महुआ मोइत्रा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट रद्द किया, हाईकोर्ट ने शिकायत MP/MLA कोर्ट में ट्रांसफर की
Shahadat
8 Sept 2026 10:26 AM IST

कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ शिकायत मामले में कृष्णानगर मजिस्ट्रेट द्वारा मामले का संज्ञान लेने का आदेश रद्द किया। साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस मामले की कार्यवाही को बिधाननगर, उत्तर 24-परगना में सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई के लिए तय विशेष अदालत में ट्रांसफर किया जाए।
जस्टिस देबांग्सु बसाक और जस्टिस आर्यक दत्त की डिवीजन बेंच ने 7 सितंबर को यह आदेश पारित किया। बेंच ने मोइत्रा की क्रिमिनल रिवीजन याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया, जिसमें उन्होंने नादिया के कृष्णानगर में तीसरे ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित शिकायत मामला संख्या 309/2026 में संज्ञान लेने के फैसले को चुनौती दी थी।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि ट्रांसफर की गई अदालत में इस शिकायत को 'संज्ञान-पूर्व चरण' (pre-cognizance stage) का माना जाए। नतीजतन, मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने का आदेश और उसके बाद पारित सभी आदेश रद्द कर दिए गए।
बेंच ने गौर किया कि मौजूदा सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ शिकायत कृष्णानगर के तीसरे ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित है।
हालांकि, कोर्ट ने पाया कि मजिस्ट्रेट की अदालत सांसदों और राज्य विधानसभा सदस्यों के खिलाफ अपराधों की सुनवाई के लिए तय अदालत नहीं है।
कोर्ट ने 'असीम कुमार उपाध्याय बनाम भारत संघ व अन्य' (2017 SCC OnLine SC 2195) मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उससे पहले व बाद के फैसलों का हवाला दिया।
बेंच ने देखा कि सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा जताई कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों की कार्यवाही तय अदालतों द्वारा जल्द से जल्द पूरी की जानी चाहिए।
कोर्ट ने कहा,
"हमने पाया कि 'असीम कुमार उपाध्याय बनाम भारत संघ व अन्य' (2017 SCC OnLine SC 2195) मामले और उससे जुड़े पहले व बाद के सभी फैसलों में सुप्रीम कोर्ट की इच्छा यह थी कि सांसद या राज्य विधानसभा सदस्य के खिलाफ कार्यवाही तय अदालत द्वारा जल्द से जल्द पूरी की जाए।"
कोर्ट ने दर्ज किया कि उसके समक्ष कई मुद्दे उठाए गए, जिनमें क्रिमिनल रिवीजन याचिका पर सुनवाई करने के लिए डिवीजन बेंच के अधिकार क्षेत्र का मुद्दा भी शामिल है। हालांकि, बेंच ने कहा कि वह संबंधित पक्षों द्वारा उठाई गई बहस में शामिल नहीं होना चाहती।
कोर्ट ने कहा,
"हम संबंधित पक्षों द्वारा उठाई जा रही बहस में शामिल होने के इच्छुक नहीं हैं।"
इसके बजाय, कोर्ट ने शिकायत को बिधाननगर की तय स्पेशल कोर्ट में ट्रांसफर करना सही समझा।
कोर्ट ने नादिया के डिस्ट्रिक्ट जज से कहा कि वे शिकायत केस नंबर 309/2026 के सभी रिकॉर्ड तुरंत नॉर्थ 24-परगना के डिस्ट्रिक्ट जज को भेजें।
नॉर्थ 24-परगना के डिस्ट्रिक्ट जज को निर्देश दिया गया कि वे रिकॉर्ड मिलने के तुरंत बाद उन्हें बिधाननगर की संबंधित स्पेशल कोर्ट में भेज दें।
स्पेशल कोर्ट से अनुरोध किया गया कि वह मोइत्रा और अन्य आरोपियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करे और इस मामले को 'प्री-कॉग्निज़ेंस' (संज्ञान लेने से पहले की) स्टेज पर माने।
कोर्ट ने कहा,
"हमारे इस निर्देश को देखते हुए कि ट्रांसफर लेने वाली कोर्ट शिकायत केस को 'प्री-कॉग्निज़ेंस' स्टेज पर मानेगी, ट्रांसफर करने वाले ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने और उसके बाद पारित सभी आदेशों और कार्यवाहियों को रद्द किया जाता है।"
Case Title: Mahua Moitra v. The State of West Bengal & Ors.


