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सोहराबुद्दीन शेख कथित मुठभेड़ : विशेष सीबीआई जज ने कहा, सीबीआई की जांच राजनीतिक नेताओं को फंसाने के लिए ' पूर्व निर्धारित' कहानी पर आधारित

LiveLaw News Network
1 Jan 2019 5:00 PM GMT
सोहराबुद्दीन शेख कथित मुठभेड़ : विशेष सीबीआई जज ने कहा, सीबीआई की जांच राजनीतिक नेताओं को फंसाने के लिए  पूर्व  निर्धारित कहानी पर आधारित
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मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने कहा है कि गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसी प्रजापति के कथित झूठी मुठभेड़ में हत्या में सीबीआई की जांच राजनीतिक नेताओं को फंसाने के लिए ' पूर्व निर्धारित' कहानी पर आधारित थी और इसे गढ़ा गया था।

यह टिप्पणी विशेष सीबीआई अदालत के जज एसजे शर्मा ने इस मामले में 21 दिसंबर को दिए अपने 350 पेज के फैसले में की है। हालांकि ये पूरा फैसला अभी उपलब्ध नहीं हुआ है।

21 दिसंबर को राजनीतिक रूप से संवेदनशील सोहराबुद्दीन शेख और तुलसीराम प्रजापति की कथित मुठभेड़ मामले में मुंबई स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया था। जो 22 आरोपी हैं, उनमें पुलिस इंस्पेक्टर, असिस्टेंट इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर, सिपाही और एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं।

अपने फैसले जज शर्मा ने कहा कि उनसे पहले मामले के जज एमबी गोसावी ने आरोपी नंबर-16 (भाजपा अध्यक्ष अमित शाह) को आरोपमुक्त करने की अर्जी पर फैसला देते हुए टिप्पणी की थी कि यह जांच 'राजनीति से प्रेरित' थी।

जज शर्मा ने आगे कहा, " मेरे सामने रखी गई पूरी सामग्री पर निष्पक्ष विचार करने और गवाहों व सबूतों में से प्रत्येक की बारीकी से जांच करने के बाद, मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि सीबीआई जैसी एक प्रमुख जांच एजेंसी के पास राजनीतिक नेताओं को फंसाने की नीयत वाली एक पूर्व-निर्धारित थ्योरी और एक स्क्रिप्ट थी। सीबीआई इस मामले की जांच करने के दौरान सच्चाई तक पहुंचने की बजाए कुछ और काम कर रही थी। "

जज शर्मा ने कहा, " यह पूरी तरह स्पष्ट है कि सीबीआई को सच्चाई की खोज करने की बजाय एक खास पूर्व कल्पित और पूर्व निर्धारित कहानी को साबित करने की ज्यादा चिंता थी। सीबीआई ने कानून के मुताबिक जांच करने की बजाय इस 'लक्ष्य' तक पहुंचने के लिए जो भी जरूरी थी, वह किया।"

जज शर्मा ने आगे कहा, " पूरी जांच एक खास लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक स्क्रिप्ट पर केंद्रित थी। इस प्रक्रिया के तहत राजनीतिक नेताओं को फंसाने की धुन में सीबीआई ने आरोप पत्र में सबूत गढ़े और गवाहों के बयान शामिल किए। ये बयान अदालत की न्यायिक समीक्षा का सामना नहीं कर पाए और गवाहों ने अदालत के सामने निडरता से इशारा किया कि राजनीतिक नेताओं को फंसाने के मकसद से सीबीआई ने अपनी स्क्रिप्ट सही ठहराने के लिए उनके बयान गलत दर्ज किए।"

गौरतलब है कि साल 2005-06 के दौरान कथित गैंगस्टर सोहराबुद्दीन और प्रजापति को 'फर्जी मुठभेड़' में मारे जाने और सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसर बी की गुमशुदगी ने देश में बड़े पैमाने पर राजनीतिक भूचाल ला दिया था।इस मामले में कुल 38 व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया था। अदालत ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और सभी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों समेत 16 को बरी कर दिया गया था।

सोहराबुद्दीन को 26 नवंबर, 2005 को अहमदाबाद में हुई एक मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया गया था। फिर उसकी पत्नी कौसरबी को भी मार दिया गया। इसके एक साल बाद तुलसीराम प्रजापति को भी मार गिराने का दावा किया गया।अमित शाह समेत 16 लोगों को 2014 से 2017 के बीच ट्रायल कोर्ट बरी कर चुका है और सीबीआई ने इन्हें बरी किए जाने के खिलाफ चुनौती याचिका भी दायर नहीं की थी लेकिन सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन ने बॉम्बे हाई कोर्ट में वंजारा, दिनेश एमएन और पांडियन को बरी किए जाने को चुनौती दी थी।

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