PM Modi और सीएम आदित्यनाथ पर सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर प्रो. मधु किश्वर के खिलाफ FIR की मांग

Shahadat

11 April 2026 9:59 AM IST

  • PM Modi और सीएम आदित्यनाथ पर सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर प्रो. मधु किश्वर के खिलाफ FIR की मांग

    वाराणसी में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत में शिकायत मामला दायर किया गया, जिसमें शिक्षाविद और लेखिका प्रो. मधु पूर्णिमा किश्वर के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई।

    यह शिकायत वकील शशांक शेखर त्रिपाठी ने दायर की, जो काशी क्षेत्र में BJP लीगल सेल के संयोजक भी हैं। शिकायत में प्रो. किश्वर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और न्यायपालिका को निशाना बनाते हुए एक लगातार, दुर्भावनापूर्ण और सोची-समझी सोशल मीडिया मुहिम चलाने का आरोप लगाया गया।

    शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने इसे 'विविध शिकायत मामला' (Miscellaneous Complaint Case) के तौर पर दर्ज किया और स्थानीय पुलिस से इस पर एक रिपोर्ट (आख्या) तलब की।

    BNSS की धारा 173(4) के तहत दायर इस शिकायत में आरोप लगाया गया कि प्रो. किश्वर ने प्रधानमंत्री को "एपस्टीन लिस्ट" से जोड़कर और उनके "आपराधिक संबंधों" का आरोप लगाकर उनके खिलाफ बेहद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। इससे देश के सर्वोच्च कार्यकारी पद की गरिमा को ठेस पहुंची है।

    याचिका में यह भी कहा गया कि सोशल मीडिया पोस्ट में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के खिलाफ भी अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। विशेष रूप से, उनके नेतृत्व को 'तानाशाही' बताकर उनकी सार्वजनिक छवि को धूमिल करने की कोशिश की गई।

    शिकायतकर्ता का आरोप है कि किश्वर की वे पोस्ट, जिनमें "PM द्वारा सीधी कार्रवाई" की बात कही गई, उनका मकसद न्यायिक प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण दिखाना और संस्थागत स्वतंत्रता पर जनता के विश्वास को कमज़ोर करना था।

    इसके अलावा, आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया कि प्रो. किश्वर धार्मिक मुद्दों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही थीं, ताकि समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाया जा सके। इसके लिए उन्होंने "धर्मांतरण माफिया" और "हिंदू आक्रोश" जैसे 'भड़काऊ' जुमलों का इस्तेमाल किया।

    शिकायत में कहा गया,

    "...आपराधिक इरादा (Mens Rea) साफ़ है... कि आरोपी (प्रो. किश्वर) जान-बूझकर झूठी बातें फैला रही हैं, सबूत देने से बच रही हैं और जनता को प्रभावित करने के लिए एक सोची-समझी मुहिम चला रही हैं... इसका सामाजिक असर और संभावित खतरा यह है कि आरोपी के कामों से समाज में भ्रम और असंतोष पैदा हो रहा है, संवैधानिक संस्थाओं पर लोगों का भरोसा कम हो रहा है, सांप्रदायिक सौहार्द पर बुरा असर पड़ रहा है और कानून-व्यवस्था के लिए खतरा पैदा हो सकता है।"

    वकील त्रिपाठी ने यह भी कहा है कि इन पोस्टों का "व्यापक नकारात्मक असर" एक गंभीर चिंता का विषय था और वाराणसी में सिविल कोर्ट परिसर में वकीलों और नागरिकों के बीच इस पर कड़ी आपत्ति जताई गई।

    इस पृष्ठभूमि को देखते हुए शिकायतकर्ता ने मांग की कि तुरंत FIR दर्ज करने और डिजिटल सबूतों तथा किश्वर के सोशल मीडिया खातों की जांच करने का निर्देश दिया जाए। इसमें यह भी मांग की गई है कि इस कथित मुहिम में मदद करने वाले अज्ञात सह-आरोपियों की पहचान करके उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाए।

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