CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका ने कोर्ट में दिया वचन, जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का नहीं करेंगे आह्वान
Shahadat
21 Oct 2026 9:07 PM IST

दिल्ली के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (Special Executive Magistrate) ने CJP नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास को न्यायिक हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया। उन्होंने लिखित वचन दिया कि वे शांति भंग नहीं करेंगे और भरोसा दिलाया कि जब तक जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किया जाता, तब तक वे वहां किसी विरोध प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे।
दोनों नेताओं ने यह भी कहा कि वे जो भी विरोध प्रदर्शन करेंगे, वह भारत के संविधान के दायरे में रहकर ही करेंगे।
यह आदेश बुधवार को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ऋतु राज ने दिया। वह दिल्ली पुलिस की उस अर्जी पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें पुलिस ने 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत शुरू की गई निवारक कार्यवाही (Preventive Proceedings) में दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत को तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी।
अपने लिखित वचनों में रांका और दास ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वे शांति भंग नहीं करेंगे। उन्होंने न्यायपालिका और उसकी संस्थाओं—जिसमें विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत भी शामिल है—के प्रति अपना विश्वास जताया।
मजिस्ट्रेट ने इन वचनों को रिकॉर्ड पर ले लिया।
पुलिस ने न्यायिक हिरासत को तीन दिन और बढ़ाने की मांग करते हुए तर्क दिया कि इन नेताओं के बयानों और उनके बाद के आचरण को देखते हुए शांति भंग होने और कानून-व्यवस्था बिगड़ने का अंदेशा बना हुआ।
पुलिस ने उनके समूह के एक अन्य सदस्य द्वारा तिहाड़ जेल ले जाते समय दिए गए एक मीडिया बयान का भी जिक्र किया। पुलिस का दावा था कि इस बयान से अदालत की गरिमा को ठेस पहुंची है। इसके जवाब में नेताओं के वकील ने बिना शर्त मौखिक माफी मांगी और भरोसा दिलाया कि ऐसा आचरण दोबारा नहीं दोहराया जाएगा।
दोनों पक्षों की दलीलों और लिखित वचनों पर विचार करने के बाद मजिस्ट्रेट ने कहा कि BNSS की धारा 135(3) के तहत जरूरी निवारक उपाय, इन नेताओं से शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरवाकर पूरे किए जा सकते हैं।
मजिस्ट्रेट ने माना कि इस स्तर पर न्यायिक हिरासत को और बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है, खासकर अदालत के सामने दिए गए उनके वचनों को देखते हुए। इसके अनुसार, दास और रंका को जांच पूरी होने तक ₹50,000-₹50,000 के व्यक्तिगत बॉन्ड और ज़मानत बॉन्ड जमा करने का निर्देश दिया गया। ज़मानतों से संतुष्ट होने के बाद, मजिस्ट्रेट ने उन्हें रिहा करने का आदेश दिया और इस पर अमल करने के लिए तिहाड़ सेंट्रल जेल के अधीक्षक को रिहाई वारंट जारी किया।
इस मामले में जांच जारी रहेगी, और नेताओं को निर्देश दिया गया कि वे सुनवाई की हर तारीख पर अदालत में पेश हों। साथ ही अपने बॉन्ड और वचनपत्रों की शर्तों के अनुसार, उन्हें शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखनी होगी।
इस मामले में आगे की कार्यवाही के लिए 23 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे की तारीख तय की गई।

