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क्या दो ट्वीट के मामले में प्रशांत भूषण के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है? बीसीडी ने जांच करने के लिए भूषण को नोटिस जारी किया

LiveLaw News Network
23 Sep 2020 10:24 AM GMT
क्या दो  ट्वीट के मामले में  प्रशांत भूषण के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है? बीसीडी ने जांच करने के लिए भूषण को नोटिस जारी किया
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अधिवक्ता प्रशांत भूषण द्वारा किए गए दो विवादास्पद ट्वीट और उनके संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले (जिसमें उन्हें आपराधिक अवमानना का दोषी माना गया है) को संज्ञान में लेते हुए, बार काउंसिल ऑफ दिल्ली ( बीसीडी) ने भूषण को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए काउंसिल के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा है।

भूषण से पूछा गया है कि एडवोकेट्स एक्ट की धारा 24ए व 35 के तहत क्यों न उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए?

बीसीडी के पत्र के अनुसार-

''18 सितम्बर 2020 के अपने प्रस्ताव में, बार काउंसिल ऑफ दिल्ली ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा लिखे गए 06 सितम्बर 2020 के पत्र,भूषण के दो ट्वीट और सुप्रीम कोर्ट के दिनांक 14 अगस्त 2020 और 31 अगस्त 2020 को दिए गए फैसलों पर संज्ञान लिया है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें आपराधिक अवमानना के लिए दोषी ठहराया था।

बीसीआई के उक्त पत्र में बीसीडी को मामले की जांच करने के लिए निर्देशित किया गया है, और इस संबंध में निर्णय लेने के लिए कानून व नियमों के अनुसार कार्यवाही करने की बात कही थी।''

श्री भूषण को निर्देश दिया गया है कि वह व्यक्तिगत सुनवाई के लिए 23 अक्टूबर 2020 को शाम 4 बजे बीसीडी के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से या किसी अधिकृत अधिवक्ता के जरिए उपस्थित हो। अगर वह व्यक्तिगत सुनवाई के लिए पेश नहीं होना चाहते है तो उनको वर्चुअल हियरिंग का विकल्प भी दिया गया है।

उन्हें 15 दिनों के भीतर काउंसिल में इस बात का भी जवाब भेजना होगा कि क्यों न उनके व सजा के मद्देनजर उनके खिलाफ अधिवक्ता अधिनियम की धारा 24 ए और 35 के तहत कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए? क्योंकि धारा 24ए एक व्यक्ति को नैतिक अपराध से जुड़े अपराध के मामले में दोषी पाए जाने की स्थिति में अधिवक्ता के रूप में नामांकित होने से अयोग्य घोषित करती है, वहीं धारा 35 पेशेवर या अन्य कदाचार के लिए एक वकील के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही का प्रावधान करती है। जिसके परिणामस्वरूप वकील को फटकार लगाई जा सकती है, प्रैक्टिस से निलंबित किया जा सकता है या यहां तक संबंधित बार काउंसिल के रोल से उसका नाम भी हटाया जा सकता है।

बीसीडी ने श्री भूषण को आगाह किया है कि यदि उनकी प्रतिक्रिया या जवाब निर्धारित समय के भीतर नहीं मिलता है, तो यह माना जाएगा कि वह जवाब देने की इच्छा नहीं रखते हैं, और अगर वह काउंसिल के समक्ष पेश नहीं होते हैं तो इस स्थिति में कार्यवाही को एक्स-पार्टी पूरा किया जाएगा।

14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की पीठ ने भूषण को सुप्रीम कोर्ट और भारत के मुख्य न्यायाधीशों के खिलाफ किए गए उनके ट्वीट के मामले में अदालत की अवमानना ​​का दोषी ठहराया था। 20 अगस्त को उनकी सजा पर सुनाई की गई थी, जिसके तहत उन्हें अपने बयानों को विचार करने और बिना शर्त माफी मांगने का समय दिया गया था। हालाँकि, श्री भूषण अपने बयानों पर अड़े रहे,जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने 31 अगस्त को दिए गए अपने आदेश के तहत उन्हें एक रुपए का जुर्माना देने की सजा सुनाई थी।

यह भी स्पष्ट किया गया था कि उक्त राशि का भुगतान करने में विफल होने पर, उन्हें तीन महीने के कारावास की सजा काटनी होगी और उन्हें तीन साल के लिए सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने से रोक दिया जाएगा।

इसके बाद, बीसीआई ने प्रस्ताव पास किया कि एडवोकेट श्री प्रशांत भूषण द्वारा किए गए उन ट्वीट्स और बयानों की जांच करना आवश्यक है, जिसके कारण सुप्रीम कोर्ट ने स्वत संज्ञान लेते हुए उन्हें आपराधिक अवमानना के मामले में दोषी ठहराया है।

3 सितंबर को बीसीआई की जनरल काउंसिल की एक बैठक में, यह निर्णय लिया गया था कि श्री भूषण के बयानों को एडवोकेट् एक्ट 1961 की धारा 24 ए (नामांकन के लिए अयोग्यता) और धारा 35 (कदाचार के लिए अधिवक्ताओं को सजा देने) व बार काउंसिल आॅफ इंडिया रूल्स के चैप्टर-II,पार्ट-VI(व्यावसायिक आचरण और शिष्टाचार के मानक) के तहत जांच करनी आवश्यक है।

इस संबंध में जारी एक प्रेस नोट में कहा गया है कि-

''काउंसिल का विचार है कि अधिवक्ता श्री प्रशांत भूषण के ट्वीट्स और उनके बयानों और उच्चतम न्यायालय के निर्णय पर बार काउंसिल आॅफ द्वारा गहराई से विचार किया जाना चाहिए। एडवोकेट्स एक्ट 1961 के तहत काउंसिल के लिए तय किए गए वैधानिक कर्तव्यों, शक्तियों व कार्यों के आलोक में और इस एक्ट के तहत बनाए गए नियमों,विशेष रूप से एडवोकेट्स एक्ट 1961 की धारा 24ए व धारा 35 और बार काउंसिल आॅफ इंडिया रूल्स के चैप्टर-II,पार्ट-VI के तहत इस तरह की जांच आवश्यक है।''

इसलिए काउंसिल ने बीसीडी को निर्देश दिया है (जहां श्री भूषण एक वकील के रूप में नामांकित है) कि वह इस मामले की जांच करें और कानून और नियमों के अनुसार आगे की कार्यवाही करें। यह भी निर्देशित किया गया है कि इस संबंध में जल्द से जल्द एक निर्णय लिया जाए।

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