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बॉम्बे हाईकोर्ट का 'त्वचा-से-त्वचा' संपर्क मामले में निर्णय: NCPCR ने महाराष्ट्र सरकार से निर्णय के खिलाफ 'तत्काल अपील' दायर करने की मांग की

LiveLaw News Network
26 Jan 2021 3:45 AM GMT
बॉम्बे हाईकोर्ट का त्वचा-से-त्वचा संपर्क मामले में निर्णय: NCPCR ने महाराष्ट्र सरकार से निर्णय के खिलाफ तत्काल अपील दायर करने की मांग की
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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने सोमवार (25 जनवरी) को महाराष्ट्र सरकार से बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ "तत्काल अपील" दायर करने के लिए कहा, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि बच्चे की त्वचा से संपर्क किए बिना स्तनों को टटोलना यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत 'यौन हमला' नहीं माना जाएगा।

बॉम्बे हाईकोर्ट (नागपुर खंडपीठ) द्वारा निर्णय मे कहा गया था कि इस तरह के अपराध को वास्तव में भारतीय दंड संहिता [ IPC की धारा 354 ( महिला की विनम्रता को अपमानित करना)] के तहत 'छेड़छाड़' माना जाएगा।

न्यायमूर्ति पुष्पा गनेदीवाला की एकल पीठ ने पिछले सप्ताह सत्र न्यायालय के उस आदेश को संशोधित करते हुए यह अवलोकन करते हुए अपने फैसले में एक 39 वर्षीय व्यक्ति को 12 वर्षीय लड़की को छेड़छाड़ करने और उसकी सलवार उतारने के लिए यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराया गया था।

[नोट: उच्च न्यायालय ने उस व्यक्ति को IPC की धारा 343 और धारा 354 के तहत दोषी ठहराया, जबकि उसे POCSO अधिनियम की धारा 8 के तहत बरी कर दिया।]

इस पृष्ठभूमि में एनसीपीसीआर के चेयरपर्सन प्रियांक कानूनगो द्वारा पत्र लिखा गया और महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को संबोधित किया गया कि यदि अभियोजन ने POCSO अधिनियम की भावना के अनुसार प्रस्तुतियां की थीं, तो आरोपी नाबालिग के खिलाफ गंभीर अपराध करने के कारण आरोपी को बरी नहीं किया जा सकता है।

पत्र में आगे लिखा गया है कि,

"बिना पेनिट्रेशन के इरादे से 'त्वचा से त्वचा' के संपर्क के द्वारा यौन करने की भी समीक्षा करने की आवश्यकता है और राज्य को इस पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि यह माइनर विक्टिम के लिए अपमानजनक प्रतीत होता है।"

एनसीपीसीआर प्रमुख ने अपने पत्र में यह भी रेखांकित किया है कि ऐसा लगता है कि पीड़ित की पहचान का खुलासा कर दिया गया है। इसलिए आयोग का विचार है कि राज्य को इस पर ध्यान देना चाहिए और आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

राज्य सरकार से जजमेंट के खिलाफ एक तत्काल अपील दायर करने का अनुरोध करते हुए पत्र में लिखा हुआ था कि,

"आयोग POCSO अधिनियम 2012 की धारा 44 के तहत निगरानी निकाय है और आपसे मामले में आवश्यक कदम उठाने और निर्णय के खिलाफ तत्काल अपील करने का अनुरोध करता है ..."

महाराष्ट्र के मुख्य सचिव से नाबालिग का विवरण (एनसीपीसीआर) प्रदान करने (सख्त गोपनीयता बनाए रखने) का भी अनुरोध किया गया है ताकि आयोग बच्चे के सर्वोत्तम हित के लिए कानूनी सहायता आदि जैसी सहायता प्रदान कर सके।

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