पश्चिम बंगाल SIR : सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची से बाहर हुए चुनाव ड्यूटी अधिकारियों को अपीलीय न्यायाधिकरण जाने को कहा

Praveen Mishra

24 April 2026 1:00 PM IST

  • पश्चिम बंगाल SIR : सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची से बाहर हुए चुनाव ड्यूटी अधिकारियों को अपीलीय न्यायाधिकरण जाने को कहा

    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर दायर रिट याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया।

    चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं को अपीलीय न्यायाधिकरण का रुख करने को कहा, जो एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से बहिष्कार के खिलाफ अपीलें सुनने के लिए गठित किए गए हैं।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट एम.आर. शमशाद ने दलील दी कि 65 याचिकाकर्ता चुनाव ड्यूटी पर तैनात हैं और स्थिति विडंबनापूर्ण है क्योंकि जो व्यक्ति चुनाव करा रहा है, वही मतदान नहीं कर पा रहा है, जबकि उनके ड्यूटी आदेशों में दर्ज ईपीआईसी नंबर अब हटा दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बिना कारण बताओ नोटिस के नाम हटाना प्रथम दृष्टया मनमाना है।

    हालांकि, न्यायालय ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि याचिकाकर्ता पहले ही 5 अप्रैल को अपील दायर कर चुके हैं, इसलिए वे न्यायाधिकरण के समक्ष अपने उपायों का पालन करें। अदालत ने मामले का निस्तारण करते हुए उन्हें वहीं राहत पाने का निर्देश दिया।

    सुनवाई के बाद जस्टिस बागची ने टिप्पणी की कि चुनाव महत्वपूर्ण है, लेकिन मतदाता सूची में बने रहने का अधिकार अधिक मूल्यवान है और इस पर विचार किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान संपन्न हो चुका है, जबकि दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है।

    इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि जिन व्यक्तियों की अपील 21 या 27 अप्रैल तक स्वीकार हो जाती है, उन्हें संबंधित चरण में मतदान की अनुमति दी जाए, लेकिन केवल अपील लंबित होने से मतदान का अधिकार नहीं मिलेगा।

    रिपोर्टों के अनुसार, अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष लगभग 34 लाख अपीलें लंबित हैं, जिनमें से पहले चरण में 138 मामलों का निपटारा करते हुए 136 मतदाताओं के नाम पुनः शामिल किए गए।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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