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कोर्ट को पार्टियों को गॉर्जियनशिप के मामलों में मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य देने की अनुमति देनी चाहिए: मद्रास हाईकोर्ट

Avanish Pathak
21 Jun 2022 8:07 AM GMT
कोर्ट को पार्टियों को गॉर्जियनशिप के मामलों में मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य देने की अनुमति देनी चाहिए: मद्रास हाईकोर्ट
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मद्रास हाईकोर्ट की एक पीठ ने हाल ही में एक सिंगल जज के फैसले पर दिए अवलोकन में कहा कि सिंगल जज का आदेश पार्टियों को मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य देने का अवसर दिए बिना पारित किया गया था। जस्टिस एम दुरईस्वामी और जस्टिस सुंदर मोहन की पीठ ने मामले में अपने नाबालिग बच्चे की कस्टडी की मांग कर रहे एक पिता की अपील को अनुमति दे दी।

कोर्ट ने कहा,

"यह तय कानून है कि अभिभावक की नियुक्ति के मुद्दे पर दायर मूल याचिका पर निर्णय लेते समय अदालतों को पार्टियों को मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य देने की अनुमति देनी चाहिए। केवल इसी आधार पर विद्वान एकल जज द्वारा पारित 2020 के आदेश OP No.423 रद्द किए जाने योग्य है।"

मौजूदा मामले में अपीलकर्ता-पति ने गॉर्डियन एंड वार्ड एक्ट की धारा 3, 7 से 10 और धारा 25 सहपठित मूल पक्ष नियमावली के आदेश XXI नियम 2 और 3 के तहत मूल याचिका दायर की थी, जिसमें उन्हें नाबालिग बेटे की स्थायी कस्टडी प्रदान करने और उसे नाबालिग बेटे की गॉर्जियन नियुक्त करने की प्रार्थना की गई थी।

सिंगल जज ने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि प्रतिवादी-पत्नी द्वारा प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट III, पलाकड, केरल के समक्ष दायर आपराधिक विविध याचिका को इस कारण खारिज कर दिया गया था कि याचिका प्रतिवादी-पति द्वारा ठीक से नहीं लड़ी गई थी।

अपीलकर्ता और प्रतिवादी दोनों ने प्रस्तुत किया कि उन्हें अपने मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य देने का अवसर नहीं दिया गया। वकीलों ने यह भी सुझाव दिया कि मूल याचिका के निपटान के लिए एक समय सीमा तय की जा सकती है और दोनों पक्ष याचिका के शीघ्र निपटान के लिए सहयोग करेंगे।

उसी के आलोक में, अदालत ने रद्द किया और पक्षकारों को मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य देने के बाद मामले को नए सिरे से तय करने के लिए मामले को विद्वान सिंगल जज को वापस भेज दिया गया। सिंगल जज को भी मूल याचिका का यथाशीघ्र निपटान करने का निर्देश दिया गया था...।

इस बीच नाबालिग बच्चे की कस्टडी पिता के पास जारी रखी गई और मां को सिंगल जज के समक्ष की गई व्यवस्था के अनुसार वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बच्चे से बातचीत जारी रखने की इजाजत दी गई।

केस टाइटल: ए शामसुदीन राजा बनाम रानीशा पीवी

केस नंबर: OSA NO 152 of 2022

साइटेशन: 2022 लाइव लॉ (Mad) 258

फैसला पढ़ने/डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें

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