पश्चिम बंगाल SIR: सुप्रीम कोर्ट ने अपीलीय ट्रिब्यूनल से कहा - आधार और पासपोर्ट होने का दावा करने वाले व्यक्ति की सुनवाई प्राथमिकता से करें
Shahadat
20 April 2026 8:36 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में गठित अपीलीय ट्रिब्यूनल से अनुरोध किया कि वह महिला को प्राथमिकता के आधार पर (out-of-turn) सुनवाई का मौका दे। इस महिला का नाम 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से हटा दिया गया।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट शदान फरासात की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया।
एक न्यायिक अधिकारी द्वारा 27 मार्च को याचिकाकर्ता के खिलाफ पारित अस्वीकृति आदेश को चुनौती देते हुए सीनियर वकील ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता के पास पासपोर्ट है, उसका नाम 2002 की मतदाता सूची में शामिल था, और वह तब से लगातार वोट डाल रही है। फरासात ने यह भी दलील दी कि याचिकाकर्ता केवल एक सीमित राहत चाहती है - प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई का मौका - क्योंकि मतदाता सूची 27 अप्रैल को बंद हो जाएगी।
CJI ने जब पूछा कि क्या याचिकाकर्ता ने ट्रिब्यूनल से संपर्क किया तो फरासात ने जवाब दिया,
"हां, मैंने 3 अप्रैल को अर्जी दाखिल की थी... लेकिन दुर्भाग्य से, मुझे अभी तक सुनवाई का मौका नहीं मिला है। मैं बस इतनी ही छूट (प्राथमिकता से सुनवाई) चाहता हूं। फिर मैं संबंधित मंच (ट्रिब्यूनल) के समक्ष अपनी बात रखूंगा।"
इसके आधार पर बेंच ने निम्नलिखित आदेश पारित किया:
"याचिकाकर्ता ने SIR प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से अपना नाम हटाए जाने से व्यथित होकर 3 अप्रैल को ही अपीलीय ट्रिब्यूनल से संपर्क कर लिया था। हम अपीलीय ट्रिब्यूनल से अनुरोध करते हैं कि वे याचिकाकर्ता की अपील पर जल्द से जल्द प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करें।"
इससे पहले 13 अप्रैल को कोर्ट ने एक अन्य याचिकाकर्ता को भी अपीलीय ट्रिब्यूनल के समक्ष प्राथमिकता से सुनवाई का अनुरोध करने का अवसर प्रदान किया। इसी तरह की राहत की मांग करते हुए वर्तमान याचिकाकर्ता ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
Case Title: MONOWARA KHATUN Versus THE ELECTION COMMISSION OF INDIA AND ORS., W.P.(C) No. 496/2026

