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"हमने सीलबंद कवर में रिपोर्ट नहीं मांगी थी" : सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने में देरी के लिए यूपी राज्य की खिंचाई की

LiveLaw News Network
20 Oct 2021 1:20 PM GMT
हमने सीलबंद कवर में रिपोर्ट नहीं मांगी थी : सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने में देरी के लिए यूपी राज्य की खिंचाई की
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को लखीमपुर खीरी में हाल ही में हुई हिंसा की घटना में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने में देरी के लिए उत्तर प्रदेश राज्य की खिंचाई की। उत्तर प्रदेश सरकार ने यह स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दायर की थी।

मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने कहा कि सुनवाई से कम से कम एक दिन पहले रिपोर्ट दायर की जानी चाहिए ताकि कोर्ट को इसे पढ़ने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

उत्तर प्रदेश राज्य के वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने न्यायालय को सूचित किया कि राज्य द्वारा एक स्टेटस रिपोर्ट दायर की गई है। बेंच ने हालांकि टिप्पणी की कि अगर रिपोर्ट अंतिम समय में दायर की जाती है तो कोर्ट के लिए इसे पढ़ना मुश्किल हो जाता है

सीजेआई ने पूछा,

"आखिरी मिनट अगर यह रिपोर्ट दायर की गई है तो हम इसे कैसे पढ़ेंगे?" ।

स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने में देरी का कारण बताते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता साल्वे ने प्रस्तुत किया कि उनकी समझ यह थी कि रिपोर्ट को एक सीलबंद लिफाफे में दिया जाना है। पीठ ने हालांकि कहा कि उसने सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट देने के लिए नहीं कहा था और इसे सुनवाई से कम से कम एक दिन पहले प्रस्तुत किया जाना चाहिए था।

सीजेआई ने जवाब दिया,

"नहीं नहीं, बिल्कुल नहीं। हमें रिपोर्ट अभी मिली है। हम उम्मीद कर रहे थे कि यह कम से कम एक दिन पहले हमें मिले।"

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा,

"हमने सीलबंद लिफाफे की रिपोर्ट नहीं मांगी थी।"

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा कि न्यायाधीशों ने राज्य की ओर से कुछ अतिरिक्त सामग्री आने का बुधवार को दोपहर 1 बजे तक इंतजार किया, लेकिन कुछ भी दायर नहीं किया गया।

पीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें लखीमपुर खीरी की हालिया हिंसक घटना की समयबद्ध सीबीआई जांच की मांग की गई थी, जिसमें आठ लोगों की जान जाने का दावा किया गया था, जिनमें से चार किसान प्रदर्शनकारी थे, जिन्हें कथित तौर पर आरोपी केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद अजय कुमार मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा के काफिले में वाहनों द्वारा कुचल दिया गया था। ।

पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि उसे यह आभास हो रहा है कि यूपी पुलिस जांच में "अपने पैर खींच रही है"।

पीठ ने यह मौखिक टिप्पणी यह ​​देखने के बाद की कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत केवल चार गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं, हालांकि 44 गवाह हैं।

सुनवाई 26 अक्टूबर को जारी रहेगी। सुनवाई की विस्तृत रिपोर्ट के लिए यहां पढ़ें।

केस : लखीमपुर खीरी (यूपी) में फिर से हिंसा में जान गंवानी पड़ी| WP(Crl) No.426/2021


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