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बॉलीवुड बनाम 'रिपब्लिक टीवी' और 'टाइम्स नाउ' : अपमानजनक रिपोर्टिंग पर रोक लगाने की मांग करते हुए बिग स्टूडियो पहुंचे दिल्ली हाईकोर्ट

LiveLaw News Network
12 Oct 2020 4:01 PM GMT
बॉलीवुड बनाम रिपब्लिक टीवी और टाइम्स नाउ : अपमानजनक रिपोर्टिंग पर रोक लगाने की मांग करते हुए बिग स्टूडियो पहुंचे  दिल्ली हाईकोर्ट
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एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हिंदी फिल्म उद्योग के प्रमुख प्रोडक्शन हाउस ने एक साथ आते हुए ''रिपब्लिक टीवी'' और ''टाइम्स नाउ'' जैसे समाचार चैनलों के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में दीवानी मुकदमा दायर किया है।

हिंदी फिल्म उद्योग के 38 बड़े प्रोडक्शन हाउस ने संयुक्त रूप से रिपब्लिक टीवी के अर्णब गोस्वामी और प्रदीप भंडारी, टाइम्स नाउ के नविका कुमार और राहुल शिवशंकर और कई अज्ञात प्रतिवादियों और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के खिलाफ मुकदमा दायर कर ,इन सभी को बॉलीवुड के सदस्यों के खिलाफ ''गैर-जिम्मेदार,अपमानजनक और मानहानि करने वाली'' टिप्पणी करने से रोकने की मांग की है।

डीएसके लीगल एंड एसोसिएट्स द्वारा दायर सिविल सूट में इन सभी को बॉलीवुड हस्तियों का मीडिया ट्रायल न करने और बॉलीवुड से जुड़े व्यक्तियों की निजता के अधिकार में हस्तक्षेप करने से रोकने की भी मांग की गई है। इस सूट में कहा गया है कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि चैनल केबल टीवी (रेगुलेशन)एक्ट 1994 के तहत निर्धारित प्रोग्राम कोड का पालन करें।

वादियों ने यह भी मांग की है कि यह सभी बॉलीवुड के खिलाफ प्रकाशित सभी अपमानजनक सामग्री को वापस लें या उसे हटाया जाए।

वादियों में बॉलीवुड के बड़े-बड़े प्रोडेक्शन हाउस शामिल हैं, जिनमें आमिर खान, शाहरुख खान (रेड चिलीज़) सलमान खान, अजय देवगन, अनिल कपूर और यशराज फिल्म्स, धर्मा प्रोडक्शन (करण जौहर), नाडियाडवाला,एक्सेल, विधु विनोद चोपड़ा फिल्म्स, विशाल भारद्वाज, रिलायंस बिग आदि शामिल हैं।

वादियों के अनुसार, चैनल बॉलीवुड के लिए बहुत ही अपमानजनक शब्द और अभिव्यक्तियों का उपयोग कर रहे हैं,जैसे ''गंदगी'', ''कचरा'', ''मैल'', ''ड्रगिज़'' और अभिव्यक्ति जैसे '' यह बॉलीवुड है जहां गंदगी को साफ करने की आवश्यकता है'', ''अरब के सभी इत्र बॉलीवुड की अंडरबेली की बदबू दूर नहीं कर सकते हैं'', ''यह देश का सबसे गंदा उद्योग है'' और ''कोकीन और एलएसडी ने बॉलीवुड को पूरी तरह जकड़ लिया है।''

यह दलील दी गई है कि बॉलीवुड एक विशिष्ट और अच्छी तरह से मान्यता प्राप्त वर्ग है, जिसमें मुंबई में स्थित हिंदी फिल्म उद्योग भी शामिल है। चूंकि कई वर्षों से बॉलीवुड सरकारी खजाने के लिए राजस्व का एक बड़ा स्रोत रहा है। वहीं विदेशों में रिलीज होने वाली फिल्मों, पर्यटन आदि के माध्यम भारत के लिए महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा अर्जित करता है। वहीं यह रोजगार का एक बड़ा स्रोत है। इतना ही नहीं कई अन्य उद्योग भी काफी हद तक इस पर निर्भर हैं। बॉलीवुड अद्वितीय है और अन्य उद्योगों से एक अलग मुकाम पर खड़ा है क्योंकि यह एक ऐसा उद्योग है जो लगभग पूरी तरह से सद्भावना, प्रशंसा और अपने दर्शकों की स्वीकृति पर निर्भर है।

इसलिए प्रतिवादियों द्वारा चलाए जा रहे स्मियर कैंपेन से बॉलीवुड से जुड़े लोगों की आजीविका बुरी तरह प्रभावित हो रही है। यह वर्तमान में चल रही महामारी के अतिरिक्त है। जबकि महामारी के परिणामस्वरूप पहले ही अत्यधिक राजस्व हानि और काम के अवसर कम हो चुके हैं। बॉलीवुड के सदस्यों की गोपनीयता पर हमला किया जा रहा है, और उनकी प्रतिष्ठा को खराब करते हुए पूरे बॉलीवुड को अपराधियों के रूप में चित्रित करते हुए ड्रग में डूबा हुआ बताया जा रहा है।

वादियों के अनुसार, समाचार चैनलों ने गैरजिम्मेदाराना रिपोर्टिंग के लिए पहले भी दंड का सामना किया है और अदालतों और अधिकारियों से फटकार खाई है।

यह भी बताया गया है कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद, चैनलों ने हिंदी फिल्म उद्योग के खिलाफ उन्मुक्त रिपोर्टिंग का सहारा लिया है और कहा गया है कि सीबीआई प्रमुख अभिनेताओं को गिरफ्तार करना शुरू करेगी।

सूट में कहा गया है कि कुछ प्रतिवादी केबल टेलीविजन नेटवर्क (रेगुलेशन) एक्ट 1995 की धारा 5 के तहत बनाए गए उन प्रोग्राम कोड का खुलेआम उल्लंघन रहे हैं, जो केबल टेलीविजन नेटवर्क रूल्स, 1994 के नियम 6 में निहित है और प्रतिवादियों द्वारा संचालित और इनके स्वामित्व वाले टेलीविजन चैनल को नियंत्रित करते हैं।

प्रतिवादी समानांतर निजी 'जांच' का संचालन और प्रकाशन कर रहे हैं और प्रभावी ढंग से ''अदालत'' के रूप में अभिनय कर रहे हैं जो बॉलीवुड से जुड़े लोगों को उनके द्वारा एकत्रित किए गए ''सबूतों'' के आधार पर दोषी मान रहे हैं। इसतरह से आपराधिक न्याय प्रणाली का मजाक बनाने की कोशिश की जा रही है।

वादियों ने स्पष्ट किया है कि वे श्री सुशांत सिंह राजपूत की मौत या एनसीबी द्वारा दर्ज संबंधित मामलों की जांच के संबंध में मीडिया रिपोर्ट पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग नहीं रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे केवल प्रतिवादियों को देश में लागू कानूनों का उल्लंघन करने वाली सामग्री को रिपोर्ट व प्रकाशित करने से रोकने के लए अनिवार्य निषेधाज्ञा जारी करने की मांग कर रहे हैं।

वादियों की पूरी सूची इस प्रकार हैं-

द फिल्म एंड टेलीविजन प्रोड्यूसर गिल्ड ऑफ इंडिया (पीजीआई)

द सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सीआईएनटीएए)

भारतीय फिल्म और टीवी निर्माता परिषद (आईएफटीपीसी)

स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन (एसडब्ल्यूए)

आमिर खान प्रोडक्शंस

एड-लैब्स फिल्म्स

अजय देवगन फिल्म्स

आंदोलन फिल्म्स

अनिल कपूर फिल्म और कम्यूनिकेश नेटवर्क

अरबाज खान प्रोडक्शंस

आशुतोष गोवारिकर प्रोडक्शंस

बीएसके नेटवर्क और एंटरटेनमेंट

केप ऑफ गुड फिल्म्स

क्लीन स्लेट फिल्मज

धर्मा प्रोडक्शंस

एम्मे एंटरटेनमेंट एंड मोशन पिक्चर्स

एक्सेल एंटरटेनमेंट

फिल्मक्राफ्ट प्रोडक्शंस

होप प्रोडक्शन

कबीर खान फिल्म्स

लव फिल्म्स

मैकगफिन पिक्चर्स

नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट

वन इंडिया स्टोरीज

आर एस एंटरटेनमेंट (रमेश सिप्पी एंटरटेनमेंट)

राकेश ओमप्रकाश मेहरा पिक्चर्स

रेड चिलीज एंटरटेनमेंट

रील लाइफ प्रोडक्शंस

रिलायंस बिग एंटरटेनमेंट

रोहित शेट्टी पिक्चरज

रॉय कपूर फिल्म्स

सलमान खान फिल्म्स

सिखया एंटरटेनमेंट

सोहेल खान प्रोडक्शंस

टाइगर बेबी डिजिटल

विनोद चोपड़ा फिल्म्स

विशाल भारद्वाज पिक्चर्स

यशराज फिल्म्स

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