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बलात्कार के लिए उकसाने वाले को भी ही उतनी ही सजा, जितनी बलात्‍कारी कोः बॉम्बे हाईकोर्ट

LiveLaw News Network
13 Feb 2020 5:45 AM GMT
बलात्कार के लिए उकसाने वाले को भी ही उतनी ही सजा, जितनी बलात्‍कारी कोः बॉम्बे हाईकोर्ट
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बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने नाबालिग से बलात्कार के लिए उकसाने के दोषी अपीलकर्ता की याचिका खार‌िज़ की

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिछले महीने नागपुर के एक वर्षीय मजदूर सुनील रामटेके की अपील को खारिज कर दिया, जिसे भारतीय दंड सहिता की धारा 109 के साथ पठित 376 (2) (i)(जे) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 के तहत फेगड़ गांव में एक 13 साल की लड़की के दुष्कर्म के लिए उकसाने के आरोप में दोषी ठहराया गया था।

नागपुर पीठ के जस्टिस वीएम देशपांडे ने रामटेके की अपील सुनी और नतीजा निकाला कि रामटेके ने नाबालिग लड़की का बलात्कार करने के लिए सह-अभियुक्त गोलू को उकसाया था। वह उकसाने वाला है।

केस की पृष्ठभूमि

पुलिस नायक स्वाति लोखंडे को 10 अगस्त, 2017 को दिए पीड़िता के बयान के अनुसार, पीड़िता अपनी सहेली अंजलि के साथ एक अन्य सहेली हर्षा के घर होमवर्क की नोटबुक लेने जा रही थी, उसे सुनील रामटेके ने बुलाया, उसने पीड़‌िता को पकड़ लिया और उसे गोलू बरसागडे (मामले में सह आरोपी) के घर ले गया।

सुनील ने उसे गोलू के घर के अंदर धकेल दिया और कमरा बाहर से बंद कर दिया। पीड़ित के अनुसार, रामटेके ने बाहर से मराठी में कहा- "गोलू ला जामवु दे, तुला किति पयसे पाहिज ते मी देतो", जिसका अर्थ है कि गोलू तुम्हारे साथ संभोग करे, तुम जो भी पैसा चाहोगी, मैं दूंगा।

इसके बाद, सह-आरोपी गोलू ने पीड़िता के कपड़े उतार दिए और उसके साथ बलात्कार किया। इस बीच, अंजलि को पीड़िता की बहन काजल आ गई, जिसने पीड़िता को घर से बाहर ले गई। पीड़िता ने कहा कि गोलू ने उसे और काजल को धमकी दी कि अगर घटना का खुलासा किया तो वह (पीड़िता को) समाज में बदनाम हो जाएगी। हालांकि, 9 अगस्त, 2017 को पीड़िता ने पेट में दर्द का अनुभव किया और अपनी दादी को घटना के बारे में जानकारी दी, जिसके बाद वे पुलिस स्टेशन गए और पीड़िता ने अपना बयान दर्ज कराया।

फैसला

अतिरिक्त संयुक्त सत्र न्यायाधीश ने रामटेके को धारा 354, 354A, 506 और 109 के साथ पठित धारा धारा 376 (2)(i)(j)और पोक्सो एक्ट की धार 3, धारा 16 के स‌ाथ पठित और धारा 4 के तहत दोषी करार दिया, जबकि सह-आरोपी गोलू पर धारा 376 (2) (i)(j), धारा 506 और धारा 342, धारा 34 के साथ पठित, और पोक्सो एक्‍ट की धारा 3, 4 के तहत दोषी करार दिया। दोनों आरोपियों ने आरोपों से इनकार किया और ट्रायल का दावा किया।

ट्रायल जज ने अपने फैसले में कहा कि पीड़ित के पास आरोपियों को झूठे मामले में फंसाने का कोई कारण नहीं था। उन्होंने रामटेके और गोलू को दस-दस साल कैद की सजा सुनाई।

डॉ प्रियंका शेलार ने पीड़ित का परीक्षण किया और नतीजा निकाला कि पीड़ित पर यौन हमला हुआ था। कोर्ट ने केमिकल एनालाइज़र की रिपोर्ट का उल्लेख किया और कहा-

"केमिकल एनालाइज़र की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित का अंडरगारमेंट खून से सना हुआ था और उसका कोई स्पष्टीकरण नहीं है। मेरे विचार में, अंडरगारमेंट का खून से सना होना अपराध की स्थिति है, विशेषकर तब जब रिकॉर्ड पर ऐसा कुछ भी उपलब्‍ध नहीं है, जिससे साबित हो सके कि पीड़िता उस अवधि में माहवारी में थी। "

कोर्ट ने अपीलकर्ता के वकील की उस दलील को भी खारिज कर दिया कि पीड़िता संभोग के लिए सहमति दी थी। कोर्ट ने कहा-

"पीड़िता द्वारा अपीलकर्ता को झूठा फंसाने का कोई कारण नहीं है। पीड़िता का यह मामला नहीं है कि अपीलकर्ता ने उसका बलात्कार किया है। उसने अदालत के सामने सच्चाई बताई है कि उसे गोलू के घर के अंदर धकेल दिया गया और फिर उससे कहा गया कि वह सह-अभियुक्त गोलू को अपने साथ यौन संबंध बनाने की अनुमति दे और इसके लिए उसे पैसे दिए जाएंगे। मेरे विचार में, अपीलकर्ता के विद्वान वकील की यह दलील की पीड़िता ने सहमति दी थी, खारिज़ किए जाने योग्य है, विशेषकर इस तथ्य के मद्देनजर कि पीड़ित नाबालिग थी और पोक्सो अधिनियम के प्रावधानों तहत "बच्ची" थी।"

आईपीसी की धारा 109 में कहा गया है-

"उकसाने की सज़ा, यदि परिणामस्वरूप उकसाया गया कृत्य किया गया हो, और जहां इसकी सज़ा के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं किए गए हों, जिसने भी किसी अपराध के लिए उकसाया होगा, यदि उकसाया गया कृत्य, उकसाने के परिणामस्वरूप किया गया है, और इस कानून के तहत उकसाने के लिए सज़ा का स्पष्‍ट प्रावधान नहीं किया गया है तो उकसाने वाले का वही सज़ा दी जाएगी, जिस सज़ा का प्रावधान अपराध के लिए किया गया है।"

मामले में जस्टिस देशपांडे ने अपील खार‌िज़ करते हुए कहा-

"अभियोजन पक्ष के गवाहों के साक्ष्य स्पष्ट रूप से स्थापित करते हैं कि अपीलकर्ता ने जान-बूझकर सह-अभियुक्त को पीड़िता के साथ बलात्कार करने में मदद की है। रिकॉर्ड पर मौजूदा साक्ष्यों से स्थापित होता है कि जब पीड़िता अपीलकर्ता ने घर के अंदर धकेला, तो न केवल उसने बाहर से दरवाजा बंद किया, बल्‍कि वह बाहर से घर की रखवाली भी करता रहा। उसने काजल को घर के अंदर जाने से रोकने की कोशिश भी की। इससे पता चलता है कि अपीलकर्ता ने सह-आरोपी के साथ बलात्कार के अपराध में सक्रिय भूमिका अदा की।"

"अपीलकर्ता द्वारा किए गए कृत्य को पीड़ित और अभियोजन पक्ष के अन्य गवाहों द्वारा विधिवत साबित किया गया है, मेरे विचार में, यह साबित होता है कि अपीलकर्ता उकसाने वाला था था और उसने पीड़िता, नाबालिग लड़की से बलात्कार करने के लिए सह-आरोपी गोलू को उकसाया था।"

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