"प्रक्रिया का दुरुपयोग": 'रिश्वत' मामले में अडानी ग्रीन एनर्जी के खिलाफ याचिका हाईकोर्ट में खारिज

Shahadat

28 March 2026 9:44 AM IST

  • प्रक्रिया का दुरुपयोग: रिश्वत मामले में अडानी ग्रीन एनर्जी के खिलाफ याचिका हाईकोर्ट में खारिज

    अडानी ग्रुप की कंपनी— अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के लिए एक बड़ी राहत के तौर पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार (27 मार्च) को याचिका खारिज की। इस याचिका में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) से उस कंपनी के खिलाफ लगे आरोपों की जांच की मांग की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि कंपनी ने भारत के कई राज्यों में सोलर पावर के कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए करोड़ों रुपये की रिश्वत दी थी।

    चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस सुमन श्याम की डिवीज़न बेंच ने पाया कि याचिकाकर्ता जितेंद्र मारू ने उन दस्तावेज़ों पर बहुत ज़्यादा भरोसा किया, जो न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में चल रही एक कार्यवाही का हिस्सा हैं।

    बेंच ने अपने आदेश में कहा,

    "यह रिट याचिका साफ तौर पर कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। याचिकाकर्ता ने यह दावा किया कि आपराधिक न्याय प्रणाली को गति देने का उसका अधिकार कानून द्वारा मान्यता प्राप्त है, पिछले लगभग एक दशक में कोर्ट का रुख न करने का कोई उचित कारण बताने में विफल रहा है, जबकि कथित तौर पर किसी ने कुछ अनैतिक कामों में शामिल होने की कोशिश की थी। यह रिट याचिका एक अखबार की रिपोर्ट के आधार पर दायर की गई, जिसमें अमेरिकी कोर्ट द्वारा पारित आदेश प्रकाशित किया गया।"

    बेंच ने राय दी कि मारू पेशे से सोशल एक्टिविस्ट हैं। वह अपनी साख (Bona Fides) साबित करने में विफल रहे।

    चीफ जस्टिस चंद्रशेखर द्वारा लिखे गए 5-पृष्ठों के आदेश में कहा गया,

    "याचिकाकर्ता के पास यह रिट याचिका दायर करने का कोई अधिकार (Locus) नहीं है। वह साफ हाथों से कोर्ट में नहीं आया। यह रिट याचिका किसी भी सार्वजनिक उद्देश्य को पूरा नहीं करती है। बल्कि, इस तरह की याचिका गंभीर नुकसान पहुंचाती है और किसी भी कॉर्पोरेट समूह की प्रतिष्ठा और व्यावसायिक संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने की संभावना रखती है।"

    याचिकाकर्ता के अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते उपयोग की संभावनाओं का पता लगाने के लिए 'सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया' नाम से एक संस्था का गठन किया, और विभिन्न राज्य सरकारों ने उपभोक्ताओं को बिजली वितरण के लिए बिजली खरीद समझौते (PPA) किए। उन्होंने दावा किया कि 2020 में अडानी ग्रीन एनर्जी ने Azure Global Ltd. के साथ मिलकर एक साज़िश रची—जो खुद भी सोलर पावर बनाने का दावा करती थी—ताकि 'गैर-कानूनी तरीकों' का इस्तेमाल करके कॉन्ट्रैक्ट हासिल किए जा सकें।

    मारू ने तर्क दिया कि इन कॉर्पोरेट समूहों ने कई अज्ञात सरकारी अधिकारियों को 'रिश्वत' देने के उद्देश्य से करोड़ों डॉलर के पेंशन फंड बनाए। आरोप है कि इस योजना में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, जम्मू और कश्मीर और आंध्र प्रदेश की राज्य बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) के अधिकारियों को 2,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की रिश्वत देने का समझौता शामिल था।

    इसके अलावा, मारू ने दावा किया कि किए गए भुगतानों का दस्तावेज़ीकरण किया गया और उक्त 'इलेक्ट्रॉनिक सबूत' अडानी ग्रीन एनर्जी द्वारा सुरक्षित रखे गए, जिन्हें बाद में यूएस फेडरल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन ने ज़ब्त कर लिया और यूएस अदालतों के समक्ष चल रही कार्यवाही में पेश किया।

    अपनी याचिका में मारू ने यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, ईस्टर्न कोर्ट ऑफ़ न्यूयॉर्क द्वारा पारित एक आदेश का भी ज़िक्र किया और कहा कि अडानी ग्रीन एनर्जी ने प्रोत्साहन (Incentives) देने का प्रस्ताव रखा था, जो असल में 'रिश्वत' के अलावा और कुछ नहीं था।

    मारू ने 24 नवंबर, 2024 के जूरी ट्रायल के आदेश पर काफ़ी भरोसा किया, जिसके तहत प्रतिवादियों को नोटिस देने का प्रस्ताव था; ये प्रतिवादी अडानी ग्रीन एनर्जी के चेयरमैन, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, मैनेजिंग डायरेक्टर आदि हैं। उन्होंने यूएस डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस के आरोप-पत्र की प्रमाणित प्रतियों और साथ ही एक समानांतर सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) की सिविल प्रवर्तन शिकायत पर भी भरोसा किया।

    हालांकि, जजों ने यह पाया कि मारू यूएस कोर्ट में किसी भी कार्यवाही के जारी रहने के संबंध में और जानकारी देने में विफल रहे।

    Case Title: Jitendra Punamchand Maru vs Central Bureau of Investigation (Criminal Writ Petition 6214 of 2025)

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