तरुण तेजपाल ने 2013 के रेप केस में दोषी ठहराए जाने को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
Shahadat
20 Aug 2026 1:51 PM IST

'तहलका' के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। उन्होंने 2013 के रेप केस में बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उन्हें दोषी ठहराते हुए 10 साल की कठोर सज़ा सुनाई गई।
यह कदम गोवा सरकार द्वारा सज़ा को बढ़ाकर उम्रकैद करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने के कुछ दिनों बाद उठाया गया है, हालांकि सरकार ने दोषी ठहराए जाने के फैसले को चुनौती नहीं दी थी।
बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच (जिसमें जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसंडेकर शामिल थे) ने 6 अगस्त को ट्रायल कोर्ट द्वारा तेजपाल को बरी किए जाने के फैसले को पलट दिया और उन्हें 2013 के मामले में दोषी ठहराया था। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें 10 साल की कठोर सज़ा सुनाई।
हाईकोर्ट ने गौर किया कि घटना 13 साल पहले हुई थी और उसके बाद तेजपाल के किसी भी आपराधिक दुर्व्यवहार की कोई रिपोर्ट नहीं मिली। नतीजतन, कोर्ट ने गोवा सरकार की उम्रकैद की अधिकतम सज़ा की मांग को ठुकरा दिया और रेप के लिए दोषी ठहराए जाने पर तय न्यूनतम सज़ा सुनाई।
यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है, जिनमें कहा गया कि नवंबर 2013 में 'तहलका' द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान गोवा के एक लग्ज़री होटल में तेजपाल ने एक जूनियर महिला सहकर्मी का यौन उत्पीड़न किया। गोवा सेशंस कोर्ट ने 2021 में उन्हें बरी कर दिया था, जिसके बाद राज्य सरकार ने बरी किए जाने के फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने तेजपाल को रेप, यौन उत्पीड़न और कपड़े उतारने की नीयत से हमला करने से संबंधित भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत दोषी ठहराया। रेप की जिस धारा के तहत उन्हें दोषी ठहराया गया, उसमें न्यूनतम 10 साल की सज़ा का प्रावधान है और इसमें उम्रकैद तक की सज़ा हो सकती है।


