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तृणमूल कांग्रेस का त्रिपुरा में सुरक्षा की स्थिति 'बिगड़ने' का आरोप; अवमानना याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network
22 Nov 2021 7:16 AM GMT
तृणमूल कांग्रेस का त्रिपुरा में सुरक्षा की स्थिति बिगड़ने का आरोप; अवमानना याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट सोमवार को त्रिपुरा में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के बारे में उठाई गई सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के आवेदन पर मंगलवार को एक अवमानना ​​​​याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया।

सुप्रीम कोर्ट ने 11 नवंबर को तृणमूल कांग्रेस द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि यह सुनिश्चित करना त्रिपुरा पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि किसी भी राजनीतिक दल को शांतिपूर्ण तरीके से राजनीतिक प्रचार के लिए कानून के अनुसार अपने अधिकारों का प्रयोग करने से रोका न जाए।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अधिवक्ता अमर दवे ने उल्लेख किया,

"हमने पहले त्रिपुरा चुनाव के संबंध में एक रिट याचिका दायर की थी। माई लॉर्डशिप ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए निर्देश पारित किए थे। लेकिन स्थिति बिगड़ती जा रही है। हाल ही में कई घटनाएं हुई हैं। वे अब राज्य भर में हो रही हैं। जो कुछ हुआ है, उसे देखते हुए हमने एक नई अवमानना ​​​​याचिका दायर की है। हम माई लॉर्डशिप से निवेदन करते हैं कि कृपया इसे तत्काल सुना जाए।"

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने जब कहा कि चुनाव 25 नवंबर को होने हैं तो अधिवक्ता ने आग्रह किया,

"स्थिति बहुत अस्थिर है। इसके लिए न्यायालय के विचार की आवश्यकता है। हर दिन ये घटनाएं हो रही हैं और बढ़ रही हैं।"

जस्टिस चंद्रचूड़ मंगलवार को मामले की सुनवाई के लिए तैयार हो गए।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली एक अन्य पीठ ने 11 नवंबर को अपने आदेश में कहा था,

"हम उम्मीद करते हैं कि राज्य की कानून प्रवर्तन मशीनरी के साथ सरकार और डीजीपी द्वारा आवश्यक व्यवस्था की जाएगी।"

आदेश में कहा गया,

"हमारा मानना ​​है कि चूंकि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई है इसलिए यह सुनिश्चित करना प्रतिवादियों की जिम्मेदारी है कि किसी भी राजनीतिक दल को शांतिपूर्ण तरीके से राजनीतिक प्रचार के लिए कानून के अनुसार अपने अधिकारों का प्रयोग करने से नहीं रोका जाए।"

पीठ ने एक अंतरिम आदेश पारित किया। इसमें त्रिपुरा पुलिस अधिकारियों को याचिका में उल्लेख किए गए खतरों की प्रकृति पर विचार करने का निर्देश दिया गया ताकि कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए उचित व्यवस्था की जा सके।

व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए याचिका के संबंध में संबंधित पुलिस अधीक्षक प्रत्येक मामले और क्षेत्र के संबंध में खतरे की धारणा के संबंध में निर्णय लेंगे और आवश्यकतानुसार सुरक्षा के संबंध में उचित कार्रवाई करेंगे।

न्यायालय ने त्रिपुरा के गृह सचिव द्वारा एक हलफनामा भी मांगा। इसमें त्रिपुरा में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष रहने के लिए वर्तमान आदेश के अनुसरण में उठाए गए कदमों के बारे में बताया गया। कोर्ट ने डीजीपी और गृह सचिव को अनुपालन की संयुक्त रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। दो हफ्ते बाद मामले की सुनवाई होगी।

याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने किया। त्रिपुरा राज्य की ओर से कोई उपस्थिति नहीं हुआ। याचिकाकर्ताओं के वकील ने पीठ को बताया कि त्रिपुरा सरकार के वकील को याचिका की एक कॉपी दी गई है।

पीठ ने शुरू में याचिकाकर्ताओं के वकील से पूछा कि हाईकोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया गया। वकील ने जवाब दिया कि हाईकोर्ट में सूचीबद्ध मामले को नहीं लिया गया और इसे अगले सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया गया।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ताओं ने उनके खिलाफ कथित तौर पर हुई हिंसा की घटनाओं को सारांशित किया है। याचिका 22 अक्टूबर, 2021 को हुई हिंसा की एक घटना का उल्लेख करती है, जब तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं का एक दल सार्वजनिक संपर्क अभियान चला रहा था। हालांकि इस घटना को लेकर एक एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।

परिणाम के रूप में यह प्रस्तुत किया गया कि हालांकि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई है, तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों को धमकी वाली हिंसा के परिणामस्वरूप चुनावी अभियान के अधिकार से रोका जा रहा है।

अदालत ने याचिकाकर्ताओं द्वारा पेश किए गए एक दस्तावेज पर भी ध्यान दिया। इसने उन्हें अगरतला शहर में एक बैठक आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।

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