महिला की इच्छा सर्वोपरि; गोद देने का विकल्प बताकर अवांछित गर्भ जारी रखने को मजबूर नहीं कर सकते : सुप्रीम कोर्ट

Praveen Mishra

24 April 2026 12:49 PM IST

  • महिला की इच्छा सर्वोपरि; गोद देने का विकल्प बताकर अवांछित गर्भ जारी रखने को मजबूर नहीं कर सकते : सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि किसी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भावस्था जारी रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, केवल इस आधार पर कि जन्म के बाद बच्चे को गोद दिया जा सकता है।

    जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने 15 वर्षीय नाबालिग, जो सात महीने से अधिक गर्भवती थी, को मेडिकल टर्मिनेशन की अनुमति देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में प्राथमिकता गर्भवती महिला की इच्छा को दी जानी चाहिए, न कि उस अजन्मे बच्चे के हितों को।

    न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अवांछित गर्भावस्था को जबरन जारी रखने के लिए कहना महिला के मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है तथा यह उसके गरिमा के साथ जीने के अधिकार का उल्लंघन होगा।

    सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि गर्भावस्था के उन्नत चरण में गर्भसमापन से मां और बच्चे दोनों के जीवन को खतरा हो सकता है तथा बच्चे को Central Adoption Resource Authority (सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी) के माध्यम से गोद दिया जा सकता है।

    हालांकि, न्यायालय ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि गोद लेने की संभावना को महिला को गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि विशेष रूप से नाबालिग के मामलों में, उसकी स्पष्ट इच्छा के विरुद्ध गर्भावस्था जारी रखने के लिए बाध्य करना गंभीर मानसिक आघात का कारण बन सकता है और उसे असुरक्षित तथा अवैध गर्भपात की ओर धकेल सकता है।

    खंडपीठ ने कहा कि प्रजनन स्वायत्तता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है, और संवैधानिक न्यायालयों का दायित्व है कि वे ऐसे मामलों में महिला के दृष्टिकोण से तथ्यों का मूल्यांकन करें, विशेषकर तब जब वैधानिक अवधि समाप्त हो चुकी हो।

    न्यायालय ने पाया कि संबंधित नाबालिग गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रही थी और उसने गर्भावस्था जारी रखने की अनिच्छा स्पष्ट रूप से व्यक्त की थी। इन परिस्थितियों में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी आवश्यक चिकित्सीय सावधानियों के साथ नई दिल्ली स्थित All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) में गर्भसमापन की प्रक्रिया कराई जाए।

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