यवहार को देखते हुए जैसे ही कोई व्यक्ति संक्रमित होता है,उसके बाद उस व्यक्ति के बारे में यह पता लगाना कि वह कोरोना से पीड़ित है या नहीं, यह न केवल उस व्यक्ति के उपचार के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि इस बीमारी को दूसरों के बीच फैलने से रोका जाए।''

इसके अलावा, भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने न्यायालय को सूचित किया कि केंद्र सरकार द्वारा एक तकनीकी टीम की प्रतिनियुक्ति की गई है और वह अपना काम कर रही है, ताकि बिहार राज्य में स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं की कमियों का आकलन करते हुए सरकार को सुझाव दिए जा सकें।

इसे देखते हुए, कोर्ट ने निर्देश दिया कि टीम आरटी-पीसीआर टेस्ट के पूर्वोक्त पहलू और COVID19 के लिए अन्य पुष्टिकरण टेस्ट की उपलब्धता की जांच करे और न्यायालय को सूचित करे कि कैसे प्रति दिन किए जाने वाले टेस्ट की संख्या में सुधार किया जा सकता है? वहीं कैसे इन टेस्ट के परिणाम को भेजने में लिए जाने वाले दिनों की संख्या को कम किया जा सकता है? इसके लिए न्यायालय अगली तारीख पर इस संबंध में उचित आदेश पारित करेगा।

COVID रोगियों के इलाज के लिए जरूरी ऑक्सीजन और अन्य दवाओं की कालाबाजारी

शुरुआत में, अदालत ने कहा,

''यह सच है कि जब महामारी के एक अभूतपूर्व प्रकोप के कारण मानव जाति सबसे अंधकारमय दौर से गुजर रही है, तो कुछ धूर्त और बहरूपिये लोग फायदा उठा रहे हैं जो मानव कष्टों का लाभ उठाते हुए अवैध तरीकों से लाभ प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।''

इसके अलावा, न्यायालय ने कहा कि अगर कोरोना के रोगियों के इलाज के लिए आवश्यक ऑक्सीजन/ ऑक्सीजन सिलेंडर/दवाओं की कालाबाजारी राज्य के अधिकारियों के संज्ञान में थी, तो संबंधित अधिकारी कानून के तहत उचित कार्रवाई करने के लिए कानून के तहत बाध्य थे। अन्यथा इन चुनौतियों के मद्देनजर हो रहे बुरे कामों के लिए उनको भी पक्षकार बनने का दोषी ठहराया जा सकता है, जिनका वर्तमान में बड़े पैमाने पर समाज सामना कर रहा है।

कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या राज्य के अधिकारियों ने कोरोना रोगियों के इलाज के लिए आवश्यक दवाओं की कालाबाजारी करने का आरोप लगाते हुए कोई मामला दर्ज किया है?

न्यायालय ने कहा कि यह कार्यपालिका की ओर से एक गंभीर विफलता होगी यदि इस तरह के दुराचार में लिप्त लोगों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाती है, जिसमें आपराधिक दायित्व भी शामिल है।

स्वास्थ्य कर्मियों पर हमला

स्वास्थ्य कर्मियों पर हमला करने के बारे में, अदालत ने कहा कि,

'' इस समय राज्य के अधिकारियों को उन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए जो स्वास्थ्य सेवा कर्मियों के खिलाफ अपराध करने के मामले में आरोपी पाए जाते हैं।''

बेड की कमी के बारे में, कोर्ट ने कहा कि,

''कोरोना के मरीजों के लिए बेड की कमी को कुछ हद तक निजी अस्पतालों को उपचार के लिए बिस्तरों की संख्या बढ़ाने की अनुमति देकर दूर किया जा सकता है। वैकल्पिक रूप से, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के प्रावधानों को लागू करते हुए, राज्य सरकार आपातकालीन स्थिति में रोगियों के उपचार के लिए ऐसे निजी अस्पतालों और अन्य प्रतिष्ठानों से ऐसा करने में सहायता कर सकती है।''

बेंच ने बिहार राज्य में व्याप्त गंभीर स्थिति को देखते हुए, इस मामले पर प्रतिदिन सुनवाई करने का फैसला किया है।

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