पश्चिम बंगाल में 8 कुलपति नियुक्तियों पर राज्य सरकार–राज्यपाल की सहमति, शेष मामलों को सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस ललित समिति पर छोड़ा
Praveen Mishra
22 Jan 2026 4:31 PM IST

पश्चिम बंगाल की विश्वविद्यालयों में कुलपतियों (Vice Chancellors) की नियुक्ति को लेकर लंबे समय से जारी गतिरोध के बीच गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच 8 और विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के नामों पर सहमति बन गई है।
चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ को यह जानकारी पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता तथा राज्यपाल की ओर से आर. वेंकटरमणि ने दी।
जिन विश्वविद्यालयों के लिए राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्यपाल के बीच सहमति बनी है, वे हैं— संस्कृत कॉलेज एवं विश्वविद्यालय, कूचबिहार पंचानन बर्मा विश्वविद्यालय, हरिचंद गुरिचंद विश्वविद्यालय, रायगंज विश्वविद्यालय, डायमंड हार्बर महिला विश्वविद्यालय, बाबा साहेब आंबेडकर शिक्षा विश्वविद्यालय, उत्तर बंग कृषि विश्वविद्यालाय और पश्चिम बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री को निर्देश दिया कि वे सहमति से तय किए गए उम्मीदवारों के नाम राज्यपाल को भेजें, ताकि राज्यपाल, जो विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी हैं, कुलपतियों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर सकें।
हालांकि, तीन विश्वविद्यालयों— उत्तर बंग विश्वविद्यालय, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और नेताजी सुभाष ओपन यूनिवर्सिटी— के संबंध में राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच सहमति नहीं बन पाई। इन विश्वविद्यालयों के लिए कोर्ट ने मामला दोबारा Search-cum-Selection Committee को सौंप दिया है, जिसकी अध्यक्षता पूर्व मुख्य न्यायाधीश यू. यू. ललित कर रहे हैं।
अदालत ने समिति से कहा है कि वह दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत सभी सामग्री पर विचार कर चार सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का प्रयास करे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समिति को यह स्वतंत्रता होगी कि वह मौजूदा उम्मीदवारों में से नया पैनल सुझाए या फिर आवश्यकता होने पर नई चयन प्रक्रिया शुरू करे।
गौरतलब है कि यह विवाद पश्चिम बंगाल के 36 विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति से जुड़ा है। राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच टकराव के कारण लंबे समय से नियुक्तियाँ रुकी हुई थीं। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और जस्टिस यू. यू. ललित की अध्यक्षता वाली समिति के गठन के बाद अब तक 25 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के नाम विभिन्न चरणों में तय किए जा चुके हैं।
ताज़ा सहमति के बाद 8 और विश्वविद्यालयों में नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है, जबकि शेष 3 विश्वविद्यालयों का मामला अब समिति के निर्णय पर निर्भर करेगा।

