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केंद्र ने गैर-चिकित्सकीय उद्देश्यों के लिए लिक्विड ऑक्सीजन के उपयोग पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया; किसी भी उद्योग को छूट नहीं

LiveLaw News Network
25 April 2021 5:11 PM GMT
केंद्र ने गैर-चिकित्सकीय उद्देश्यों के लिए लिक्विड ऑक्सीजन के उपयोग पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया; किसी भी उद्योग को छूट नहीं
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश में चिकित्सा ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए गैर-चिकित्सकीय उद्देश्यों के लिए लिक्विड ऑक्सीजन के उपयोग पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया है। केंद्र ने यह भी अपील की है कि सभी विनिर्माण इकाइयां लिक्विड ऑक्सीजन का उत्पादन बढ़ा सकती हैं।

हालांकि इससे पहले ही केंद्र ने लिक्विड ऑक्सीजन के औद्योगिक उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन इसमें नौ श्रेणियों के उद्योगों जैसे स्टील, पेट्रोलियम आदि को छूट दी थी।

अब गृह मंत्रालय ने उस आदेश को संशोधित करते हुए कहा है कि किसी भी उद्योग को कोई छूट नहीं है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 65 के साथ धारा 10 (2) (एल) के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्रीय गृह सचिव ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी गैर-चिकित्सा उद्देश्य के लिए लिक्विड ऑक्सीजन का उपयोग करने की अनुमति नहीं है। आदेश में यह भी कहा कि सभी निर्माण इकाइयां लिक्विड ऑक्सीजन के उत्पादन को बढ़ा सकती हैं और आगे के आदेशों तक इसे केवल चिकित्सकीय उपयोग के लिए सरकार को उपलब्ध कराना होगा।

आदेश में कहा गया है कि,

"इसके अलावा लिक्विड ऑक्सीजन के सभी स्टॉक भी चिकित्सा उद्दश्यों को पूरा करने के लिए सरकार को उपलब्ध कराए जाने चाहिए। लिक्विड ऑक्सीजन के उपयोग के संबंध में किसी भी उद्योग को कोई छूट नहीं है।"

यह ध्यान देना उचित है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल ही में सुझाव दिया था कि केंद्र को लिक्विड ऑक्सीजन के औद्योगिक उपयोग पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए और उद्योगों को यह निर्देश देना चाहिए कि लिक्विड ऑक्सीजन का उपयोग चिकित्सा उद्देश्यों के लिए डायवर्ट किया जाए।

जस्टिस विपिन सांघी और रेखा पल्ली की पीठ ने 21 अप्रैल को आयोजित एक आवश्यक सुनवाई में केंद्र सरकार से कहा था कि,

"यह राष्ट्रीय आपातकाल है। आप उद्योगों को ऑक्सीजन को डायवर्ट करने के लिए निर्देशित कर सकते हैं।"

पीठ मैक्स अस्पताल समूह द्वारा दायर की गई एक तत्काल याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया था कि उनके पास स्टॉक में केवल कुछ घंटे का ऑक्सीजन बचा है। बेंच ने केंद्र से कहा था कि,

"आज हम गंभीर तनाव में हैं। ऑक्सीजन की कमी से हजारों लोगों की जान चली जाएगी। आप इससे मुंह नहीं मोड सकते और यह नहीं कह सकते हैं कि हमारो पास ऑक्सीजन नहीं है आप मर जाइए। हम जो आपको बता रहे हैं वह यह है कि आपको आगे कदम उठाना होगा। आपको उद्योगों से कैप्टिव ऑक्सीजन लेना होगा। अगर इसका मतलब है कि उन उद्योगों को आयात (ऑक्सीजन की) तक बंद करना पड़ता है, तो ऐसा ही हो। हम लोगों के जीवन को खाने का जोखिम नहीं उठा सकते। यह असुविधाजनक हो सकता है। मानव जीवन वाणिज्यिक हितों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण है।"

पीठ ने केंद्र सरकार के द्वारा नौ श्रेणियों के उद्योगों को ऑक्सीजन का उपयोग करने की अनुमति देने पर भी नाराजगी जताई। पीठ ने कहा कि मानव जीवन को बचाना अधिक महत्वपूर्ण है और अगर उद्योगों को कुछ दिनों के लिए बंद करना पड़ता तो यह कोई बड़ी बात नहीं है।

बॉम्बे हाईकोर्ट (नागपुर पीठ) ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत शक्तियों का उपयोग करके स्टील प्लांट के ऑक्सीजन का उपयोग चिकित्सकीय उद्दश्यों के लिए करने पर विचार करें।

नौ छूट प्राप्त औद्योगिक क्षेत्रों में फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोलियम रिफाइनरियां, स्टील प्लांट, इंजेक्शन की शीशियां, परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठान, ऑक्सीजन सिलेंडर निर्माता, अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र, खाद्य और जल शोधन और प्रक्रिया उद्योग शामिल थे।

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