पश्चिम बंगाल SIR: मतदाता सूची से नाम हटाने के खिलाफ अपील सुनने के लिए पूर्व हाईकोर्ट जजों के ट्रिब्यूनल बनाने का सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

Praveen Mishra

10 March 2026 5:02 PM IST

  • पश्चिम बंगाल SIR: मतदाता सूची से नाम हटाने के खिलाफ अपील सुनने के लिए पूर्व हाईकोर्ट जजों के ट्रिब्यूनल बनाने का सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निर्देश दिया कि पश्चिम बंगाल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील सुनने के लिए अपीलीय ट्रिब्यूनल गठित किए जाएं, जिनमें पूर्व हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीश और पूर्व हाईकोर्ट न्यायाधीश शामिल होंगे।

    चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने यह निर्देश उस समय दिया जब याचिकाकर्ताओं की ओर से यह चिंता जताई गई कि SIR प्रक्रिया में दावों को खारिज किए जाने के खिलाफ स्वतंत्र अपील तंत्र मौजूद नहीं है।

    अदालत ने कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश कुछ पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और दो-तीन पूर्व हाईकोर्ट न्यायाधीशों (संभव हो तो कलकत्ता हाईकोर्ट या पड़ोसी राज्यों से) के नाम सुझा सकते हैं। इसके बाद भारत निर्वाचन आयोग (ECI) उन्हें अधिसूचित कर अपीलीय ट्रिब्यूनल के रूप में नियुक्त करेगा, जो SIR प्रक्रिया से जुड़े मामलों की अपीलें सुनेगा।

    अदालत ने यह भी कहा कि इन पूर्व न्यायाधीशों को दिया जाने वाला मानदेय (honorarium) कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तय करेंगे और इसका पूरा खर्च निर्वाचन आयोग वहन करेगा।

    आपत्तियों की स्थिति

    सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि 9 मार्च तक लगभग 10.16 लाख आपत्तियों का निपटारा किया जा चुका है। इसके लिए पश्चिम बंगाल के 500 और ओडिशा व झारखंड के लगभग 200 न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया है, जो दिन-रात काम कर रहे हैं।

    अदालत ने यह भी नोट किया कि लगभग 700 लॉग-इन आईडी बनाई गई हैं ताकि न्यायिक अधिकारियों को विभिन्न जिलों में तैनात करने की प्रक्रिया सुचारु रूप से चल सके। हालांकि कुछ तकनीकी और लॉजिस्टिक समस्याएं सामने आईं, जिनके बारे में निर्वाचन आयोग के वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि उन्हें जल्द दूर कर दिया जाएगा।

    अदालत ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वह कलकत्ता हाईकोर्ट और न्यायिक अधिकारियों को पूरा सहयोग और आवश्यक सुविधाएं प्रदान करे, जबकि राज्य सरकार को भी इस प्रक्रिया के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा गया।

    अदालत के निर्देश

    अदालत ने प्रक्रिया को सुचारु रखने के लिए कई निर्देश जारी किए, जिनमें शामिल हैं:

    निर्वाचन आयोग कोई नया अनिवार्य नियम लागू नहीं करेगा जब तक कि उसे कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की मंजूरी न मिल जाए।

    पोर्टल से जुड़ी तकनीकी समस्याओं को तुरंत दूर किया जाए।

    न्यायिक अधिकारियों की आवश्यकता के अनुसार नए लॉग-इन आईडी तुरंत जारी किए जाएं।

    नई याचिकाओं पर नाराज़गी

    सुनवाई के दौरान अदालत ने उन आवेदनों पर नाराज़गी जताई जिनमें न्यायिक अधिकारियों की क्षमता पर सवाल उठाया गया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारियों की योग्यता पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

    अदालत ने दो नई रिट याचिकाओं — बिलकिस ताराफदार बनाम ECI और ओम प्रकाश शॉ बनाम ECI — को सुनने से भी इनकार कर दिया और याचिकाकर्ताओं को अपीलीय ट्रिब्यूनल के समक्ष उपलब्ध उपायों का उपयोग करने की स्वतंत्रता देते हुए याचिकाएं वापस लेने की अनुमति दे दी।

    पृष्ठभूमि

    यह मामला पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ा है। जनवरी और फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कई निर्देश दिए थे।

    20 फरवरी को अदालत ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच भरोसे की कमी को देखते हुए दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति का आदेश दिया था।

    28 फरवरी को पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई, जिसमें लगभग 63 लाख नाम हटाए गए, जबकि 60 लाख से अधिक मामलों पर अभी भी निर्णय होना बाकी बताया गया था।

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