वकीलों की हड़ताल को रोकने के लिए प्रस्तावित कदमों को स्पष्ट करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी बार काउंसिल के चेयरमैन की व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश दिया
Avanish Pathak
29 Nov 2022 4:59 PM IST

वकीलों की बार-बार होने वाली हड़ताल को रोकने के लिए बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश की ओर से उठाए जाने वाले कदमों और ऐसे मामलों में की जाने वाली कार्रवाई को स्पष्ट करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष की व्यक्तिगत उपस्थिति की मांग की है।
जस्टिस अजय भनोट की पीठ ने सूरज पासी नाम आरोपी द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए और यह देखते हुए कि वकीलों के हड़ताल पर होने के कारण मामले की सुनवाई कई मौकों पर आगे नहीं बढ़ सकी, उक्त आदेश दिया।
वकीलों द्वारा बार-बार हड़ताल करने पर अपनी नाराजगी दर्ज करते हुए अदालत ने आदेश में सख्ती से कहा कि वकील गैर-जिम्मेदाराना तरीके से हड़ताल पर जाकर और अदालत में काम को ठप करके न्यायिक प्रक्रिया को रोक नहीं सकते हैं।
"भारत में अदालतों ने वकीलों की हड़ताल पर लगातार नाराज़गी जाहिर की है। अक्सर आरोपी व्यक्ति जेल में होते हैं, और वकीलों की हड़ताल की कार्रवाई के कारण मुकदमे में बाधा आती है। वकीलों की हड़ताली कार्रवाई न केवल न्याय के प्रशासन में हस्तक्षेप करती है, बल्कि ऐसी स्थितियों में अभियुक्तों, कैदियों के त्वरित सुनवाई के मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन होता है-... कानून की प्रक्रिया को ऐसी किसी भी बाधा से मुक्त होकर अपना काम करना होता है।
अदालतों को कानून के अनुसार उचित आदेश पारित करना होता है, तब भी जब पक्ष या वकील मुकदमे की कार्यवाही में सहयोग नहीं कर रहे हों। हड़ताली वकीलों और सुस्त वादियों के कारण अदालती कार्यवाही रुक नहीं सकती है।"
[LAWYERS' STRIKES]
— Live Law (@LiveLawIndia) November 28, 2022
The #AllahabadHighCourt has sought the personal presence of the Chairman of the Bar Council of Uttar Pradesh to explain the steps which are proposed to be taken by the Council to prevent such occurrences in the future and the action to be taken in this case. pic.twitter.com/Iv6d5eQA5S
इसके अलावा, अदालत ने मामले में चल रहे मुकदमे की स्थिति के संबंध में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, इलाहाबाद द्वारा भेजी गई टिप्पणियों पर भी ध्यान दिया और कहा कि हड़ताल की कार्रवाई संबंधित अदालत की एक नियमित विशेषता थी।
इस पृष्ठभूमि में अदालत ने संबंधित ट्रायल कोर्ट को बार एसोसिएशन के संबंधित पदाधिकारियों के नाम अग्रेषित करने का निर्देश दिया, जिन्होंने हड़ताल बुलाई थी और लागू की थी और वकीलों के साथ-साथ अदालतों को उनके न्यायिक कार्यों का निर्वहन करने से रोका था।
संबंधित विचारण न्यायाधीश को यह भी इंगित करने के लिए कहा गया कि जेल अधिकारियों के साथ उचित जांच के बाद, जो आरोपी व्यक्ति जेल में थे, उन्हें नियत तिथि पर निचली अदालत के समक्ष पेश क्यों नहीं किया गया और निम्नलिखित विवरण देने के लिए कहा गया:
-अभियुक्त व्यक्तियों के नाम संबंधित तारीखों के साथ, जब उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
-वे तारीखें जिनको अभियुक्तों को न्यायालय में एक साथ पेश किया गया था।
-आरोपी व्यक्तियों को गिरफ्तार किए जाने के बाद एक साथ अदालत में पेश करने में विफलता के कारण, और अधिकारियों की ऐसी विफलता के लिए ट्रायल कोर्ट द्वारा की गई कार्रवाई।
मामले को नए मामलों की सूची में 20 दिसंबर, 2022 को आगे की सुनवाई के लिए पोस्ट किया गया है।
केस टाइटल- सूरज पासी बनाम यूपी राज्य [CRIMINAL MISC. BAIl APPLICATION 14553 of 2022 ]
आदेश पढ़ने/डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें

