UGC Regulations | क्या PhD में बिताया गया समय एसोसिएट प्रोफेसर के पद के लिए 'शिक्षण अनुभव' माना जाएगा? सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

  • UGC Regulations | क्या PhD में बिताया गया समय एसोसिएट प्रोफेसर के पद के लिए शिक्षण अनुभव माना जाएगा? सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

    सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इस मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रखा कि क्या यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नियमों के अनुसार, PhD करने में बिताए गए समय को एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति के लिए 'शिक्षण अनुभव' के रूप में गिना जा सकता है या नहीं।

    जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने UGC और प्रोफेसर जोसेफ स्कारिया द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई की।

    इन याचिकाओं में केरल हाईकोर्ट के 2023 के उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसमें कन्नूर यूनिवर्सिटी में प्रिया वर्गीस की नियुक्ति को सही ठहराया गया था। प्रिया वर्गीस, CPI(M) नेता के.के. रागेश की पत्नी हैं, जो तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के निजी सचिव थे।

    यह मामला तब सामने आया, जब रैंक लिस्ट में वर्गीस के बाद आने वाले डॉ. जोसेफ स्कारिया ने एक रिट याचिका दायर की। उन्होंने लिस्ट में वर्गीस के शामिल होने को चुनौती देते हुए कहा कि वह एसोसिएट प्रोफेसर के पद के लिए योग्य नहीं हैं, क्योंकि उनके पास तय 8 साल का शिक्षण अनुभव नहीं है।

    केरल हाईकोर्ट के सिंगल जज ने पाया कि वर्गीस के पास जरूरी शिक्षण अनुभव नहीं है और उन्होंने कन्नूर यूनिवर्सिटी को उनके दस्तावेजों की फिर से जांच करने का निर्देश दिया।

    वर्गीस ने इस फैसले को डिवीजन बेंच के सामने चुनौती दी, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। इसके खिलाफ, असंतुष्ट उम्मीदवार और UGC ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।

    Case Title : UNIVERSITY GRANTS COMMISSION V. PRIYA VARGHESE,

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