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बॉम्बे हाईकोर्ट ने एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट के लिए पकड़े गए फार्मेसी स्टूडेंट को रिहा किया

Shahadat
21 Jun 2022 2:25 PM GMT
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट के लिए पकड़े गए फार्मेसी स्टूडेंट को रिहा किया
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने 21 वर्षीय फार्मेसी स्टूडेंट निखिल भामरे को जमानत दे दी। निखिल भामरे को कथित तौर पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) अध्यक्ष शरद पवार की मानहानि करने वाले पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

जस्टिस नितिन जामदार और जस्टिस एनआर बोरकर की खंडपीठ ने उसे सीआरपीसी की धारा 226, 482 और धारा 407 का हवाला देते हुए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अंतरिम राहत दी गई।

पीठ ने मौखिक रूप से देखा,

"वह एक स्टूडेंट है, वह एक महीने से हिरासत में है। हम उसे जमानत देने का आदेश पारित करेंगे।"

अदालत ने यह भी आदेश दिया कि जिन मामलों में उसे गिरफ्तार नहीं किया गया है, उसके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

हाईकोर्ट ने इससे पहले अभियोजक को मामले के संबंध में गृह विभाग से निर्देश लेने के लिए कहा था। हाईकोर्ट ने कहा था कि "राज्य के लिए अच्छा होगा" यदि वह स्वेच्छा से उसकी रिहाई का विरोध नहीं करने का निर्णय लेते हैं।

भामरे को पवार के खिलाफ आलोचनात्मक ट्वीट करने के आरोप में 13 मई 2022 को नासिक से गिरफ्तार किया गया था। गौरतलब है कि पोस्ट में राजनीतिक नेता के नाम का जिक्र नहीं था। भामरे पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153 (ए) 505 (2), 506, 107 और 153 के तहत मामले में छह एफआईआर दर्ज की गई थी।

भामरे ने अपने ट्वीट में लिखा था,

"बारामती के 'गांधी' के लिए बारामती के नाथूराम गोडसे बनाने का समय आ गया है. चाचा, माफ़ी मांगो।"

पुणे में स्थित बारामती, शरद पवार का गृहनगर है।

मंगलवार को अभियोजन पक्ष ने अदालत को सूचित किया कि भामरे के खिलाफ छह एफआईआर दर्ज हैं और उनमें से तीन के संबंध में उसे गिरफ्तार किया गया है।

मुख्य लोक अभियोजक अरुणा पई ने कहा,

"पहले सीआर, डिंडोरी-नासिक सीआर में वह पहले ही जमानत पर रिहा हो चुका है। अन्य दो में उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई है और उसने सीधे अदालत का दरवाजा खटखटाया है।"

उन्होंने कहा कि भामरे ने उसे जमानत देने से इनकार करने वाले आदेशों को चुनौती नहीं दी है।

भामरे के लिए एडवोकेट हरे कृष्ण मिश्रा की सहायता से अधिवक्ता सुभाष झा ने प्रस्तुत किया कि इनमें से किसी भी मामले में भामरे को सीआरपीसी की धारा 41 ए के तहत पेश होने का नोटिस जारी नहीं किया गया था।

उन्होंने कहा,

"इस तरह के मामले में मुझे अलग-अलग अदालतों में आरोपित नहीं किया जा सकता। इतनी एफआईआर नहीं हो सकती। मुझे गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए था।"

दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि वह विस्तृत आदेश पारित करेगी या दो मामलों में उसे जमानत देकर उसे राहत देगी। उसके खिलाफ दर्ज शेष एफआईआर में सुरक्षा से वंचित कर दिया गया है। पीठ ने आदेश दिया कि खारिज करने वाली याचिका को तीन सप्ताह के बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाना चाहिए।

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