जस्टिस जॉयमाल्य बागची का सवाल: 'पटाखों का धर्म से क्या लेना-देना?'
Shahadat
12 Oct 2026 1:56 PM IST

सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सोमवार को दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण से जुड़े एक स्वतः संज्ञान (suo motu) मामले की सुनवाई के दौरान धर्म और पटाखों के इस्तेमाल के बीच संबंध पर सवाल उठाया।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच त्योहारों के मौसम से पहले बढ़ते प्रदूषण की चिंताओं के बीच पटाखों की अनुमति के मुद्दे पर सुनवाई कर रही है।
जस्टिस बागची ने पूछा:
"पटाखों का धर्म से क्या लेना-देना है?"
इस मामले में एमिक्स क्यूरी (न्यायालय मित्र) सीनियर एडवोकेट अपराजिता सिंह ने जवाब दिया कि हर बार यह तर्क दिया जाता है कि पटाखे फोड़ना एक धार्मिक प्रथा है।
उन्होंने कहा,
"अगर देवताओं को पता चले कि उनके नाम पर बच्चे बीमार पड़ रहे हैं और तकलीफ झेल रहे हैं, तो वे बहुत दुखी होंगे।"
CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाएगी।
उन्होंने कहा,
"हम धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाएंगे। सबसे अच्छा तरीका यह है कि लोग खुद [आत्म-चिंतन] करें। आप उन्हें जागरूक करने के उपाय कर सकते हैं।"
सिंह ने कहा कि हालांकि यह आदर्श स्थिति है, लेकिन "दुर्भाग्य से, हर साल हम वही पुरानी कहानी दोहराते हुए देखते हैं।"
सुनवाई के दौरान, पटाखा व्यापारियों के एक संघ की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट जे. साई दीपक ने मौजूदा प्रतिबंध की ओर इशारा किया। CJI ने आदेश जारी करने में सावधानी बरतने पर जोर दिया और कहा कि सबसे अच्छा तरीका लोगों को समझदार बनाना और उन्हें जागरूक करना है—उन्हें यह बताना कि कौन से पटाखे हानिकारक हैं, केवल दीये जलाने की संस्कृति को बढ़ावा देना और लोगों को इसके लिए प्रेरित करना।
सिंह ने नियमों को लागू करने में विफलता का मुद्दा उठाया और कहा कि संबंधित पक्षों को "पूरी छूट" (carte blanche) मिली हुई है और "किसी को भी नियमों के पालन की परवाह नहीं है।"
CJI ने सुझाव दिया कि ऐसी जानकारी प्रकाशित की जाए जिसमें लोगों से कुछ खास घंटों के दौरान कम से कम पटाखे फोड़ने का अनुरोध किया जाए, यह सुनिश्चित किया जाए कि बाजार में केवल कुछ खास तरह के पटाखे ही उपलब्ध हों, और हानिकारक पटाखों की बिक्री पर रोक लगाई जाए।
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि दिल्ली के लिए दो दिनों तक तय समय के भीतर पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति दी गई। CJI ने पूछा कि अभी क्या समस्या है, और कहा कि प्रतिबंध लगाने वाले आदेशों को अक्सर जबरदस्ती थोपे जाने वाले आदेश के तौर पर देखा जाता है। काफ़ी समय होने की वजह से, उन्होंने कहा कि लोगों से अपील की जानी चाहिए कि वे अपनी मर्ज़ी से जश्न मनाएं, लेकिन पटाखे फोड़ने का समय तय कर दें।
जस्टिस बागची ने स्वास्थ्य को लेकर कोर्ट की चिंता ज़ाहिर की और पूछा कि अगर एक तय समय में कुछ मात्रा में पटाखे फोड़े जाएं, तो प्रदूषण का स्तर क्या होगा।
सिंह ने आग्रह किया कि इस मामले को 'एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन' (CAQM) के पास भेजा जाए और बच्चों, बीमारों व बुज़ुर्गों की सेहत पर पड़ने वाले असर पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि एक या दो घंटे की समय सीमा "सुनने में तो अच्छी लगती है" लेकिन इसे लागू नहीं किया जाता और न ही किया जाएगा।
बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर के लिए तय की। CJI ने फिर कहा कि कोर्ट धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाएगा और नागरिकों व सिविल सोसाइटी में जागरूकता ही सबसे अच्छा नतीजा होगा; साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि CAQM को सुझाव दिए जाएं।
Case : IN RE: CURBING AIR POLLUTION IN THE NATIONAL CAPITAL REGION - SOLID WASTE MANAGEMENT AND BURNING OF CROP RESIDUE AND FIRECRACKERS | SMW(C) No. 15/2026

