जवाहर नवोदय विद्यालय योजना दो-भाषा नीति के खिलाफ: तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

Praveen Mishra

11 March 2026 2:00 PM IST

  • जवाहर नवोदय विद्यालय योजना दो-भाषा नीति के खिलाफ: तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

    तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) योजना राज्य की दो-भाषा नीति के साथ असंगत है, इसलिए इसे वर्तमान स्वरूप में राज्य में लागू नहीं किया जा सकता।

    राज्य सरकार ने अदालत में दायर अपने हलफनामे में कहा कि नवोदय विद्यालय योजना तीन-भाषा फार्मूले पर आधारित है, जबकि तमिलनाडु में दो-भाषा नीति लागू है। इस कारण यदि JNV योजना को वर्तमान रूप में लागू किया जाता है तो तमिलनाडु तमिल लर्निंग एक्ट, 2006 के प्रावधानों से विचलन होगा, जो कानूनन स्वीकार्य नहीं है।

    राज्य का पक्ष

    हलफनामे में कहा गया कि भले ही शिक्षा समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय है, लेकिन किसी भी राष्ट्रीय योजना को लागू करते समय राज्य के कानून, नीतियों, प्रशासनिक क्षमता और वित्तीय स्थिति का ध्यान रखना आवश्यक है।

    सुप्रीम कोर्ट के 15 दिसंबर 2025 के आदेश के अनुसार केंद्र और तमिलनाडु सरकार के अधिकारियों के बीच 5 जनवरी 2026 को एक बैठक हुई थी, जिसमें राज्य ने इस मुद्दे पर अपना विस्तृत रुख रखा।

    तमिलनाडु सरकार ने बताया कि उसकी दो-भाषा नीति 23 जनवरी 1968 के विधानसभा प्रस्ताव से शुरू हुई थी और बाद में इसे तमिलनाडु तमिल लर्निंग एक्ट, 2006 के माध्यम से कानूनी मान्यता दी गई। इस कानून के तहत स्कूलों में तमिल और अंग्रेज़ी अनिवार्य हैं, जबकि तीसरी भाषा केवल वैकल्पिक विषय के रूप में पढ़ाई जा सकती है।

    वहीं, नवोदय विद्यालयों में तीन भाषाओं—हिंदी, अंग्रेज़ी और क्षेत्रीय भाषा—का अनिवार्य अध्ययन होता है, जो तमिलनाडु की नीति से टकराता है।

    राज्य के अपने मॉडल स्कूल

    तमिलनाडु ने अदालत को यह भी बताया कि नवोदय योजना का उद्देश्य—ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा देना—राज्य पहले से ही पूरा कर रहा है।

    राज्य ने प्रत्येक जिले में 38 मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल स्थापित किए हैं, जहां कक्षा 9 से 12 तक मेधावी छात्रों को आवासीय शिक्षा दी जाती है।

    प्रत्येक स्कूल पर लगभग ₹50 करोड़ की पूंजी लागत आती है।

    इन 38 स्कूलों के संचालन पर हर साल लगभग ₹210 करोड़ खर्च होता है, जिसे पूरी तरह राज्य सरकार वहन करती है।

    राज्य के अनुसार, इन स्कूलों से अच्छे परिणाम भी मिले हैं। 2024-25 शैक्षणिक वर्ष में 1,340 छात्रों को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश मिला, जबकि कई छात्रों को अंतरराष्ट्रीय छात्रवृत्तियां भी मिलीं।

    केंद्र को सुझाव

    तमिलनाडु सरकार ने सुझाव दिया कि नए नवोदय विद्यालय खोलने के बजाय केंद्र सरकार राज्य के मौजूदा मॉडल रेजिडेंशियल स्कूलों को वित्तीय सहायता दे। साथ ही, यदि नवोदय योजना लागू करनी है तो उसके नीतिगत और संचालन ढांचे को राज्य के कानून और नीतियों के अनुरूप संशोधित किया जाए।

    समग्र शिक्षा योजना का मुद्दा

    राज्य ने यह भी बताया कि समग्र शिक्षा योजना (Samagra Shiksha) के तहत केंद्र सरकार की स्वीकृत राशि का बड़ा हिस्सा जारी नहीं किया गया है।

    2024-25 और 2025-26 के लिए केंद्र का कुल स्वीकृत हिस्सा ₹3,998.82 करोड़ था।

    लेकिन अब तक केवल ₹450.60 करोड़ ही जारी किए गए हैं, जबकि ₹3,548.22 करोड़ लंबित हैं।

    राज्य के अनुसार, इससे शिक्षा कार्यक्रमों और स्कूल शिक्षा व्यवस्था पर असर पड़ रहा है।

    पृष्ठभूमि

    यह मामला तमिलनाडु सरकार की उस याचिका से जुड़ा है जिसमें उसने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को हर जिले में एक नवोदय विद्यालय स्थापित करने का निर्देश दिया था।

    हाईकोर्ट ने कहा था कि राज्य द्वारा नवोदय विद्यालयों की अनुमति न देना छात्रों के शैक्षणिक विकल्प के अधिकार को सीमित करता है और यह मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के अनुरूप नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर 2025 को केंद्र और राज्य सरकार को इस मुद्दे पर आपसी परामर्श (consultation) करने का निर्देश दिया था और इसे संघीय सहयोग (federal discussion) के रूप में आगे बढ़ाने को कहा था।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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