UP SIR: ECI का जवाब- बड़ी संख्या में जमा किए गए 'फॉर्म 7' फर्जी, सुप्रीम कोर्ट ने सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया
Shahadat
30 Oct 2026 3:47 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से कहा कि वह उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (Special Intensive Revision - SIR) के दौरान बड़ी संख्या में 'फॉर्म 7' जमा किए जाने के आरोपों पर सुधारात्मक कदम उठाए।
'फॉर्म 7' का इस्तेमाल तब किया जाता है, जब कोई व्यक्ति मतदाता सूची के ड्राफ्ट में शामिल किसी मतदाता का नाम हटवाना चाहता है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ उत्तर प्रदेश में SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं के संबंध में दायर आवेदन पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया (लोकसभा) और समाजवादी पार्टी के नेता अरविंद कुमार सिंह शामिल हैं।
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि 5 अगस्त को ECI को 2 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया। ECI की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट दामा शेषद्रि नायडू ने बताया कि एक जवाबी हलफनामा (Counter-Affidavit) दाखिल कर दिया गया। उन्होंने कहा कि आरोपों की जांच करने पर पता चला कि ये फॉर्म फर्जी थे और इन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
नायडू ने कहा,
"इस मामले को देख लिया गया। हमने पाया कि बड़ी संख्या में 'फॉर्म 7' जमा किए गए। हमारे अधिकारियों ने जाकर जांच की और दोबारा पुष्टि की। ये फॉर्म फर्जी थे और हमने इन पर कोई कार्रवाई नहीं की।"
याचिकाकर्ता के वकील ने न्यायिक जांच की मांग की और ECI के इस दावे को चुनौती दी कि इनमें से कोई भी फर्जी 'फॉर्म 7' "स्वीकार" नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि निर्वाचन क्षेत्र में एक विशेष समुदाय के खिलाफ 32 'फॉर्म 7' जमा किए गए, जिनमें से 2 पर BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) के हस्ताक्षर थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि चूंकि UP SIR के दौरान कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, इसलिए संबंधित अधिकारियों का हौसला बढ़ गया। उन्होंने कहा कि ऐसी ही स्थिति कर्नाटक और तेलंगाना में भी देखने को मिली थी (जहां CEO ने बड़ी संख्या में 'फॉर्म 7' जमा किए जाने के मामले में FIR दर्ज करने का निर्देश दिया)।
अंत में CJI ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि वे ECI को उन सभी मुद्दों का विवरण दें जो अभी भी लंबित हैं। कोर्ट ने कहा कि जैसे ही ये विवरण मिलते हैं, ECI तथ्यों की जांच करेगा, जरूरी सुधारात्मक कदम उठाएगा और अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) दाखिल करेगा।
अदालत ने आदेश दिया,
"याचिकाकर्ता के वकील का कहना है कि याचिकाकर्ता के ध्यान में कुछ और अनियमितताएं आई हैं। वे इस बारे में एक नोट ECI के वरिष्ठ वकील को सौंप देंगे। इसे मिलने के बाद ECI तथ्यों की जांच करे, जरूरी सुधार करे और एक अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) दाखिल करे।"
केरल और छत्तीसगढ़ में SIR (विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया) को चुनौती देने वाली याचिकाओं के संबंध में नायडू ने कहा कि SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और ये मामले अब बेमानी (Infructuous) हो गए हैं। केरल में SIR के मामले में, एक वकील ने समय बढ़ाने की मांग की और कहा कि सत्यापन (Verification) की अवधि आज खत्म हो रही है।
शुरुआत में, CJI ने नायडू से कहा कि समय कुछ दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता है, क्योंकि कोई जल्दबाजी नहीं है। हालांकि, नायडू ने जवाब दिया कि अगर कोई आवेदन (Representation) आता तो ECI उस पर विचार कर सकता था, लेकिन ऐसा कोई आवेदन नहीं आया। उन्होंने यह भी बताया कि केरल में SIR के बाद चुनाव भी हो चुके हैं।
वकील ने जवाब दिया,
"इस सत्यापन प्रक्रिया से 24 लाख लोग बाहर रह गए।"
इस पर CJI ने कहा कि ECI की तरफ से प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन अगर गलती से कोई छूट गया है, तो उसे शामिल करने की प्रक्रिया जारी रह सकती है।
CJI ने कहा,
"आप पता लगाएं कि ऐसे कौन से लोग हैं जिन्हें अभी भी मौका दिया जा सकता है, और एक आवेदन के जरिए ECI के ध्यान में लाएं। हम उनसे इस पर विचार करने के लिए कहेंगे।"
नायडू ने बताया कि यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव भी संपन्न हो चुके हैं।
आदेश में दर्ज किया गया:
"केरल में [SIR] प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील का कहना है कि कई लोग ऐसे हैं जो समय की कमी के कारण अपना फॉर्म जमा नहीं कर पाए। याचिकाकर्ता ऐसे लोगों का विवरण ECI को सौंपे; ECI इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगा और इस अदालत में एक रिपोर्ट पेश करेगा।"
बाद में CJI ने टिप्पणी की कि समय बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि यह (मतदाता सूची में सुधार) एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।
छत्तीसगढ़ में SIR के मामले में यह बताया गया कि दिसंबर में नोटिस जारी होने के बावजूद ECI ने कोई जवाब (Counter-Affidavit) दाखिल नहीं किया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने तर्क दिया कि ECI केवल इसलिए मामले को बेमानी (Infructuous) नहीं मान सकता कि प्रक्रिया पूरी हो गई।
उन्होंने कहा,
"हम एक नोट भी जमा कर रहे हैं; बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं। उन्हें एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने दें।"
अदालत ने ECI को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के साथ-साथ याचिकाकर्ता के नोट का जवाब देने के लिए 4 सप्ताह का समय दिया।
Case Title : TANUJ PUNIA Versus ELECTION COMMISSION OF INDIA AND ORS. (and connected case)

