बिना दावे वाले मोटर दुर्घटना और लेबर मुआवज़े के मामले: डैशबोर्ड बनाने में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को जारी किया नोटिस

Shahadat

16 Sept 2026 4:12 PM IST

  • बिना दावे वाले मोटर दुर्घटना और लेबर मुआवज़े के मामले: डैशबोर्ड बनाने में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को जारी किया नोटिस

    सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग और श्रम एवं उद्योग विभाग के सचिवों को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने मोटर दुर्घटना के दावों और लेबर कोर्ट के मामलों में जमा मुआवज़े की रकम के बारे में लाइव अपडेट दिखाने वाला डैशबोर्ड बनाने के निर्देशों का असरदार तरीके से पालन करने को कहा।

    बता दें, अप्रैल 2025 में जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने कई निर्देश जारी किए थे। यह कदम एक रिटायर्ड ज़िला जज बीबी पाठक के कोर्ट को लिखे पत्र के बाद उठाया गया था, जिसमें उन्होंने चिंता जताई थी कि कोर्ट के पास मुआवज़े की भारी रकम बिना दावे के पड़ी है।

    कोर्ट ने निर्देश दिया था कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 या कर्मचारी मुआवज़ा अधिनियम, 1923 के तहत दावेदारों को दिया जाने वाला मुआवज़ा सीधे उनके बैंक खातों में जमा किया जाए। निर्देशों में से एक यह भी था कि हाईकोर्ट, राज्य सरकारों की मदद से एक डैशबोर्ड बनाएं, जिस पर मुआवज़े के तौर पर जमा रकम की जानकारी हो और उसे नियमित रूप से अपडेट किया जाए।

    पिछली सुनवाई में एमिक्स क्यूरी सीनियर एडवोकेट मीनाक्षी अरोड़ा ने बताया कि इलाहाबाद, मद्रास, मेघालय, दिल्ली और तेलंगाना हाई कोर्ट ने अभी तक डैशबोर्ड नहीं बनाया है। कोर्ट ने हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। इसके बाद आज की सुनवाई में उन्होंने बताया कि इलाहाबाद और मद्रास हाईकोर्ट को छोड़कर बाकी सभी ने अब अनुपालन (Compliance) का हलफनामा दाखिल कर दिया।

    उन्होंने बताया कि मद्रास हाईकोर्ट की तरफ से हुई देरी जायज़ है, क्योंकि उन्होंने डैशबोर्ड तो बना लिया है, लेकिन अभी उसका सिक्योरिटी ऑडिट करने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मद्रास हाई कोर्ट असल में सिक्योरिटी ऑडिट करने वाला पहला हाईकोर्ट है।

    इसके बाद अरोड़ा ने अनुरोध किया कि चूंकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अभी तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल नहीं की, इसलिए उन्हें एक ज़रूरी पक्ष (Necessary Party) के तौर पर शामिल किया जाए।

    इसके आधार पर जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस एएस चंदुरकर की बेंच ने आदेश दिया:

    "हमने वकील मीनाक्षी अरोड़ा (जो एमिक्स क्यूरी भी हैं और जिनकी मदद सुश्री विशाखा कर रही हैं) की बात सुनी। 28.7.2026 को हमने कुछ आदेश दिए। पता चला है कि दिल्ली, मेघालय और तेलंगाना के हाईकोर्ट ने 18.8.2025 के आदेश के निर्देशों का पालन करते हुए ऐसे डैशबोर्ड उपलब्ध कराए हैं, जो बिना दावे वाली रकम का लाइव स्टेटस दिखाते हैं।

    मद्रास हाईकोर्ट ने एक हलफनामा दाखिल किया, जिसमें बताया गया कि हलफनामे का पैराग्राफ 4 इस प्रकार है...

    जहां तक ​​इलाहाबाद हाईकोर्ट का सवाल है, रजिस्ट्रार जनरल ने 15.09.2026 को हलफनामा दाखिल किया, जिसमें उठाए गए कदमों का विवरण दिया गया; मामला राज्य सरकार के पास है और हाईकोर्ट सरकार के साथ इसे प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ा रहा है। देरी का कारण हलफनामे के पैराग्राफ 12 में बताया गया। इन हालात में हमें लगता है कि उत्तर प्रदेश राज्य (जिसका प्रतिनिधित्व परिवहन सचिव करेंगे) को एक पक्ष के रूप में जोड़ा जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि 18.8.25 के आदेश के क्लॉज़ 'g' में दिए गए निर्देशों का पालन हो। इसलिए हम परिवहन सचिव और श्रम एवं उद्योग विभाग के सचिव के माध्यम से उत्तर प्रदेश राज्य को आवश्यक पक्ष के रूप में जोड़ते हैं। सचिवों को नोटिस भेजा जाए। मामले को 28.10.26 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।"

    Case Details: IN RE COMPENSATION AMOUNTS DEPOSITED WITH MOTOR ACCIDENT CLAIMS TRIBUNALS AND LABOUR COURTS |SMW(C) No. 7/2024

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