Yamuna Expressway Bus Fire : सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ़्तारी और सुरक्षा नियमों के पालन पर केंद्र और यूपी सरकार से रिपोर्ट मांगी

  • Yamuna Expressway Bus Fire : सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ़्तारी और सुरक्षा नियमों के पालन पर केंद्र और यूपी सरकार से रिपोर्ट मांगी

    सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र से जवाब मांगा। यह जवाब एक याचिका पर मांगा गया, जिसमें सड़क सुरक्षा के कई उपायों की मांग की गई। यह याचिका 23-24 सितंबर, 2026 की रात यमुना एक्सप्रेसवे पर जेवर के पास एक स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की जलकर मौत होने के बाद दायर की गई।

    कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, भारत सरकार और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के सचिव से यह बताने को कहा कि बस के ड्राइवर और मालिक को गिरफ़्तार किया गया है या नहीं। कोर्ट ने यह जानकारी भी मांगी है कि क्या रजिस्टर्ड मालिक ने डबल-डेकर बस पर लागू नियमों और कानूनों का पालन किया।

    इस मामले पर जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने विचार किया। यह सुनवाई 'एस. राजशेखरन बनाम भारत सरकार' मामले में अंतरिम अर्जी (IA) पर हुई, जो सड़क सुरक्षा पर निर्देश मांगने वाली 2012 की एक रिट याचिका है।

    कोर्ट ने आदेश दिया:

    "हम जानना चाहते हैं कि संबंधित बस के ड्राइवर और बस के रजिस्टर्ड मालिक के खिलाफ क्या कदम उठाए गए। क्या उन्हें अब तक गिरफ़्तार किया गया? क्या रजिस्टर्ड मालिक ने इस डबल-डेकर बस को सड़क पर उतारने से पहले सभी नियमों और कानूनों का पालन किया?"

    इस अर्जी में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव से आग लगने की घटना के हालात पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई। इसमें आग लगने के कारण, बस के मालिकाना हक और रजिस्ट्रेशन की जानकारी, परमिट, फिटनेस सर्टिफिकेट, इंश्योरेंस और यात्रियों की अधिकृत क्षमता के साथ-साथ बनावट और आग से सुरक्षा संबंधी ज़रूरतों के पालन के बारे में जानकारी मांगी गई।

    रिपोर्ट में गाड़ी में किए गए किसी भी अनधिकृत बदलाव, इमरजेंसी एग्जिट और सुरक्षा उपकरणों की कार्यक्षमता, गाड़ी, ऑपरेटर और ड्राइवर के चालान और उल्लंघन के इतिहास, और पुलिस, फायर सर्विस, एम्बुलेंस और एक्सप्रेसवे अधिकारियों के रिस्पॉन्स टाइम (प्रतिक्रिया समय) को भी शामिल किए जाने की उम्मीद है। इसमें ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई और एक समय-सीमा के भीतर रोकथाम की कार्ययोजना का विवरण भी मांगा गया। अन्य महत्वपूर्ण राहतों में केंद्र, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह निर्देश देने की मांग की गई कि वे ऐसे यात्री-बस ड्राइवरों की पहचान करें जिनके खिलाफ़ एक साल की अवधि में पांच या उससे ज़्यादा ट्रैफिक उल्लंघन दर्ज किए गए। कानून के अनुसार लाइसेंसिंग अथॉरिटी के सामने उनके खिलाफ़ कार्रवाई शुरू करें।

    याचिकाकर्ता ने यह निर्देश देने की भी मांग की कि जिन ट्रांसपोर्ट वाहनों के पांच से ज़्यादा चालान बकाया हैं, उन्हें तब तक नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और एक्सप्रेसवे पर टोल प्लाज़ा पार करने से रोका जाए जब तक कि बकाया राशि का भुगतान न हो जाए। इस उपाय को लागू करने के लिए ई-चालान डेटाबेस को VAHAN और FASTag के साथ जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया।

    याचिका में यह भी मांग की गई कि वैध फिटनेस सर्टिफिकेट या काम करने वाले स्पीड-लिमिटिंग डिवाइस के बिना वाहनों को नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करने से रोका जाए। इसमें पब्लिक सर्विस वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) और इमरजेंसी पैनिक बटन को अनिवार्य करने की भी मांग की गई।

    आवेदन में MoRTH से स्लीपर, टू-टियर स्लीपर और डबल-डेकर बसों के फिजिकल इंस्पेक्शन के लिए एक समान राष्ट्रीय चेकलिस्ट जारी करने को कहा गया। प्रस्तावित चेकलिस्ट में इमरजेंसी एग्जिट, आग का पता लगाने और उसे बुझाने वाले सिस्टम, इलेक्ट्रिकल और एयर-कंडीशनिंग वायरिंग, टायर, ब्रेक, मंज़ूर बर्थ लेआउट, खतरनाक सामान और फिटनेस सर्टिफिकेट, परमिट और इंश्योरेंस की वैधता शामिल होगी।

    इसमें देश भर में ऐसी बसों के तय समय-सीमा के भीतर जोखिम-आधारित फिजिकल इंस्पेक्शन (जियो-टैग किए गए सबूतों के साथ) की भी मांग की गई है, और सुरक्षा की ज़रूरी शर्तों को पूरा न करने वाले वाहनों के रजिस्ट्रेशन या परमिट को तब तक सस्पेंड करने की मांग की गई है जब तक कि कमियों को ठीक न कर लिया जाए और बसों को दोबारा सर्टिफ़ाई न कर दिया जाए।

    अन्य राहतों में वाहन की लोकेशन ट्रैक करने वाले डिवाइस को स्पीड-लिमिटिंग सिस्टम, रूट-मॉनिटरिंग सिस्टम और धुएं व आग का पता लगाने वाले डिटेक्टरों के साथ जोड़ने के लिए तकनीकी मानक बनाना शामिल है, ताकि कमांड और कंट्रोल सेंटर को रियल-टाइम अलर्ट मिल सकें।

    याचिकाकर्ता ने बस क्रू के लिए अनिवार्य फायर-रिस्पॉन्स ट्रेनिंग, यात्रा शुरू होने से पहले यात्रियों को सुरक्षा संबंधी जानकारी देना, डिजिटल पैसेंजर मैनिफेस्ट और इमरजेंसी बटन को इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम-112 के साथ जोड़ने की भी मांग की।

    इसके अलावा, हाईवे और एक्सप्रेसवे अथॉरिटी को जोखिम-आधारित फायर और रेस्क्यू प्लान तैयार करने के निर्देश देने की मांग की गई। इसमें फायर टेंडर, एम्बुलेंस और रेस्क्यू उपकरण तैनात करना, समय-समय पर रात में ड्रिल करना और असल इमरजेंसी रिस्पॉन्स समय की जानकारी प्रकाशित करना शामिल है। जहां भी संभव हो, 15 मिनट का टारगेट रिस्पॉन्स समय प्रस्तावित किया गया।

    याचिका में पुरानी स्लीपर और डबल-डेकर बसों को रेट्रोफिट करने या चरणबद्ध तरीके से हटाने पर निर्णय लेने की भी मांग की गई। इसमें पैसेंजर-कम्पार्टमेंट में आग से सुरक्षा, आग-रोधी सामग्री, इलेक्ट्रिकल वायरिंग, बैटरी और फ्यूल आइसोलेशन और मैनुअल डोर-रिलीज़ मैकेनिज्म से जुड़ी ज़रूरतें शामिल हैं।

    इसमें बस में आग लगने की हर घटना को इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (eDAR) पोर्टल पर अनिवार्य रूप से रिकॉर्ड करने की भी मांग की गई। साथ ही आग लगने के कारण सुरक्षा प्रणालियों, हताहतों और की गई कार्रवाई के बारे में स्टैंडर्ड जानकारी एक पब्लिक डैशबोर्ड के माध्यम से उपलब्ध कराने की मांग की गई।

    Case Title : S.RAJASEEKARAN v. UNION OF INDIA AND ORS. & ORS.

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