₹200 करोड़ का मनी लॉन्ड्रिंग केस: वर्क वीज़ा रिन्यू कराने के लिए जैकलीन फर्नांडीज को मिली NOC

  • ₹200 करोड़ का मनी लॉन्ड्रिंग केस: वर्क वीज़ा रिन्यू कराने के लिए जैकलीन फर्नांडीज को मिली NOC

    दिल्ली कोर्ट ने बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडीज को उनका वर्क वीज़ा रिन्यू कराने के लिए 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) दिया।

    उन पर कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े ₹200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप हैं।

    राउज़ एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज गगनदीप सिंह ने संबंधित अथॉरिटी को निर्देश दिया कि वे लागू कानूनों और नियमों के अनुसार एक्ट्रेस की अर्ज़ी पर स्वतंत्र रूप से विचार करें।

    जज ने आदेश दिया,

    "...आवेदक/आरोपी जैकलीन फर्नांडीज को कानून के अनुसार संबंधित अथॉरिटी के पास अपने वीज़ा के रिन्यूअल के लिए आवेदन करने के लिए NOC दी जाती है और संबंधित अथॉरिटी लागू कानून/नियमों/सर्कुलर/उप-नियमों के अनुसार इस पर स्वतंत्र रूप से विचार करेगी।"

    एक्ट्रेस ने कोर्ट का रुख करते हुए कहा कि वह श्रीलंका की नागरिक हैं और 2009 से भारत में एम्प्लॉयमेंट वीज़ा पर रह रही हैं और उनका मौजूदा वीज़ा एक्सपायर हो गया।

    उन्होंने कहा कि वह एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं और भारत में उनके कई प्रोफेशनल कमिटमेंट्स हैं।

    यह बताया गया कि श्रीलंकाई वाणिज्य दूतावास (Consulate) द्वारा दोबारा जारी किए जाने के लिए उनका पासपोर्ट उन्हें सौंप दिया गया, इसलिए संबंधित अथॉरिटी के पास वर्क वीज़ा रिन्यूअल के लिए आवेदन करने की अनुमति मांगी गई। उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि FRRO कोर्ट से NOC के बिना वर्क वीज़ा रिन्यू नहीं कर रहा है।

    एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) की ओर से पेश SPP ने कहा कि पिछले साल मार्च में पारित आदेश के अनुसार आदेश दिया जा सकता है, जिसमें FRRO को अपने नियमों और दिशानिर्देशों के अनुसार रिन्यूअल अर्ज़ी पर विचार करने का निर्देश हो।

    ED ने एक्ट्रेस को कई बार समन भेजा था और एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट में पहली बार उन्हें सह-आरोपी बनाया गया। उन्हें इस मामले में दसवें आरोपी के तौर पर शामिल किया गया।

    पिछले साल जुलाई में दिल्ली हाईकोर्ट ने PMLA मामला रद्द करने की उनकी अर्ज़ी खारिज की थी। कोर्ट ने कहा था कि उनकी यह आशंका कि कोई सबूत खुद को फंसाने वाला हो सकता है, ECIR को रद्द करने का आधार नहीं बन सकती, क्योंकि कानूनी और संवैधानिक सुरक्षा पहले से ही मौजूद हैं और उनका मूल्यांकन उसी दायरे में किया जाएगा। पिछले साल सितंबर में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ उनकी SLP को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। उन्हें सही समय पर कोर्ट जाने की छूट दी गई।

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