'जिन्होंने मेरी बात को तोड़-मरोड़कर पेश किया, गलती उनकी, मेरी नहीं': जस्टिस शेखर यादव महाभियोग प्रस्ताव लंबित होने के बीच हुए रिटायर
Shahadat
15 April 2026 5:33 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट जज जस्टिस शेखर कुमार यादव आज (बुधवार) रिटायर हो गए। बता दें, जस्टिस शेखर कुमार यादव की दिसंबर 2024 में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में की गई विवादित टिप्पणियों के कारण उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था।
उनके सम्मान में आयोजित 'फुल कोर्ट रेफरेंस' को संबोधित करते हुए जस्टिस यादव ने स्पष्ट किया कि प्रयागराज में विश्व हिंदू परिषद (VHP) की लीगल सेल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में दिए गए उनके भाषण के शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया, और गलती उन लोगों की थी जिन्होंने उन्हें विकृत किया।
जस्टिस यादव ने अपने रिटायरमेंट भाषण में कहा,
मेरी कोई गलती नहीं थी। गलती उन लोगों की थी, जिन्होंने इसे तोड़-मरोड़कर पेश किया।
उन्होंने उस दौरान उनका साथ देने के लिए बार (वकीलों के समूह) के सदस्यों का भी धन्यवाद देते हुए कहा:
"एक और दौर आया, जिसमें मेरी कोई गलती नहीं थी, और उस दौरान मुझे आपका साथ मिला। अगर मुझे यह साथ न मिला होता तो मैं टूट गया होता।"
उल्लेखनीय है कि दिसंबर, 2024 में दिए गए अपने भाषण में जस्टिस यादव ने कुछ विवादित बयान दिए। इनमें यह बात भी शामिल थी कि देश भारत के बहुसंख्यक (Majority) लोगों की इच्छा के अनुसार चलेगा। यह कि किसी विशेष धर्म के बच्चों से सहिष्णु होने की उम्मीद नहीं की जा सकती, क्योंकि उनके सामने ही जानवरों की बलि दी जाती है। जैसे ही यह भाषण विवादों में आया, तत्कालीन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) संजीव खन्ना ने जस्टिस यादव को तलब किया और उनसे स्पष्टीकरण मांगा।
अपने विदाई भाषण में जस्टिस यादव ने बेंच पर अपनी निष्पक्षता का पुरजोर बचाव किया।
कार्यक्रम में जमा हुए वकीलों की ओर देखते हुए उन्होंने कहा,
"यहां हर जाति के वकील मौजूद हैं; कोई भी व्यक्ति यह नहीं कह सकता कि न्याय देते समय मैंने किसी के साथ भेदभाव किया। मैंने कभी भी छोटे या बड़े वकीलों के बीच, या किसी भी जाति के वकीलों के बीच कोई फर्क नहीं किया।"
जस्टिस यादव के विदाई भाषण का एक बड़ा हिस्सा बार के सदस्यों—विशेष रूप से जूनियर वकीलों—को कोर्टरूम के तौर-तरीकों, ड्राफ्टिंग (दस्तावेज तैयार करने) और पेशेवर आचरण के बारे में सलाह देने के लिए समर्पित था।
इस बात पर ज़ोर देते हुए कि आपसी सम्मान ही कानूनी पेशे की नींव है, उन्होंने कहा,
"एक जज पुलिस इंस्पेक्टर (दरोगा) नहीं होता... हर किसी को विनम्र होना सीखना चाहिए, चाहे वह सीनियर हो, जज हो या जूनियर।"
उन्होंने आगे इस बात पर ज़ोर दिया कि किसी केस की बहस करते समय वकील के व्यवहार की बहुत अहम भूमिका होती है।
उन्होंने सलाह दी,
"जज के पास आपकी ज़मानत मंज़ूर करने या खारिज करने की शक्ति होती है। आप जिस तरह से पेश आते हैं, उसमें विनम्रता और सम्मान झलकना चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा,
"इसलिए भले ही केस कमज़ोर हो, जज उसे ऊपर उठा देते हैं। अगर सब कुछ अच्छा हो, लेकिन बहस अच्छी न हो, पेश होने का तरीका अच्छा न हो, तो केस नीचे गिर जाता है।"
उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि जब सीनियर वकील कोर्टरूम में आते हैं तो जूनियर वकील खड़े नहीं होते। उन्होंने यह भी कहा कि जहां लोग स्वाभाविक रूप से वकीलों का सम्मान करते हैं, वहीं "कुछ लोग इस पेशे को बदनाम कर रहे हैं।"
जस्टिस यादव ने महिला वकीलों की बढ़ती संख्या का स्वागत किया। हालाँकि, उन्होंने जूनियर महिला वकीलों से आग्रह किया कि वे सीनियर वकीलों के प्रॉक्सी (प्रतिनिधि) के तौर पर काम करने के बजाय मुकदमों में ज़्यादा सक्रिय भूमिका निभाएं।
उन्होंने कहा,
"महिला वकीलों की संख्या बढ़ रही है, और यह और बढ़नी चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा,
"कभी-कभी वे सिर्फ़ केस आगे बढ़वाने (Passover) के लिए आती हैं, इसलिए मैं उनसे बहस करने को कहता हूं; जब तक सीनियर वकील नहीं आ जाते, मैं [केस] खारिज नहीं करूंगा।"
अपने भाषण में जस्टिस यादव ने अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि वे गर्व से अपनी साइकिल चलाकर अपने ननिहाल जाते थे, यह सोचते हुए कि अब वे हाईकोर्ट में वकील बन गए, और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वे जज बनेंगे।
उन्होंने कहा कि सफलता के लिए दृढ़ संकल्प और बड़ों का सम्मान ही एकमात्र सच्ची शर्तें हैं। अगर किसी वकील में ईमानदारी और सम्मान की भावना है तो "कोई भी आपको ऊंचाइयों तक पहुंचने से नहीं रोक सकता।"
अपने संबोधन के अंत में जस्टिस यादव ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकीलों और जजों के प्रति अपना आजीवन आभार व्यक्त किया।
"मुझे कहीं और वैसा प्यार नहीं मिला, जैसा आप सभी से मिला... मैंने सिर्फ़ प्यार दिया और प्यार पाया... आपको वही मिलता है जो आप देते हैं," उन्होंने हाईकोर्ट के जजों, बार के सदस्यों और अपने स्टाफ़ के सदस्यों को धन्यवाद देते हुए अपने भाषण का समापन किया।

