30% महिला प्रतिनिधित्व लागू नहीं करने पर बार एसोसिएशन सस्पेंड होंगे: सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी

Praveen Mishra

21 April 2026 6:14 PM IST

  • 30% महिला प्रतिनिधित्व लागू नहीं करने पर बार एसोसिएशन सस्पेंड होंगे: सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी

    सुप्रीम कोर्ट ने बार एसोसिएशनों में महिलाओं को 30% प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के अपने निर्देशों का पालन न करने पर कड़ी चेतावनी दी है। अदालत ने कहा कि आदेश की अवहेलना करने वाली बार एसोसिएशनों को सस्पेंड किया जा सकता है और वहां नए चुनाव कराए जाएंगे।

    चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने यह टिप्पणी विशेष अनुमति याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की, जिनमें देशभर की बार एसोसिएशनों में महिलाओं के लिए 30% पद सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

    अदालत ने कहा कि 13 मार्च 2026 के अपने पहले के आदेश का कुछ बार एसोसिएशनों द्वारा पालन नहीं किया गया है। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में न्यायिक आदेश के जरिए संबंधित एसोसिएशनों को निलंबित किया जा सकता है और नए सिरे से चुनाव कराए जाएंगे।

    कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट्स के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वे इस आदेश को सभी बार एसोसिएशनों तक पहुंचाएं और यह रिपोर्ट दाखिल करें कि किन-किन एसोसिएशनों ने अब तक इसका पालन नहीं किया है।

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि चुनाव के माध्यम से 30% महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित नहीं हो पाता है, तो कमी को नामांकन के जरिए पूरा किया जाएगा। यह नामांकन संबंधित हाईकोर्ट के पोर्टफोलियो जज द्वारा जिला एवं सत्र न्यायाधीश, निर्वाचित पदाधिकारियों और बार एसोसिएशन की वरिष्ठ महिला वकीलों से परामर्श के बाद किया जाएगा।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि नामांकित महिला सदस्यों का कार्यकाल निर्वाचित सदस्यों के समान होगा।

    मामले की अगली सुनवाई 12 मई 2026 को निर्धारित की गई है।

    सुप्रीम कोर्ट ने 2024 से लगातार अपने आदेशों के जरिए बार काउंसिल और बार एसोसिएशनों में महिलाओं के लिए 30% प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने पर जोर दिया है, जिसे अब सख्ती से लागू करने के संकेत दिए गए हैं।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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