दिल्ली प्रदर्शन में हिरासत का मामला: CJP सदस्य ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की Habeas Corpus याचिका, याचिकाकर्ता ने अब वापस लेने की मांग की

  • दिल्ली प्रदर्शन में हिरासत का मामला: CJP सदस्य ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की Habeas Corpus याचिका, याचिकाकर्ता ने अब वापस लेने की मांग की

    दिल्ली में 10 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर प्रस्तावित प्रदर्शन के संबंध में कथित तौर पर हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के पदाधिकारियों और अन्य लोगों की रिहाई की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका दाखिल की गई। हालांकि, 11 अक्टूबर को रात 1:01 बजे के अपडेट के अनुसार, याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह याचिका कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से आधिकारिक रूप से दाखिल नहीं की गई थी। नवीनतम घटनाक्रम में याचिकाकर्ता गौरव भारती ने याचिका वापस लेने की मांग की है।

    यह याचिका CJP के कवरेज कोऑर्डिनेटर गौरव भारती ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की थी। याचिका अधिवक्ता राजेश जी. इनामदार और शाश्वत आनंद के माध्यम से दायर की गई। इसमें पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक सौरव दास, प्रवक्ता आशुतोष रंका तथा अन्य नामित और अज्ञात व्यक्तियों को कथित रूप से हिरासत में लिए जाने या उनकी आवाजाही पर रोक लगाए जाने को चुनौती दी गई।

    याचिका की तत्काल सुनवाई की मांग

    सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड राजेश जी. इनामदार ने याचिका की तत्काल सुनवाई के लिए रजिस्ट्री का रुख किया। उन्होंने याचिका डायरी नंबर 63926/2026 को एक अन्य बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका, डायरी नंबर 63858/2026, के साथ सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।

    दूसरी याचिका पर रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष सुनवाई निर्धारित थी।

    याचिका 10 अक्टूबर की शाम दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उन्हें उम्मीद थी कि प्रदर्शन के संबंध में हिरासत में लिए गए लोगों को शाम तक रिहा कर दिया जाएगा। ऐसा नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया।

    एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए जाने का आरोप

    याचिका से संबंधित रिपोर्टों के अनुसार, अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका की उड़ान दिल्ली में उतरने के बाद उन्हें इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कथित तौर पर रोककर हिरासत में लिया गया। आरोप है कि वे जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जा रहे थे।

    प्रदर्शन में शामिल होने के इच्छुक अन्य CJP सदस्यों, कार्यकर्ताओं और लोगों को भी विभिन्न स्थानों पर हिरासत में लिए जाने या उनकी आवाजाही प्रतिबंधित किए जाने की खबरें सामने आईं। कुछ घटनाएं दिल्ली से बाहर की भी बताई गईं।

    हिरासत में लिए गए लोगों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग

    याचिका में संबंधित अधिकारियों से मांग की गई कि वे हिरासत में लिए गए सभी लोगों की पहचान, उन्हें हिरासत में लेने की परिस्थितियां, कानूनी आधार, जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों को बताए गए कारणों की जानकारी दें। साथ ही, उनके वर्तमान ठिकाने का खुलासा करने की मांग की गई।

    याचिका में गिरफ्तारी से संबंधित रिकॉर्ड, पुलिस स्टेशन की डायरियां और व्यक्तियों की आवाजाही के रजिस्टर पेश करने की भी मांग की गई है।

    इसके अतिरिक्त, हवाई अड्डे, पुलिस थानों, लॉक-अप और अन्य संबंधित स्थानों की CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का अनुरोध किया गया है। पुलिस कंट्रोल रूम के लॉग और मूवमेंट रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग भी की गई, ताकि कथित हिरासत और लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने की परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।

    अनुच्छेद 14, 19, 21 और 22 के उल्लंघन का मुद्दा उठाया

    याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 22 का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता ने समानता के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा करने के अधिकार, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गिरफ्तारी एवं हिरासत से जुड़े संवैधानिक सुरक्षा उपायों का मुद्दा उठाया है।

    याचिका में तर्क दिया गया कि किसी प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उसके आयोजकों, अधिवक्ताओं, समर्थकों या संभावित प्रतिभागियों को बिना किसी स्वतंत्र कानूनी आधार के हिरासत में लिया जा सकता है। इसमें सार्वजनिक सभाओं के नियमन और किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता छीनने के बीच अंतर किए जाने पर जोर दिया गया है।

    इस संबंध में डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य, कामेश्वर प्रसाद बनाम बिहार राज्य, हिमत लाल के. शाह बनाम अहमदाबाद पुलिस आयुक्त और रामलीला मैदान घटना, इन री जैसे सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी हवाला दिया गया है।

    केंद्र और कई राज्यों को बनाया गया पक्षकार

    याचिका में भारत संघ, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तथा हरियाणा, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश राज्यों को प्रतिवादी बनाया गया है। यह कदम विभिन्न राज्यों में लोगों को कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने या उनकी आवाजाही रोके जाने की घटनाओं के मद्देनजर उठाया गया।

    याचिका में यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी विशिष्ट अपराध के संबंध में ठोस सामग्री के आधार पर की जाने वाली वैध कानूनी कार्रवाई से छूट की मांग नहीं की जा रही है। इसके बजाय, कथित हिरासत की न्यायिक जांच, हिरासत में रखने का कानूनी आधार सार्वजनिक करने और अवैध रूप से हिरासत में रखे गए लोगों की रिहाई की मांग की गई है।

    बाद का घटनाक्रम: याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि मामला कॉकroach जनता पार्टी की आधिकारिक याचिका के रूप में दाखिल नहीं किया गया था। नवीनतम अपडेट के अनुसार, याचिकाकर्ता गौरव भारती ने इसे वापस लेने की मांग की है।

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    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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