मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोप तय करने को टालने की अनिल देशमुख की अर्जी पर हाईकोर्ट ने ED से जवाब मांगा

Shahadat

17 Feb 2026 9:33 AM IST

  • Anil Deshmukh

    Anil Deshmukh

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) और महाराष्ट्र सरकार को पूर्व राज्य गृह मंत्री अनिल देशमुख की अर्जी के जवाब में अपने एफिडेविट फाइल करने का निर्देश दिया। अनिल देशमुख ने अपने खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोप तय करने पर कुछ समय के लिए रोक लगाने की मांग की।

    जस्टिस अश्विन भोबे की सिंगल-जज बेंच के सामने अर्जी देने वाले देशमुख ने कोर्ट से रिक्वेस्ट की कि वह प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत एक स्पेशल कोर्ट को यह निर्देश दे कि वह पहले सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) द्वारा उनके खिलाफ करप्शन के आरोपों पर दर्ज केस पर विचार करे, जो 'प्रिडिकेट ऑफेंस' है।

    सोमवार को जब इस मामले पर सुनवाई हुई तो सीनियर एडवोकेट विक्रम चौधरी देशमुख की तरफ से वर्चुअली पेश हुए और कोर्ट को बेसिक फैक्ट्स से अवगत कराया। हालांकि, जज ने कहा कि चूंकि ED और राज्य के वकील दोनों उनके सामने पेश हुए, इसलिए नोटिस जारी करने की कोई ज़रूरत नहीं थी। इसलिए रेस्पोंडेंट अधिकारियों को 5 मार्च तक देशमुख की अर्ज़ी के जवाब में अपना हलफ़नामा दाखिल करने के लिए कहा गया।

    वकील इंदरपाल सिंह के ज़रिए अपनी अर्ज़ी में राज्य के पूर्व गृह मंत्री ने 11 नवंबर, 2025 को स्पेशल PMLA कोर्ट के पास किए गए ऑर्डर को चुनौती दी, जिसने ED द्वारा उनके ख़िलाफ़ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोप तय करने को टालने की उनकी अर्ज़ी खारिज की।

    देशमुख ने कहा कि चूंकि ED का केस CBI द्वारा दर्ज किए गए अपराध पर आधारित है, इसलिए स्पेशल कोर्ट को पहले CBI केस पर विचार करना चाहिए और फिर उनके ख़िलाफ़ ED केस को आगे बढ़ाना चाहिए।

    हालांकि, स्पेशल कोर्ट ने उनकी अर्ज़ी खारिज कर दी। इसलिए देशमुख ने हाई कोर्ट का रुख किया।

    उल्लेखनीय है कि CBI ने देशमुख पर तब केस किया, जब 5 अप्रैल, 2021 को हाईकोर्ट ने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के लिखे लेटर की 'शुरुआती जांच' का आदेश दिया। इस लेटर में NCP के सीनियर नेता पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने तब बर्खास्त किए गए पुलिसवाले सचिन वाज़े और दो दूसरे अधिकारियों को बार मालिकों से हर महीने गैर-कानूनी तरीके से 100 करोड़ रुपये इकट्ठा करने का आदेश दिया। यह आदेश कई पिटीशन पर दिया गया।

    इसके बाद CBI ने प्रिवेंशन ऑफ़ करप्शन एक्ट के तहत FIR दर्ज की। ED का केस देशमुख के खिलाफ CBI की करप्शन FIR पर आधारित था।

    ED की जांच के मुताबिक, महाराष्ट्र के होम मिनिस्टर के तौर पर देशमुख ने दिसंबर, 2020 और फरवरी, 2021 के बीच तब बर्खास्त किए गए पुलिसवाले वाज़े के ज़रिए अलग-अलग ऑर्केस्ट्रा बार मालिकों से कम से कम 4.7 करोड़ रुपये कैश में गैर-कानूनी तरीके से लिए थे।

    देशमुख को ED ने 2 नवंबर, 2021 को गिरफ्तार किया और उन पर PMLA एक्ट की धारा 3 और 4 के तहत केस दर्ज किया, जो CBI द्वारा उनके खिलाफ दर्ज किए गए करप्शन केस पर आधारित था।

    4 अक्टूबर, 2022 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने देशमुख को ED द्वारा जांचे जा रहे PMLA केस में ज़मानत दी थी। बाद में 12 दिसंबर, 2022 को उन्हें CBI द्वारा दर्ज करप्शन FIR में ज़मानत दे दी गई।

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