पश्चिम बंगाल SIR: लंबित अपीलों पर 'फ्रीज़िंग डेट' मुद्दे पर 13 अप्रैल को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

Praveen Mishra

10 April 2026 1:47 PM IST

  • पश्चिम बंगाल SIR: लंबित अपीलों पर फ्रीज़िंग डेट मुद्दे पर 13 अप्रैल को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

    पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ा मामला शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 9 अप्रैल को मतदाता सूची फ्रीज़ कर दी है, जबकि इस मामले से जुड़ी कई अपीलें अभी लंबित हैं।

    चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ के समक्ष वकील ने कहा कि अपीलीय ट्रिब्यूनल, जिसकी अध्यक्षता पूर्व कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टी.एस. शिवगणनम कर रहे हैं, ने हाल ही में दो अपीलों को स्वीकार किया है। ट्रिब्यूनल ने पाया कि अधिकारियों ने बिना उचित विचार के अपीलकर्ताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए थे।

    वकील ने कहा कि इसी तरह की कई अपीलें अभी भी लंबित हैं, लेकिन 9 अप्रैल को सूची फ्रीज़ होने के कारण इन अपीलकर्ताओं के नाम शामिल नहीं हो पाएंगे।

    इस पर जस्टिस बागची ने कहा,

    “हम 13 अप्रैल को फ्रीज़िंग के मुद्दे पर विचार करेंगे और जरूरत पड़ी तो उचित आदेश पारित करेंगे।”

    वकील ने यह भी कहा कि ECI के वकील के अनुसार 9 अप्रैल के बाद किसी भी दावे पर विचार नहीं किया जाएगा, जबकि इन अपीलकर्ताओं का मताधिकार बना हुआ है और वे उन लोगों के समान स्थिति में हैं जिनकी अपीलें स्वीकार हो चुकी हैं।

    इस दौरान कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि चुनाव के लिए एक कट-ऑफ तारीख होती है, लेकिन मतदाता सूची में नाम होना और मतदान करना एक संवैधानिक अधिकार है, जो अधिक महत्वपूर्ण और स्थायी है।

    वकील ने बताया कि कई अपीलकर्ता पासपोर्ट धारक हैं।

    गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को होना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, SIR प्रक्रिया में करीब 27 लाख दावे खारिज किए गए हैं, और कई अपीलें अभी भी ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित हैं।पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रूप से नाम जोड़ने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, हालांकि अपीलों के निपटारे में समय लग सकता है।

    कोर्ट ने कांग्रेस उम्मीदवार मोटाब शेख को अपीलीय ट्रिब्यूनल में जाने की अनुमति दी थी, जहां ट्रिब्यूनल ने यह कहते हुए उनका नाम बहाल कर दिया कि निर्वाचन आयोग उनके नाम हटाने का कारण नहीं बता सका।

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