'कोर्ट को गुमराह किया': सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन समय रैना पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
Shahadat
14 July 2026 5:06 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कॉमेडियन समय रैना पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने कहा कि उन्होंने 'इंडियाज़ गॉट लेटेंट' (India's Got Latent) विवाद के दौरान विकलांग लोगों का मज़ाक उड़ाने वाले असंवेदनशील जोक्स के मामले में दिए गए वादों को पूरा न करके "कोर्ट को गुमराह किया"।
कोर्ट ने चार अन्य कॉमेडियन विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर और निशांत जगदीश तंवर - पर भी इतना ही जुर्माना लगाया।
इससे पहले, कोर्ट ने उनका यह वादा स्वीकार किया कि वे अपने असंवेदनशील जोक्स के लिए सुधार करेंगे। इसके लिए वे विकलांग लोगों की उपलब्धियों को दिखाने और दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए फंड जुटाने के मकसद से खास शो करेंगे।
रैना के व्यवहार पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा:
"हमें इसमें कोई शक नहीं है कि समय रैना ने कोर्ट को गुमराह किया। उन्होंने इस कोर्ट के सामने दिए गए बयानों/वादों का खुलेआम उल्लंघन किया।"
बेंच ने यह भी कहा कि रैना ने देरी को सही ठहराने की कोशिश करते हुए दावा किया कि अनुपालन हलफनामा (compliance affidavit) दाखिल कर दिया गया, जबकि रिकॉर्ड में ऐसा कोई हलफनामा नहीं था।
कोर्ट ने कहा,
"यह गलत व्यवहार और बढ़ गया, क्योंकि यह कहा गया कि कल अनुपालन हलफनामा दाखिल किया गया, जबकि असल में कोई हलफनामा दाखिल नहीं किया गया।"
कोर्ट ने रैना को दो हफ़्ते के अंदर 3 लाख रुपये जुर्माना जमा करने और अनुपालन हलफनामा दाखिल करने के लिए 15 दिन का समय दिया। साथ ही चेतावनी दी कि अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो सख़्त कार्रवाई की जाएगी।
सुनवाई के दौरान, सीनियर एडवोकेट अपराजिता सिंह ने कहा कि कोर्ट के पिछले निर्देशों के बावजूद, रैना ने न तो 'क्योर SMA फाउंडेशन' (Cure SMA Foundation) से संपर्क किया और न ही स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) से पीड़ित लोगों से।
सीनियर वकील ने कहा कि कॉमेडियन का रवैया कोर्ट के आदेश के प्रति उनकी अनदेखी को दिखाता है। उन्होंने यह भी कहा कि फाउंडेशन उनसे (या अन्य कॉमेडियन से) एक पैसा भी नहीं लेना चाहता।
सिंह ने कहा,
"मुझे नहीं पता कि वह युवाओं के लिए किस तरह के आइकन हैं... यह सोचकर ही मुझे सिहरन होती है कि युवा उन्हें आइकन मानते हैं।"
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दिया, "हमारे युवाओं के पास बेहतर आदर्श (icons) हैं..." चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की कि वे "खुद-ब-खुद बने आदर्श" हैं।
एसजी ने रैना के एक नए शो (इंडियाज़ गॉट लेटेंट सीज़न 2) के बारे में भी बताया, जिसकी शुरुआत उन्होंने "नींबू-मिर्च" टांगकर की थी (ज़ाहिर है, बुरी नज़र से बचाने के लिए)।
SG ने कहा,
"हाल ही में, उन्होंने एक नया शो शुरू किया। उन्होंने कहा कि अब शुरुआत में मैं कुछ ऐसा कर रहा हूँ, जो मैंने पिछली सीरीज़ में नहीं किया। वह नींबू और मिर्च टांगते हैं। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन यह साफ़ दिख रहा था। मैं इस मामले में पड़ना नहीं चाहता, लेकिन अगर उन्होंने (समय रैना) SMA फ़ाउंडेशन या SMA से पीड़ित लोगों से संपर्क नहीं किया..."
उन्होंने कॉमेडियन के हलफ़नामों में "विकलांग व्यक्ति" (disabled persons) शब्द के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई और कहा कि सही शब्द "विशेष रूप से सक्षम व्यक्ति" (specially abled persons) है।
दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने शुरू में 10 लाख रुपये का जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया। हालाँकि, बाद में सभी कॉमेडियन पर एक समान 3 लाख रुपये (5 लाख से घटाकर) का जुर्माना लगाया गया।
सार्वजनिक व्यवहार पर कड़ी मौखिक टिप्पणी करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा,
"सार्वजनिक जीवन में आप दूसरों का जितना सम्मान करते हैं, उतना ही सम्मान पाते हैं। आप लोगों को अपमानित नहीं करते।"
जब कॉमेडियन के वकील ने कहा कि SMA फ़ाउंडेशन से संपर्क न करना अहंकार की वजह से नहीं था और कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वे अपने क्लाइंट्स को नियमों का पालन करने के लिए कहेंगे तो चीफ जस्टिस ने जवाब दिया:
"आज का आदेश प्रतिवादियों (Respondents) ने खुद बुलाया है। हम छूट देते रहे हैं। हमने सोचा था कि आप सम्मानित परिवारों से आने वाले युवा हैं।"
रैना के व्यवहार का ज़िक्र करते हुए CJI ने आगे कहा:
"उन्हें लगता है कि देश के बाहर बैठकर वे अधिकार क्षेत्र (jurisdiction) से बाहर हैं। अब उन्हें भुगतने दें। अगर यह अहंकार नहीं है तो हमें ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी भी बदलनी होगी।"
Case : M/S. CURE SMA FOUNDATION OF INDIA Versus UNION OF INDIA AND ORS., W.P.(C) No. 460/2025


