'आज तक' की रिपोर्टर होने का झूठा दावा करने वाली महिला को मिली गिरफ़्तारी से अंतरिम सुरक्षा

Shahadat

17 May 2026 10:38 PM IST

  • आज तक की रिपोर्टर होने का झूठा दावा करने वाली महिला को मिली गिरफ़्तारी से अंतरिम सुरक्षा

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक पत्रकार को गिरफ़्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी। इस पत्रकार पर आरोप है कि उसने खुद को 'आज तक' न्यूज़ चैनल की रिपोर्टर के तौर पर झूठा पेश किया और यूपी के मुख्यमंत्री तथा अन्य जानी-मानी हस्तियों के साथ अपनी तस्वीरों में चैनल के लोगो का गलत इस्तेमाल किया।

    यह देखते हुए कि इस मामले पर विचार-विमर्श की ज़रूरत है, जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस पदम नारायण मिश्रा की बेंच ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता मनीषा ठाकुर को संबंधित FIR के सिलसिले में अगले आदेश तक गिरफ़्तार नहीं किया जाएगा।

    बेंच ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए 6 हफ़्तों के भीतर अपना जवाब (काउंटर-एफ़िडेविट) दाखिल करने को कहा। इस मामले को 4 अगस्त, 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया।

    संक्षेप में मामला

    ठाकुर के ख़िलाफ़ इस साल अप्रैल में 'आज तक' न्यूज़ चैनल के संवाददाता मदन गोपाल शर्मा ने FIR दर्ज कराई। FIR में आरोप लगाया गया कि ठाकुर अपने फ़ेसबुक अकाउंट पर एक तस्वीर और अन्य गुमराह करने वाली पोस्ट शेयर कर रही थीं।

    FIR में आरोप लगाया गया कि उस तस्वीर में ठाकुर, मुख्यमंत्री के सामने बैठी हुई दिखाई दे रही थीं। उनके साथ मथुरा के जाने-माने कारोबारी राजीव बृजवासी और उनके बेटे भी मौजूद थे।

    FIR के अनुसार, उस तस्वीर में मुख्यमंत्री की मेज़ पर रखा एक माइक्रोफ़ोन साफ़ तौर पर दिखाई दे रहा था, जिस पर 'आज तक' का लोगो लगा हुआ था।

    शिकायतकर्ता ने दावा किया कि यह आरोपी द्वारा खुद को इस प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनल की अधिकृत पत्रकार के तौर पर झूठा पेश करने की एक सोची-समझी कोशिश थी, जबकि असलियत यह थी कि उसका इस मीडिया संस्थान से कोई लेना-देना नहीं था।

    शिकायत में आगे आरोप लगाया गया कि किसी और का रूप धारण करने और चैनल के नाम, लोगो तथा माइक्रोफ़ोन ID का गलत इस्तेमाल करने का यह कृत्य पूरी तरह से फ़र्ज़ी, गुमराह करने वाला और गैर-कानूनी था। इसका मक़सद अनुचित प्रभाव जमाना और आम जनता को धोखा देना था।

    नतीजतन, याचिकाकर्ता के ख़िलाफ़ BNS की धारा 318(4) [धोखाधड़ी] और 319 [किसी और का रूप धारण करके धोखाधड़ी] के साथ-साथ IT एक्ट की धारा 66C [पहचान की चोरी] और 66D [किसी और का रूप धारण करके धोखाधड़ी] के तहत मामला दर्ज किया गया।

    इस FIR को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील ने यह दलील दी कि जिन धाराओं के तहत आरोप लगाए गए, उनमें से किसी भी धारा के तहत कोई अपराध बनता ही नहीं है। हाईकोर्ट के सामने उनका खास दावा यह था कि "Aaj Tak News Bharat" लोगो के लिए उनके पास रजिस्टर्ड कॉपीराइट हैं। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि उन्होंने किसी दूसरी मीडिया एजेंसी के कॉपीराइट का उल्लंघन किया।

    दूसरी ओर, राज्य ने रिट याचिका का यह तर्क देते हुए विरोध किया कि FIR में साफ तौर पर एक संज्ञेय अपराध का होना बताया गया। इसलिए इस शुरुआती चरण में किसी भी तरह के दखल की ज़रूरत नहीं थी।

    हालांकि, डिवीज़न बेंच ने यह माना कि इस मामले पर विचार करने की ज़रूरत है और उसने शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया, साथ ही प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 6 हफ़्तों का समय दिया।

    तथ्यों, परिस्थितियों और पेश किए गए तर्कों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने एक अंतरिम उपाय के तौर पर यह निर्देश दिया कि इस मामले में याचिकाकर्ता को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।

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