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विधवा ने 'ऑनर कि‌लिंग' मामले में आरोपी अपनी मां को दी गई जमानत रद्द करने की मांग की, सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

LiveLaw News Network
20 Aug 2021 9:28 AM GMT
विधवा ने ऑनर कि‌लिंग मामले में आरोपी अपनी मां को दी गई जमानत रद्द करने की मांग की, सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
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एक विधवा ने अपने पति की 'ऑनर किलिंग' के मामले में अपनी मां को दी गई जमानत को रद्द करने करने के लिए याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने य‌ाचिक पर नोटिस जारी किया है। सीजेआई एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने याचिकाकर्ता विधवा की ओर से पेश सीन‌ियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह की दलीलें सुनने के बाद नोटिस जारी किया।

सुनवाई के दौरान सीन‌ियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने कहा कि स्थिति दुखद है क्योंकि मामला टूटने की कगार पर है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता के भाई, मां और अब पिता सहित तीनों आरोपियों को जमानत दे दी गई है, और सभी आदेश एक ही न्यायाधीश ने पारित किए हैं।

"पिता के बारे में सोचो, मां को छोड़ दो, वह पहले से ही 4 साल से जेल में है।" सीजेआई ने कहा।

वरिष्ठ वकील जयसिंह ने जवाब दिया कि यह एक ऐसा परिवार है, जिसकी मुखिया महिला है। उन्होंने कहा कि यह जानते हुए कि दूसरी तरफ एक महिला है, वह खुद आवेदन पर बहस नहीं करतीं अगर उन्हें यकीन नहीं होता कि याचिकाकर्ता को मारने का दृढ़ संकल्प है और उसकी जान को खतरा है।

सीजेआई ने कहा, इसलिए हमने भाई की जमानत रद्द कर दी, हम पिता पर भी विचार करेंगे। कुछ हफ्ते पहले सुप्रीम कोर्ट ने मामले में याचिकाकर्ता के भाई को मिली जमानत रद्द कर दी थी।

वरिष्ठ वकील जयसिंह ने अदालत को सूचित किया कि इसमें एक साजिश का आरोप शामिल है, मंशा और साजिश दोनों थी और जब शार्पशूटर ने याचिकाकर्ता के पति पर गोली चलाई तो मां अपराध स्थल पर मौजूद थी।

मौजूदा याचिका एक 29 वर्षीय महिला ने दायर की है, जो मृतक की पत्नी है। याचिका में राजस्थान उच्च न्यायालय के 09.07.2021 को पारित एक आदेश को चुनौती दी गई थी। आदेश में आरोपी को, जो कि याचिकाकर्ता की मां है, उसे जमानत दी गई थी।

याचिकाकर्ता ने कहा है कि सु्प्रीम कोर्ट ने 12 जुलाई को एक अन्य आरोपी, उसके भाई मुकेश चौधरी की जमानत को इस आधार पर रद्द कर दिया था कि परिस्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है और ट्रायल कोर्ट को मुकदमे को निपटाने का निर्देश दिया था।

सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया गया कि याचिकाकर्ता की आरोपी मां को जमानत दे दी गई है, जबकि पीठ 9 जुलाई को याचिकाकर्ता के आरोपी भाई की जमानत रद्द करने पर सुनवाई कर रही थी।

याचिका का विवरण

याचिका के अनुसार, याचिकाकर्ता 6 महीने की गर्भवती थी, जब उसके पति अमित को उसके सामने दिनदहाड़े गोली मार दी गई थी और उसकी हत्या की पूरी साजिश उसके माता-पिता और उसके भाई ने अन्य सह-साजिशकर्ताओं के साथ रची थी।

यह कहा गया है कि याचिकाकर्ता की मां और उसके पिता ने उससे पहले वर्ष 2016 में उसकी इच्छा के विरुद्ध जबरदस्ती अपने बच्चे का गर्भपात कराने के लिए दबाव डाला था ताकि उसकी अपनी ही जाति और समुदाय के किसी अन्य व्यक्ति से दोबारा शादी की जा सके। इसके अलावा, मां याचिकाकर्ता को जाति के बाहर शादी करने के कारण जान से मारने की धमकी दे रही थी।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि उसकी मां की जमानत याचिका पहले दो मौकों पर उच्च न्यायालय ने खारिज की थी। पहली जमानत अर्जी 2017 में विशिष्ट आरोपों का हवाला देते हुए खारिज कर दी गई थी और दूसरी जमानत अर्जी 2020 में खारिज कर दी गई थी क्योंकि जमानत देने के लिए कोई आधार नहीं बनाया गया था और पहली जमानत अर्जी को गुण-दोष के आधार पर खारिज कर दिया गया था।

इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने कहा है कि जमानत देने में उच्च न्यायालय द्वारा विचार किया गया एकमात्र आधार यह था कि मुकदमे के पूरा होने में समय लग रहा था और सह-आरोपी मुकेश चौधरी (याचिकाकर्ता के भाई) की जमानत याचिका पर 01.12.2020 को जमानत दे दी गई थी। हालांकि, अब उनकी जमानत भी 12 जुलाई 2021 को शीर्ष अदालत ने रद्द कर दी है।

आरोपी भाई की जमानत रद्द

अपने भाई की याचिका को रद्द करने के लिए याचिकाकर्ता की याचिका पर सुनवाई के मौके पर, सीन‌ियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने मामले को एक महिला के पति की "ऑनर किलिंग का स्पष्ट मामला" कहा था, जिसने अपने परिवार की इच्छा के खिलाफ अंतरजातीय विवाह किया।.

इस मौके पर, CJI रमना ने आरोपी की ओर से पेश सीन‌ियर एडवोकेट बीके शुक्ला से कहा कि "ये क्या आदेश हैं? वे इंतजार क्यों नहीं कर सकते? आपका मुवक्किल मुकदमे से पहले जेल से बाहर आना चाहता है, ऐसा उचित नहीं है...उन्हें ट्रायल पूरा होने तक इंतजार करना चाहिए था।"

राजस्थान राज्य की ओर से पेश अधिवक्ता एचडी थानवी ने कहा कि आरोपी को दी गई जमानत रद्द कर दी जानी चाहिए क्योंकि उच्च न्यायालय द्वारा कारण बताए गए हैं।

मामले का शीर्षक: ममता नायर बनाम राजस्थान राज्य और अन्य

आदेश पढ़ने/डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें

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