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खाता धारक का दोष साबित न होने पर,धोखाधड़ी से हुए ऑनलाइन लेन-देन के लिए बैंक उत्तरदायीः एनसीडीआरसी

LiveLaw News Network
9 Jan 2021 11:30 AM GMT
खाता धारक का दोष साबित न होने पर,धोखाधड़ी से हुए ऑनलाइन लेन-देन के लिए बैंक उत्तरदायीः एनसीडीआरसी
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राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने हाल ही में माना है कि किसी व्यक्ति के बैंक खाते से पैसे निकालने के लिए धोखाधड़ी से किए गए लेनदेन के मामले में, संबंधित बैंक नुकसान के लिए जिम्मेदार होगा ग्राहक नहीं, अगर यह साबित नहीं होता है कि धोखाधड़ी का लेन-देन खाताधारक की गलती के कारण हुआ था।

प्रसीडेंट मेंबर सी विश्वनाथ द्वारा यह फैसला दिया गया है, जिन्होंने कहा है कि आज के डिजिटल युग में क्रेडिट कार्ड को हैक करने या उसके जाली होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

एनसीडीआरसी ने कहा कि ऐसे मामले में जहां बैंक यह साबित करने में असमर्थ रहा है कि खाता धारक की गलती के कारण फर्जी लेन-देन हुए हैं, उदाहरण के लिए क्रेडिट कार्ड का खो जाना आदि तो बैंक को अनधिकृत लेनदेन के लिए उत्तरदायी बनाया जाएगा क्योंकि इस तरह के मामलों में यह माना जाता है कि इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग प्रणाली में एक सुरक्षा चूक थी, जिसके कारण यह लेनदेन हुआ था।

आयोग ने कहा कि,''बैंक ग्राहकों के प्रति अपनी देनदारी से बाहर निकलने के लिए मनमाने नियम और शर्तों पर भरोसा नहीं कर सकता है और इस तरह के नियम और शर्तें भी आरबीआई द्वारा जारी किए गए निर्देशों के अनुरूप होनी चाहिए जो बैंकिंग सिस्टम को सुरक्षित रखने और चेक और बैलेंस बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है।''

पृष्ठभूमि

वर्तमान मामले में, आयोग एचडीएफसी बैंक द्वारा राज्य आयोग के फैसले के खिलाफ दायर रिवीजन पैटिशन पर सुनवाई कर रहा था,राज्य आयोग ने बैंक की अपील को खारिज कर दिया था और उस आदेश को सही ठहराया था,जिसमें बैंक को निर्देश दिया गया था कि वह ग्राहक के खाते से धोखाधड़ी से हुए लेनदेन की भरपाई करें।

शिकायतकर्ता-ग्राहक ने कहा था कि विवादित लेन-देन होने के समय क्रेडिट कार्ड उसके पास ही था। उसने आगे यह भी बताया कि लेनदेन उसके वास्तविक स्थान से कई मील दूर हुआ था और इसलिए, धोखाधड़ी के लेन-देन का कारण कार्ड की जालसाजी या हैकिंग या इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग प्रणाली में कुछ अन्य तकनीकी और /या सुरक्षा चूक होना चाहिए,जिसके कारण लेन-देन हुआ था।

दूसरी तरफ बैंक ने कहा था कि क्रेडिट कार्ड चोरी हुआ होगा और यह कार्ड धारक की लापरवाही का नतीजा है कि उसने अपना कार्ड सुरक्षित नहीं रखा होगा।

निष्कर्ष

न्यायालय ने नोट किया कि बैंक अपनी इन दलीलों की पुष्टि करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं कर पाया कि क्रेडिट कार्ड चोरी हो गया था या शिकायतकर्ता ने किसी भी धोखाधड़ी/जालसाजी का सहारा लिया था।

पीठासीन सदस्य सी विश्वनाथ ने कहा कि,''किसी भी सबूत के अभाव में कि क्रेडिट कार्ड चोरी हो गया था, मैं बैंक को अनधिकृत लेनदेन के लिए जिम्मेदार मानता हूं।''

आयोग ने आरबीआई के सर्कुलर पर विश्वास किया, जिसके अनुसार अगर कमी बैंकिंग प्रणाली में निहित है तो ग्राहक की देयता शून्य होगी।

दिनांक 6 जुलाई 2017 के सर्कुलर के अनुसारः

शून्य देयता के लिए एक ग्राहक का हक बनेगा, जहाँ निम्नलिखित घटनाओं में अनधिकृत लेनदेन हुआ होः

-बैंक की ओर से सहायक धोखाधड़ी/ लापरवाही/कमी (चाहे ग्राहक द्वारा लेन-देन की सूचना दी गई हो या नहीं) हुई हो।

-थर्ड पार्टी ब्रीच, जहां न तो बैंक की लापरवाही हो और न ही ग्राहक की,परंतु कमी कहीं सिस्टम में हो और ग्राहक अनधिकृत लेन-देन के बारे में बैंक से संचार प्राप्त होने के तीन कार्य दिवसों के भीतर बैंक को सूचित कर देता है।

मामले के तथ्यों को देखने के बाद आयोग ने उल्लेख किया कि,

(ए) पहला अनधिकृत लेन-देन 15.12.2008 को हुआ।

(बी) बैंक ने 15.12.2008 को ही उक्त लेनदेन देख लिया गया था।

(सी) शिकायतकर्ता के पिता से संपर्क 18.12.2008 को किया गया था।

(डी) 20.12.2008 को, बैंक से सूचना प्राप्त होने के तीन दिनों के भीतर, शिकायतकर्ता के पिता ने बैंक को सूचित किया कि लेनदेन अनधिकृत थे।

आयोग ने कहा कि,''ऐसी परिस्थितियों में, भले ही लापरवाही बैंक की न हो लेकिन सिस्टम में कहीं और थी, बैंक को उन सभी 29 अनधिकृत लेनदेन के लिए उत्तरदायी ठहराया जाएगा, जो 15.12.2008 से तब तक किए गए थे जब तक कि कार्ड को हॉट लिस्टेड नहीं किया गया था, अर्थात 20.12.2008 तक।''

पंजाब नेशनल बैंक व अन्य बनाम लीडर वाल्व्स II, (2020) सीपेजे 92 (एनसी) मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया गया, जहां आयोग ने अनधिकृत और धोखाधड़ी इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन के मामले में एक बैंक के दायित्व के प्रश्न को संबोधित करते हुए कहा था किः

''पहला मूल प्रश्न यह उठता है कि क्या बैंक उसके पदाधिकारियों के किसी दुर्भावनापूर्ण कार्य के कारण हुए अनधिकृत लेन-देन के लिए जिम्मेदार है या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किए गए दुर्भावनापूर्ण कार्य के लिए (शिकायतकर्ता/ खाताधारक को छोड़कर)। इसका सीधा जवाब, सकारात्मक है। यदि कोई खाता बैंक द्वारा बनाए रखा जाता है, तो बैंक स्वयं उसकी रक्षा और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होता है। किसी भी प्रणालीगत विफलता, चाहे वह उसके पदाधिकारियों की ओर से किए गए दुर्भावनापूर्ण कार्य के कारण हो या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा (उपभोक्ता/ खाता-धारक को छोड़कर),बैंक की जिम्मेदारी बनती है, न कि उपभोक्ता की।''

केस का शीर्षकः एचडीएफसी बैंक व अन्य बनाम जेसना जोस

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