हिंडनबर्ग रिपोर्ट से जुड़े मामलों में अडानी ग्रुप की 5 कंपनियों का SEBI से सेटलमेंट, ₹1.50 करोड़ का भुगतान
Praveen Mishra
23 Sept 2026 12:42 PM IST

अडानी ग्रुप की पांच कंपनियों ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों से संबंधित SEBI की adjudication proceedings का सेटलमेंट कर लिया है। कंपनियों ने संयुक्त रूप से करीब ₹1.508 करोड़ की settlement amount का भुगतान किया है।
SEBI के Adjudicating Officer जय सेबेस्टियन ने 22 सितंबर को सेटलमेंट ऑर्डर पारित करते हुए पांचों कंपनियों के खिलाफ चल रही कार्यवाही का निपटारा कर दिया।
इन कंपनियों में Adani Enterprises Limited, Adani Total Gas Limited, AWL Agri Business Limited, Adani Green Energy Limited और Adani Energy Solutions Limited शामिल हैं। AWL Agri Business को पहले Adani Wilmar और Adani Energy Solutions को पहले Adani Transmission के नाम से जाना जाता था।
हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद SEBI ने की थी जांच
मामले की शुरुआत हिंडनबर्ग रिपोर्ट में उठाए गए विभिन्न आरोपों के बाद हुई थी। SEBI ने कथित Related Party Transactions (RPTs) के disclosure और corporate governance से जुड़े मुद्दों की जांच की।
जांच में यह भी देखा गया कि कहीं SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) Regulations, 2015 यानी LODR Regulations और तत्कालीन Equity Listing Agreement के प्रावधानों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
इस examination के निष्कर्षों के आधार पर SEBI ने पांचों कंपनियों के खिलाफ adjudication proceedings शुरू की थीं।
Adani Enterprises पर क्या थे आरोप?
Adani Enterprises से जुड़े आरोपों में वित्त वर्ष 2012-13 की annual report में कुछ कथित related party transactions का disclosure नहीं करना शामिल था।
ये लेन-देन कंपनी की subsidiary Adani Estates Private Limited और Adani Enterprises की related party Vakoder Investment Limited से संबंधित बताए गए।
इसके अलावा कंपनी के खिलाफ कुछ audit और limited-review reports को valid Peer Review Certificate के बिना sign किए जाने से संबंधित आरोपों पर भी कार्यवाही शुरू की गई थी।
SEBI के आदेश में मार्च 2015 में समाप्त वित्त वर्ष की audit report और जून 2015 तिमाही की limited-review report का उल्लेख किया गया, जिन्हें कथित तौर पर Dharmesh Parikh & Co LLP ने valid Peer Review Certificate के बिना sign किया था।
इसी तरह जून 2017, सितंबर 2017 और दिसंबर 2021 में समाप्त तिमाहियों की कुछ limited-review reports को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
अन्य चार कंपनियों के खिलाफ क्या मामला था?
Adani Total Gas, AWL Agri Business, Adani Green Energy और Adani Energy Solutions से जुड़ी proceedings में भी मुख्य रूप से अलग-अलग financial periods की audit और limited-review reports को कथित तौर पर valid Peer Review Certificate के बिना audit firms द्वारा sign किए जाने का मुद्दा शामिल था।
SEBI ने इन मामलों में संबंधित securities regulations के संभावित उल्लंघन को लेकर adjudication proceedings शुरू की थीं।
बिना आरोप स्वीकार या खारिज किए सेटलमेंट
कार्यवाही के दौरान पांचों कंपनियों ने SEBI (Settlement Proceedings) Regulations, 2018 के तहत settlement applications दाखिल कीं।
कंपनियों ने proceedings को तथ्यों के निष्कर्षों और कानून संबंधी conclusions को स्वीकार या अस्वीकार किए बिना सेटल करने का प्रस्ताव दिया।
SEBI की Internal Committee के साथ बैठकों के बाद कंपनियों ने revised settlement terms प्रस्तुत कीं। इसके बाद High Powered Advisory Committee (HPAC) ने 29 जून 2026 की बैठक में प्रस्ताव पर विचार किया और अलग-अलग settlement amounts की सिफारिश की।
किस कंपनी ने कितनी रकम चुकाई?
Adani Enterprises — ₹76.05 लाख
Adani Total Gas — ₹9.75 लाख
AWL Agri Business — ₹9.75 लाख
Adani Green Energy — ₹45.50 लाख
Adani Energy Solutions — ₹9.75 लाख
इस तरह पांचों कंपनियों के लिए कुल settlement amount ₹1.508 करोड़ रही।
HPAC की सिफारिशों को SEBI के Panel of Whole Time Members ने 13 अगस्त 2026 को स्वीकार किया। इसके बाद 20 अगस्त को demand notices जारी किए गए।
कंपनियों ने 5 सितंबर 2026 को SEBI को ईमेल के जरिए बताया कि settlement amounts का भुगतान कर दिया गया है। SEBI ने अपने रिकॉर्ड के आधार पर रकम प्राप्त होने की पुष्टि की।
SEBI ने कार्यवाही का किया निपटारा
Settlement terms स्वीकार होने और रकम मिलने के बाद SEBI ने पांचों कंपनियों के खिलाफ adjudication proceedings को संबंधित प्रावधानों के तहत dispose कर दिया।
हालांकि, सेटलमेंट ऑर्डर का अर्थ यह नहीं है कि SEBI हर परिस्थिति में दोबारा कार्रवाई नहीं कर सकता।
आदेश के मुताबिक, यदि settlement proceedings के दौरान कंपनियों की ओर से दी गई कोई जानकारी बाद में गलत पाई जाती है, undertakings या waivers की किसी शर्त का उल्लंघन होता है या settlement terms तय करने में कोई discrepancy सामने आती है, तो SEBI संबंधित proceedings को restore करने या दूसरी enforcement action शुरू करने का अधिकार रखता है।
महत्वपूर्ण रूप से, यह settlement कंपनियों द्वारा SEBI के निष्कर्षों या कानूनी आरोपों को स्वीकार करने के आधार पर नहीं हुआ है; proceedings को बिना findings और conclusions को admit या deny किए settle किया गया है।

