अभिजीत अय्यर मित्रा की पोस्ट 'शायरी' में थी: मनीषा पांडे के ख़िलाफ़ पोस्ट के लिए FIR के आदेश पर कोर्ट ने लगाई रोक
Shahadat
9 Jun 2026 9:28 PM IST

दिल्ली कोर्ट ने मंगलवार को मजिस्ट्रेट के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें कमेंटेटर अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। यह आदेश डिजिटल समाचार प्लेटफॉर्म 'न्यूजलॉन्ड्री' की एडिटोरियल डायरेक्टर मनीषा पांडे की शिकायत पर दिया गया था, जिसमें उन्होंने मित्रा पर सोशल मीडिया पर उनके और अन्य महिला कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया था।
साकेत कोर्ट के एडिशनल सेशन जज पुरुषोत्तम पाठक ने कहा कि कथित अपमानजनक शब्द शायरी के रूप में थे, लेकिन उनमें किसी व्यक्ति का विशेष रूप से नाम नहीं लिया गया।
जज ने यह भी कहा कि इस्तेमाल किए गए शब्दों और वाक्यों की बारीकी से व्याख्या तभी की जा सकती है जब रिवीजन याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएं।
अदालत ने कहा,
"वैसे भी, अगर रिवीजन याचिका के अंतिम निपटारे तक विवादित आदेश के अमल पर रोक लगा दी जाती है तो प्रतिवादी/शिकायतकर्ता को कोई नुकसान नहीं होगा।"
सेशन जज ने यह आदेश तब नए सिरे से पारित किया, जब दिल्ली हाईकोर्ट ने FIR के निर्देश पर रोक लगाने वाले उनके पिछले आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि वह बिना किसी कारण के पारित किया गया।
यह आदेश मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देने वाली मित्रा की याचिका पर पारित किया गया।
बता दें, मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पांडे के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिन्होंने मित्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा था कि मित्रा के ट्वीट "यौन रंग वाली टिप्पणियों" की श्रेणी में आते हैं और "प्रथम दृष्टया" शिकायतकर्ता की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से किए गए, जिनका नाम एक ट्वीट में लिया गया।
मंगलवार को पारित आदेश में सेशन कोर्ट ने कहा कि पुलिस द्वारा दायर कार्रवाई रिपोर्ट में एक तरफ मित्रा के पक्ष का समर्थन करने का दावा किया गया। दूसरी तरफ इसमें अपर्याप्त विवरण हैं या यह अनिर्णायक है।
इसमें आगे कहा गया कि 'मेन्स-रिया' (आपराधिक इरादे) या मकसद का पता लगाने के लिए पुलिस अधिकारियों की सहायता की आवश्यकता थी, जिसे केवल रिवीजन में दोनों पक्षों के संबंधित जवाबों को रिकॉर्ड पर लेने और दलीलें सुनने के बाद ही निर्धारित किया जा सकता था।
कोर्ट ने कहा,
"इसलिए न्याय के हित में और रिविज़निस्ट (पुनरीक्षण याचिकाकर्ता) को अपने महत्वपूर्ण अधिकार का इस्तेमाल करने का उचित मौका देने के लिए विवादित आदेश के अमल पर रोक लगाना ही सही है। रिविज़निस्ट/आरोपी की तरफ से दी गई दलील में दम है कि उसका पक्ष सुने बिना और उसकी सफाई को एकतरफा तौर पर खारिज करके FIR दर्ज करने की कोई तत्काल ज़रूरत नहीं थी।"
उल्लेखनीय है, महिला पत्रकारों ने मानहानि के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में मित्रा के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। उन्होंने मित्रा से सार्वजनिक रूप से माफी और हर्जाने व मुआवजे के तौर पर 2 करोड़ रुपये की मांग की।
हाईकोर्ट के सामने पत्रकारों ने तर्क दिया कि X पर अय्यर की कथित मानहानि वाली पोस्ट अपमानजनक, बेबुनियाद और गलत सोच पर आधारित हैं। ये पोस्ट गलत इरादों से, जानबूझकर और महिला कर्मचारियों की गरिमा और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के मकसद से की गईं।
उनके अनुसार, अय्यर ने X प्लेटफॉर्म पर अपनी पोस्ट की सीरीज़ के ज़रिए महिला कर्मचारियों को कथित तौर पर अपमानजनक शब्दों और गालियों का इस्तेमाल करते हुए "झूठे और दुर्भावनापूर्ण" तरीके से संबोधित किया। उन्होंने उन्हें 'वेश्या' और उनके कार्यस्थल को 'वेश्यालय' कहा।
इससे पहले, हाईकोर्ट ने अय्यर को उनके ट्वीट्स के लिए फटकार लगाई थी, जिसके बाद मित्रा ने संबंधित पोस्ट हटा दी थीं।
बाद में मित्रा ने मानहानि के मुकदमे को खारिज करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया। यह मामला अभी विचाराधीन है।

