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खरीद दस्तावेज में पति के नाम की मौजूदगी के लिए पत्नी को पूंजीगत लाभ छूट से वंचित नहीं किया जा सकता: आईटीएटी

LiveLaw News Network
6 May 2022 9:57 AM GMT
खरीद दस्तावेज में पति के नाम की मौजूदगी के लिए पत्नी को पूंजीगत लाभ छूट से वंचित नहीं किया जा सकता: आईटीएटी
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आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी) की बेंगलुरू पीठ ने एक फैसले में कहा है कि खरीद दस्तावेज में पति का नाम होने भी से पत्नी को कैपिटल गेन छूट से इनकार नहीं किया जा सकता है। पीठ में एनवी वासुदेवन (उपाध्यक्ष) और बीआर भास्करन (लेखाकार सदस्य) शामिल थे।

अपीलकर्ता/निर्धारिती (assessee) एक व्यक्ति है, और उसने विचाराधीन वर्ष के लिए अपनी आय का रिटर्न दाखिल किया था, जिसमें कुल आय 9,06,860 रुपये थे। निर्धारिती ने भूमि की बिक्री पर शुद्ध दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (long-term capital gain) अर्जित किया था और आयकर अधिनियम की धारा 54एफ के तहत उससे 1,56,33,870 रुपये की सीमा तक छूट का दावा किया था। निर्धारिती ने 51,355 रुपये शुद्ध दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ की पेशकश की।

एओ ने निर्धारिती द्वारा घोषित दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ की जांच की। यह देखा गया कि निर्धारिती ने तीन अन्य व्यक्तियों के साथ एक संपत्ति को 5.35 करोड़ रुपये के प्रतिफल में बेचा था। प्रतिफल में निर्धारिती का हिस्सा 1,60,50,000 रुपये ‌था। निर्धारिती ने दावा किया कि उसने "मैसर्स प्रेस्टीज ओजोन" नामक एक परियोजना में एक आवासीय घर 1,72,29,993 रुपये में खरीदा था। तदनुसार, उसने आयकर अधिनियम की धारा 54एफ के तहत 1,56,33,870 रुपये की सीमा तक कटौती का दावा किया।

एओ ने प्रेस्टीज ओजोन में संपत्ति की खरीद के विवरण की जांच की। एओ ने देखा कि प्रारंभिक समझौता निर्धारिती के पति वाईसी रामी रेड्डी और मेसर्स प्रेस्टीज प्रॉपर्टीज के बीच एक भवन के निर्माण के लिए था, जिसकी लागत 46,35,610 रुपये थी। इसके बाद, प्लॉट संख्या 8 की खरीद के लिए एक बिक्री विलेख पंजीकृत किया गया था, जिसका क्षेत्रफन 6,108 वर्ग फुट था। बिक्री विलेख का वाईसी रामी रेड्डी और निर्धारिती ने निष्पादन किया था।

निर्धारिती ने दावा किया कि उसने अपने पति द्वारा उसे किए गए सभी भुगतानों की प्रतिपूर्ति की थी और उसने इंटीरियर डिजाइन आदि के लिए और खर्च भी किए थे। तदनुसार, निर्धारिती ने दावा किया कि खरीद की पूरी लागत उसके द्वारा पूरी की गई थी, और उसने अपने पति से संपत्ति खरीदी थी।

एओ ने आयकर अधिनियम की धारा 54एफ के तहत कटौती के लिए निर्धारिती के दावे की जांच की। एओ ने यह विचार किया कि निर्धारिती आयकर अधिनियम की धारा 54एफ के तहत कटौती के लिए पात्र नहीं थी, इस आधार पर कि उसके पास प्रेस्टीज ओजोन बिल्डिंग में पहले से ही 50% हिस्सेदारी थी और इसलिए, उसके लिए पति को 1.72 करोड़ रुपये का पूरा भुगतान करने की जरूरत नहीं थी।

निर्धारिती ने सीआईटी (ए) के समक्ष एओ के आदेश को चुनौती दी। सीआईटी (ए) ने माना कि प्लॉट के पंजीकरण के बाद, यानी 24.02.2007 के बाद इंटीरियर, नवीनीकरण, फर्निशिंग इत्यादि पर किए गए खर्च को अधिग्रहण की लागत के हिस्से के रूप में नहीं लिया जा सकता है।

27 अक्टूबर, 2007 को निर्धारिती ने अपने पति से केवल 50% अधिकार खरीदे, और उसके पास 50% पहले से ही था। निर्धारिती के पति की ओर से दिया गया रिलीज डीड 25.1.2010 को पंजीकृत किया था, जो मूल संपत्ति की बिक्री की तारीख से 3 साल आगे था।

तदनुसार, सीआईटी (ए) ने विचार किया कि उसके पति को किए गए भुगतान की राशि के बावजूद, निर्धारिती ने 25.1.2010 को संपत्ति का केवल 50% अर्जित किया है, जो मूल संपत्ति की बिक्री के संबंध में तारीख से 3 साल के भीतर आता है। नतीजतन, उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि आयकर अधिनियम की धारा 54 एफ के तहत कटौती संपत्ति प्राप्त करने की लागत के 50% तक सीमित होनी चाहिए।

मुद्दा यह था कि क्या आयकर अधिनियम की धारा 54एफ के तहत कटौती की गणना के लिए नई गृह संपत्ति पर किए गए 81,71,910/- रुपये के खर्च को नजरअंदाज करने में सीआईटी (ए) उचित था।

आईटीएटी ने पाया कि निर्धारिती के पति के पास शुरू में अग्रिम धन था। इसके बाद, निर्धारिती ने अपने पति को पैसे की प्रतिपूर्ति की है, और अंत में, यह निर्धारिती ही थी जिसने वास्तव में संपत्ति के अधिग्रहण के लिए धन दिया था।

ट्रिब्यूनल ने कहा,

"हम देखते हैं कि सीआईटी (ए) ने यह विचार लिया है कि निर्धारिती द्वारा दिए गए धन को ध्यान में नहीं रखा जाना चाहिए और सीआईटी (ए) का उक्त दृष्टिकोण, हमारे विचार में, कानून में सही नहीं है।"

आईटीएटी ने फैसला सुनाया कि आयकर अधिनियम की धारा 54F के तहत कटौती केवल एक निर्धारिती को आवासीय घर की संपत्ति में निवेश करने के लिए प्रेरित करती है। यदि निर्धारिती ने संपत्ति के अधिग्रहण के लिए सीधे बिल्डर को या अपने पति को प्रतिपूर्ति के रूप में पैसा दिया है, तो निर्धारिती को अधिग्रहण की लागत के लिए अधिनियम की धारा 54 एफ के तहत कटौती का लाभ दिया जाना चाहिए।

केस शीर्षक: वाई मंजुला रेड्डी बनाम आईटीओ

सिटेशन: ITA No 1780/Bang/2013


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