आंखें तिरछी होने के कारण UP कांस्टेबल पद के लिए महिला को किया खारिज; मेडिकल बोर्ड द्वारा दृष्टि सामान्य पाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया नियुक्ति का निर्देश

  • आंखें तिरछी होने के कारण UP कांस्टेबल पद के लिए महिला को किया खारिज; मेडिकल बोर्ड द्वारा दृष्टि सामान्य पाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया नियुक्ति का निर्देश

    सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह 'कांस्टेबल सिविल पुलिस' के पद के लिए महिला उम्मीदवार को नियुक्ति पत्र जारी करे। इस महिला को कथित तौर पर आंखें तिरछी होने के आधार पर नियुक्ति देने से मना कर दिया गया, जबकि उसके पास एक मेडिकल सर्टिफिकेट था जिसमें उसकी दृष्टि को बिल्कुल सही और सामान्य बताया गया।

    उम्मीदवार को 28 दिसंबर, 2024 को कानपुर देहात की रिजर्व पुलिस लाइन में डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन (DV) और फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (PST) के लिए बुलाया गया। उसने ये टेस्ट पास कर लिए और अगले चरण के लिए योग्य उम्मीदवारों की सूची में उसका नाम शामिल हो गया। इसके बाद उसे मेडिकल बोर्ड के सामने मेडिकल जांच के लिए बुलाया गया। वह बोर्ड के सामने पेश हुई, लेकिन उसे कथित तौर पर मौखिक रूप से बताया गया कि आंखें तिरछी होने के कारण वह अयोग्य है। 'UP पुलिस कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल सेवा नियमावली, 2015' (2017 में संशोधित) के नियम 15(6)(d) के तहत डिवीजन मेडिकल बोर्ड द्वारा दोबारा जांच की गई, जिसमें भी उसे आंखों के तिरछेपन के कारण मेडिकल रूप से अयोग्य घोषित कर दिया गया। हालांकि, उसे कोई लिखित अस्वीकृति आदेश या कोई अन्य दस्तावेज नहीं दिया गया।

    इसके बाद उम्मीदवार आकांक्षा देवी ने स्वतंत्र रूप से दो योग्य मेडिकल संस्थानों से जांच कराई। दोनों ही संस्थानों ने पाया कि उसकी रंग पहचानने की क्षमता और दृष्टि बिल्कुल सामान्य है, जिससे शुरुआती मेडिकल जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। इन रिपोर्टों के आधार पर उसने स्वतंत्र संस्थान में फिर से मेडिकल जांच कराने की मांग की, जिसे खारिज किया गया। इसके बाद वह हाईकोर्ट गई, लेकिन हाईकोर्ट ने यह कहते हुए उसकी याचिका खारिज की कि चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

    15 सितंबर, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीदवार को लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के सामने पेश होने का निर्देश दिया। साथ ही कोर्ट ने यूनिवर्सिटी के निदेशक को निर्देश दिया कि वे नेत्र रोग विशेषज्ञों (Ophthalmologists) का मेडिकल बोर्ड गठित करें। यह बोर्ड उम्मीदवार की जांच करेगा और विशेष रूप से उसकी आंखों के तिरछेपन के संबंध में अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। यह पाए जाने पर कि KGMU के मेडिकल सर्टिफिकेट में अपीलकर्ता की दृष्टि को सही और सामान्य बताया गया, जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने अपीलकर्ता की याचिका स्वीकार की और कहा कि वह नियुक्ति पाने की हकदार है।

    कोर्ट ने कहा,

    "हमारा मानना ​​है कि इस मामले के विशेष तथ्यों को देखते हुए, और विशेष रूप से लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के नेत्र विज्ञान विभाग (Department of Ophthalmology) के मेडिकल बोर्ड द्वारा उनकी दृष्टि को सही/सामान्य प्रमाणित किए जाने के मद्देनजर, हम इस आदेश को रद्द करते हैं और अपील को स्वीकार करते हैं। हम प्रतिवादियों को निर्देश देते हैं कि यदि वह अन्य सभी शर्तों को पूरा करती हैं तो उन्हें नियुक्ति आदेश/कॉल लेटर जारी किया जाए। साथ ही हम यह स्पष्ट कर देते हैं कि अपीलकर्ता उन उम्मीदवारों पर वरिष्ठता (Seniority) का दावा नहीं कर सकतीं, जिनकी नियुक्ति अब तक हो चुकी है।"

    परिणामस्वरूप, अपील स्वीकार की गई।

    Case Title : AKANKSHA DEVI VERSUS STATE OF U.P. & ORS.

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