क्या पूर्व एचसी जजों को बार काउंसिल में महिला सदस्य के तौर पर शामिल करने से आर्टिकल 220 के तहत रोक लागू होती है? सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार
Shahadat
24 Aug 2026 4:52 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह इस बात पर विचार करेगा कि क्या पूर्व हाईकोर्ट जजों को स्टेट बार काउंसिल में महिला सदस्य के तौर पर शामिल करने से संविधान के आर्टिकल 220 के तहत रोक लागू होती है। यह आर्टिकल किसी पूर्व हाई कोर्ट जज को उसी कोर्ट में प्रैक्टिस करने से रोकता है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) की अध्यक्षता वाली बेंच ने सीनियर एडवोकेट संजय पारिख की दलीलें सुनीं, जिन्होंने पूर्व हाईकोर्ट जज को शामिल करने का विरोध किया।
मौखिक रूप से अपनी बात रखते हुए छह काउंसिलों का प्रतिनिधित्व कर रहे पारिख ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पारित करने से पहले कई पहलुओं, जैसे धूलिया कमेटी की रिपोर्ट, पर विचार नहीं किया।
पारिख ने पूछा कि क्या कोर्ट एडवोकेट्स एक्ट के खिलाफ जाकर संविधान के आर्टिकल 142 का इस्तेमाल करते हुए कोई आदेश पारित कर सकता है।
CJI ने जवाब दिया कि कोर्ट को ऐसा आदेश पारित करने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि अलग-अलग पक्षों की ओर से को-ऑप्शन (Co-Option) को लागू करने के तरीके को लेकर बार-बार आवेदन आ रहे थे।
CJI ने कहा,
"हर दिन एक नया आवेदन, नई बात सामने आती थी। हर दिन नए मानदंड सुझाए जाते थे और यह बहुत मुश्किल होता जा रहा था।"
CJI ने इस बात पर जोर दिया कि यह आदेश महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पारित किया गया, जिसका सभी ने स्वागत किया।
हालांकि, पारिख ने कहा कि एक संवैधानिक मुद्दा उठ सकता है, क्योंकि संविधान के आर्टिकल 220 के अनुसार, रिटायर हो चुके हाईकोर्ट जज उसी कोर्ट में प्रैक्टिस नहीं कर सकते। इसलिए अगर रिटायर हो चुके हाईकोर्ट जज को बार काउंसिल का सदस्य बनाया जाता है, तो आर्टिकल 220 के तहत रोक लागू हो सकती है।
पारिख ने कहा,
"जिस जज के अधिकार क्षेत्र में मामला हो, वह प्रैक्टिस नहीं कर सकता। इसलिए अगर किसी ऐसे व्यक्ति को वकीलों की संस्था का सदस्य बनाया जाता है, जिसे प्रैक्टिस करने से रोका गया..."
CJI ने कहा कि अगर ऐसा कोई मुद्दा उठता है तो कोर्ट उस पर विचार करेगा।
CJI ने कहा,
"आइए इंतजार करें, अगर कोई चीफ जस्टिस यह मुद्दा हमारे पास भेजता है, तो हम इसकी जांच करेंगे। हम इस हिस्से की जांच करने के लिए तैयार हैं। आपने कुछ नया बताया है, जो काउंसिल के गठन में बाधा बन सकता है। हम इसकी जांच करेंगे। लेकिन आदेश के बाकी हिस्से को हम नहीं बदलेंगे।"
यह मुद्दा स्टेट बार काउंसिल में सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार महिलाओं के लिए 30% आरक्षण लागू करने से जुड़ा है। कोर्ट ने 10% सीटों पर महिलाओं को सीधे शामिल करने (co-opt) की इजाज़त दी है, क्योंकि हो सकता है कि हर राज्य में महिला उम्मीदवार पर्याप्त संख्या में उपलब्ध न हों। चूंकि इस बात को लेकर उलझन थी कि महिलाओं को सीधे शामिल करने की प्रक्रिया कैसे लागू की जाए, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त को एक आदेश जारी किया। इस आदेश के तहत हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को यह अधिकार दिया गया कि वे पूर्व हाईकोर्ट जजों या वकीलों में से महिला सदस्यों को सीधे शामिल कर सकें।


