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ड्रग कार्टेल का भंडाफोड़ करें और नकली मेडिकल स्टोर का पता लगाएंः पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस को निर्देश दिया

LiveLaw News Network
21 July 2021 8:00 AM GMT
ड्रग कार्टेल का भंडाफोड़ करें और नकली मेडिकल स्टोर का पता लगाएंः पंजाब एंड  हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस को निर्देश दिया
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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (पंजाब) को राज्य में नशीली दवाओं की आपूर्ति और खपत के प्रसार को रोकने के लिए व्यावहारिक कदम उठाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने डीजीपी को ऐसे व्यक्तियों को 'पकड़ने' का निर्देश दिया है जो अवैध दवा व्यापार के लिए वैध लाइसेंस के बिना नकली कंपनियां/फर्जी मेडिकल स्टोर चला रहे हैं।

न्यायमूर्ति एचएस मदान की पीठ ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत कथित अपराध करने के आरोपी तरसेम सिंह की अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए यह निर्देश दिया है। हालांकि, सिंह की याचिका को ड्रग्स की बरामदगी से जोड़ने के लिए पर्याप्त सामग्री की कमी के कारण अनुमति दे दी गई थी, परंतु कोर्ट ने ड्रग कार्टेल का भंडाफोड़ करने के लिए डीजीपी को मामले की अच्छी तरह से जांच करने के निर्देश जारी किए हैं।

अभियोजन पक्ष का कहना है कि मनप्रीत सिंह नाम के एक व्यक्ति के पास प्रतिबंधित सामग्री पाई गई, जिसके बाद उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के दौरान, मनप्रीत ने खुलासा किया कि उसने मेसर्स चन्नी मेडिकोज को टैबलेट की आपूर्ति की थी, जिसका मालिक याचिकाकर्ता-आरोपी था। इसके बाद, याचिकाकर्ता ने पहले अग्रिम जमानत के लिए विशेष अदालत का दरवाजा खटखटायाय हालांकि, उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी। इस प्रकार, तत्काल याचिका हाईकोर्ट के समक्ष दायर की गई थी।

अधिवक्ता राज कुमार गुप्ता ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता को इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया था और दावा किया कि याचिकाकर्ता औषधि नियंत्रण विभाग द्वारा वैध रूप से जारी अपेक्षित लाइसेंस के तहत एक मेडिकल स्टोर चला रहा है; वह दवाओं और औषधि को बेचने के लिए अधिकृत है। इसके अलावा, यह तर्क दिया गया था कि मनप्रीत सिंह ने याचिकाकर्ता को कोई प्रतिबंधित सामग्री की आपूर्ति नहीं की थी और न ही उससे ऐसी कोई रिकवरी की गई थी।

अधिवक्ता गुप्ता ने यह भी तर्क दिया कि राज्य द्वारा दायर लिखित जवाब में, यह तर्क दिया गया है कि बरामद टैबलेट के निर्माताओं से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ऐसी टैबलेट, अन्य सामग्री के अलावा, कई मेडिकल स्टोरों को बेची गई थी। न्यायालय के संज्ञान में यह भी लाया गया कि जांच अधिकारी सुखविंदर पाल सिंह के खिलाफ उचित प्रक्रिया के अनुसार मामले की जांच नहीं करने पर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

राज्य की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजिंदर सिंह ने स्वीकार किया कि याचिकाकर्ता का यह तथ्य सही है कि वह जांच में शामिल हुआ था और यह भी माना कि याचिकाकर्ता के परिसर की तलाशी ली गई थी, लेकिन कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई थी। उन्होंने आगे इस दलील को भी स्वीकार किया कि इस मामले में जांच अधिकारी के खिलाफ उचित जांच नहीं करने पर विभागीय कार्रवाई की जा रही है।

इस प्रकार, रिकॉर्ड पर सामग्री की कमी के कारण हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी और डीजीपी को निर्देश दिया है कि राज्य में नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खतरे को नियंत्रित किया जाए।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा एकत्रित भारत में अपराध, 2019 की नवीनतम उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में 23490 शराब और नशीली दवाओं से संबंधित घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के तहत अपराध भी शामिल हैं। इसलिए, यह ऐसे कृत्यों के लिए संज्ञेय अपराध की 78.5 प्रतिशत दर दर्ज करता है। इस समय चल रहे लोकसभा सत्र में, गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने 2017-19 के आंकड़े पेश किए, जिनमें दिखाया गया है कि नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के तहत उत्पन्न होने वाली कुल देशव्यापी घटनाओं में से 17 प्रतिशत से अधिक घटनाएं पंजाब राज्य से सामने आई हैं।

केस का शीर्षकः तरसेम सिंह बनाम पंजाब राज्य

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