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'वकीलों पर प्रोफेशनल टैक्स लगाने व 'व्यावसायिक भवनों' के रूप में कार्यालयों पर ज्यादा संपत्ति कर वसूलने का मामला'-बीसीडी ने एलजी को पत्र लिखकर विरोध जताया

LiveLaw News Network
5 Aug 2020 4:30 AM GMT
वकीलों पर प्रोफेशनल टैक्स लगाने व व्यावसायिक भवनों के रूप में कार्यालयों पर ज्यादा संपत्ति कर वसूलने का मामला-बीसीडी ने एलजी को पत्र लिखकर विरोध जताया
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बार काउंसिल ऑफ दिल्ली ने मंगलवार को एनसीटी के उपराज्यपाल से संपर्क किया और दक्षिण दिल्ली नगर निगम द्वारा वकीलों पर भी अन्य स्व-नियोजित प्रोफेशनल जैसे डॉक्टर, आर्किटेक्ट, चार्टर्ड एकाउंटेंट की तरह प्रोफेशनल टैक्स लगाने का प्रस्ताव पेश करने के मामले पर अपनी चिंता व्यक्त की।

इस प्रस्ताव को एलजी के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है। 'दिल्ली में कानूनी समुदाय' ने इस कदम पर अपनी 'कड़ी आपत्ति' जताई है। उन्होंने वकीलों पर पेशेवर कर या प्रोफेशनल टैक्स लगाने के खिलाफ 'अपना विरोध दर्ज कराने' की मांग की है।

पत्र में कहा गया है कि,''वकीलों के खिलाफ कुछ पक्षपात और दुर्भावना दिखाई दे रही है। पहले भी दिल्ली में नगर निगम वकीलों और अन्य प्रोफेशनल पर पेशेवर कर लगाने के लिए बेकार का प्रयास कर चुकी है।''

बीसीडी ने इस प्रस्ताव की ''अत्यधिक निंदा की'' है। बीसीडी ने कहा है कि पूर्व में इस तरह का प्रस्ताव दिया गया था और फिर उसे वापिस ले लिया था। उसके बावजूद भी बार-बार इस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं।

पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि,''हम इस तरह के प्रस्ताव के पीछे की बुरी भावना के बारे में नहीं जानते हैं क्योंकि अतीत में इस तरह के प्रस्ताव को वापिस लेने का निर्णय लिया जा चुका है।''

यह भी कहा गया कि कानूनी पेशा ''एक महान पेशा'' है और अदालत के अधिकारियों के रूप में, वकील कोई भी व्यावसायिक गतिविधि नहीं करते हैं। इसलिए यह आग्रह किया जा रहा है कि एसडीएमसी किसी भी कारण से पेशेवर कर लगाने की उम्मीद नहीं कर सकती है।

पत्र में कहा गया है कि ''इस कदम ने कानूनी बिरादरी के बीच काफी गुस्सा और पीड़ा पैदा की है, जो पहले से ही चल रहे कोविद संकट और वाणिज्यिक आधार पर वसूले जा रहे विभिन्न शुल्कों के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हैं।''

बीसीडी ने एसडीएमसी के उस कदम का भी विरोध जताया है,जिसके तहत कार्यालय के तौर पर इस्तेमाल की जा रही किराए की संपत्तियों पर दोगुना संपत्ति कर वसूलने की बात कही गई है।

कहा गया कि ''दिल्ली में बहुत बड़ी संख्या में वकील किराए की संपत्तियों से काम कर रहे हैं क्योंकि विभिन्न अदालतों में चेंबरों की भारी कमी है।''

यह भी प्रस्तुत किया गया कि अगर एसडीएमसी को ऐसे संस्थानों पर मौजूदा संपत्ति कर को दोगुना करने की अनुमति दी जाती है, तो स्वाभाविक रूप से उक्त परिसर का किराया कानूनी पेशे के लिए अत्यधिक नुकसानदेह साबित होगा।

अंत में, यह इंगित किया गया है कि संपत्ति कर के लिए उपयोग कारक के तहत, पेशेवरों को उपयोग कारक या यूज फैक्टर -1 (आवासीय और सार्वजनिक उपयोग के लिए) में शामिल किया जाना चाहिए था, लेकिन कोई विशिष्ट श्रेणी प्रदान नहीं की गई है। इसके फलस्वरूप जो संपत्ति कर उपयोग कारक-1 के अनुसार दिया जाना चाहिए,उसके लिए प्रशासनिक शिथिलता के कारण वकीलों का अनावश्यक उत्पीड़न किया जा रहा है। अधिवक्ता वर्तमान में 'यूज फैक्टर 4' के तहत 'व्यवसाय' की श्रेणी में टैक्स देने के लिए उत्तरदायी हैं, जिसमें टैक्स स्लैब बहुत अधिक हैं।

यह भी बताया गया कि जहां तक​डॉक्टरों के क्लीनिकों का संबंध है। उनके लिए यूज फैक्टर - 2 ('यूटिलिटीज' के तौर पर) में एक अलग श्रेणी प्रदान की गई है। परंतु वकीलों के लिए, जिन्हें यूज फैक्टर - 1 में वर्गीकृत किया जाना चाहिए, ऐसा कोई प्रावधान नहीं बनाया गया है। जिस कारण उनका अनुचित उत्पीड़न हो रहा है।

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