यूपी में फार्महाउस में चल रहा फर्जी मेडिकल कॉलेज, चेयरमैन अनपढ़ चाय वाला: सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान
Shahadat
11 Oct 2026 8:18 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में कथित फ़र्ज़ी मेडिकल कॉलेज का संज्ञान लिया। यह कॉलेज एक जर्जर फ़ार्महाउस से चल रहा है, जहां एक अनपढ़ चाय वाले को संस्थान का चेयरमैन दिखाया गया। उसने माना कि वह कॉलेज चलाने वाले व्यक्ति द्वारा दिए गए दस्तावेज़ों पर नियमित रूप से हस्ताक्षर करता है।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) और सभी रेगुलेटरी अथॉरिटीज़ को निर्देश दिया कि वे लोगों को चेतावनी देने के लिए पब्लिक एडवाइज़री जारी करें। इसमें लोगों से कहा जाए कि वे किसी भी शैक्षणिक संस्थान में एडमिशन लेने या उससे कोई लेन-देन करने से पहले उसकी असलियत की जांच कर लें।
कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह रेगुलेटरी अथॉरिटीज़ द्वारा इन निर्देशों के पालन पर नज़र रखे।
कोर्ट ने कहा,
"ASG मिस्टर के.एम. नटराज ने सुझाव दिया कि UGC को ज़मीनी स्तर पर हो रही ऐसी गतिविधियों का पता चलने पर सभी अथॉरिटीज़/संस्थानों और खासकर आम जनता के लिए एडवाइज़री जारी करनी चाहिए। इसमें कहा जाए कि वे ऐसे संस्थानों की असलियत की जांच किए बिना उनमें एडमिशन न लें या उनसे कोई लेन-देन न करें।"
कोर्ट को यह सुझाव उपयोगी लगा और इसलिए UGC और सभी रेगुलेटरी अथॉरिटीज़ को निर्देश दिया गया कि वे इस तरह की पब्लिक एडवाइज़री जारी करें और उसके अनुसार कार्रवाई करें।
कोर्ट ने कहा,
"हमें यह सुझाव उपयोगी लगा और इसलिए UGC और सभी रेगुलेटरी अथॉरिटीज़ को निर्देश दिया जाता है कि वे ऐसी पब्लिक एडवाइज़री जारी करें और उसके अनुसार कार्रवाई करें।"
यह बेंच देश भर के शैक्षणिक संस्थानों (स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों सहित) के कामकाज से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रही है। यह मामला नोएडा की एमिटी यूनिवर्सिटी से जुड़ा है और बाद में इसका दायरा पूरे देश में बढ़ा दिया गया।
कोर्ट ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक अख़बार रिपोर्ट का संज्ञान लिया। यह रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के एटा ज़िले के महमूदपुर नगरिया गाँव में एक फ़ार्महाउस से चल रहे कथित फ़र्ज़ी मेडिकल कॉलेज के बारे में थी।
कोर्ट के सामने पेश की गई जानकारी के अनुसार, यह संस्थान कथित तौर पर D.Pharma, B.Pharma, B.Sc. Nursing, DMLT, BMLT, BAMS, GNM और ANM जैसे कोर्स ऑफ़र करता है। कोर्ट ने देखा कि यह संस्थान एक खेत के बीच बने पुराने, जर्जर ढांचे से चल रहा है, जिसमें दो या तीन कमरे हैं और आस-पास कोई दूसरी इमारत नहीं दिख रही है। इमारत का रखरखाव भी ठीक से नहीं किया गया।
आदेश में दर्ज किया गया कि भगवान दास सिंह बघेल नाम के एक व्यक्ति को, जो अनपढ़ चाय विक्रेता बताया गया, संस्थान का चेयरमैन दिखाया गया।
कोर्ट ने कहा,
"पूछताछ करने पर [उन्होंने] यह जाहिर किया कि उन्हें कुछ पता नहीं है कि क्या हो रहा है। हालांकि, उन्होंने माना कि वे नियमित रूप से सतेन्द्र कुमार द्वारा दिए गए कॉलेज के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते हैं।"
बताया गया कि सतेन्द्र कुमार ही संस्थान चला रहे हैं। यूपी सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने कोर्ट को बताया कि अखबार की रिपोर्ट के बाद स्थानीय पुलिस ने उनके और तीन अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।
कोर्ट ने यूपी सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया की सराहना की। साथ ही यह भी बताया गया कि इस मामले की स्वतंत्र जांच के आदेश दिए गए। कोर्ट ने इसे UGC और सभी रेगुलेटरी बॉडीज़ के लिए महत्वपूर्ण माना ताकि UGC भविष्य में ऐसी समस्याओं को रोकने के लिए गाइडलाइंस जारी कर सके। हालांकि, कोर्ट ने UGC को अधिकारियों, संस्थानों और आम जनता के लिए एडवाइजरी जारी करने का निर्देश दिया, जिसमें उन्हें शैक्षणिक संस्थानों की प्रमाणिकता की जांच किए बिना उनके साथ कोई भी लेन-देन या व्यवहार न करने के प्रति आगाह किया गया।
Case Title : Case: Ayesha Jain v. Amity University, Noida & Ors.

